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सिंचाई घोटाला: नागपुर के साथ अमरावती ACB ने भी दे दी अजित पवार को क्लीन चिट, एक ही दिन दिया हलफनामा

Vidarbha irrigation Scam: खास बात यह है कि अमरावती एसीबी के एसपी श्रीकांत धिवरे ने भी उसी दिन हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि एसीबी को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले, जिनकी वजह से अरबों के सिंचाई घोटाले में अजीत पवार पर दोष डाला जा सके।

अजित पवार (फाइल फोटो-पीटीआई)

महाराष्ट्र के एंटी करप्शन ब्यूरो के नागपुर ऑफिस के साथ-साथ अमरावती दफ्तर ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर पूर्व डिप्टी सीएम और जल संसाधन मंत्री अजीत पवार को सिंचाई प्रोजेक्ट्स में हुई अरबों की धांधली के मामले में क्लीन चिट दी है। पहले एसीबी के नागपुर दफ्तर ने शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार बनने से एक दिन पहले 27 नवंबर को हाई कोर्ट में हलफनामा देकर अजीत पवार को क्लीन चिट दी थी।

खास बात यह है कि अमरावती एसीबी के एसपी श्रीकांत धिवरे ने भी उसी दिन हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि एसीबी को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले, जिनकी वजह से अरबों के सिंचाई घोटाले में अजीत पवार पर दोष डाला जा सके। और तो और, इस हलफनामे में इस्तेमाल भाषा बिलकुल वैसी ही है, जैसा कि एफिडेविट नागपुर की एसीबी एसपी रश्मि नांदेकर की ओर से दाखिल की गई थी। एसीबी के मुताबिक, उसने बीते छह महीनों में मिलीं उन तीन चिट्ठियों को आधार बनाया जो तत्कालीन बीजेपी की अगुआई वाली सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की ओर से भेजी गई हैं।

महा विकास अघाड़ी की सरकार बनने के अगले दिन ही इस क्लीन चिट को लेकर सवाल उठे।  ताजा हलफनामा नवंबर में एसीबी की ओर से दाखिल एफिडेविट से अलग मालूम होता है। नवंबर 2018 वाले हलफनामे में कहा गया था कि सिंचाई प्रोजेक्ट्स से जुड़े ठेके देने की प्रक्रिया में अजीत पवार ने दखल दी थी। साल भर के भीतर दाखिल दो हलफनामे में इतने बड़ा बदलाव क्यों है, इस बारे में पूछे जाने पर एसीबी चीफ परमबीर सिंह ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, 26 नवंबर 2018 को एफिडेविट दाखिल करने वाले तत्कालीन एसीबी चीफ और मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बरवे ने भी कॉल या मैसेज पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

एसीबी चीफ परम बीर सिंह ने कहा, ‘हमारे निष्कर्षों के पीछे क्या वजह है, इस बात का जिक्र हलफनामे में किया गया है।’ एक ही केस में साल भर के अंतर में दाखिल दो हलफनामों में अलग-अलग निष्कर्षों पर एसीबी के एक अधिकारी ने कहा कि ताजा हलफनामा वर्तमान वर्ष में मिली तीन चिट्ठियों पर आधारित है। पहली चिट्ठी जल संसाधन मंत्रालय की ओर से 7 मई को मिली।

इसमें कहा गया कि विदर्भ इरिगेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (VIDC) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को तत्कालीन चेयरमैन अजीत पवार को जानकारी देनी चाहिए थी, अगर नियम कायदों से हटकर कोई फैसला लिया गया। वहीं, पिछले साल दाखिल एफिडेविट में महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस एंड इंस्ट्रक्शंस के सेक्शन 10 का हवाला देकर कहा गया कि यह धारा विभाग के इंचार्ज मंत्री को सभी क्रियाकलापों के लिए जिम्मेदार बनाता है। वहीं, सेक्शन 14 के तहत सेक्रेटरी के इन नियमों के पालन को लेकर सजग रहने के लिए जिम्मेदार बनाता है।

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