महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। राज्य में कुल 288 विधानसभा क्षेत्र है, जिसमें से 25 शहरी है। इन 25 सीटों के 40 फीसदी से ज़्यादा वोटरों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) फॉर्म जमा नहीं हो पाए। ऐसे उनके नाम 31 अगस्त को पब्लिश होने वाले ड्राफ्ट रोल में नहीं होंगे। द इंडियन एक्सप्रेस को मिले चुनाव क्षेत्र के हिसाब से डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि इन 25 में से 17 मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में, सात पुणे और एक नागपुर में हैं।
इन 25 चुनाव क्षेत्रों में 1.10 करोड़ वोटर हैं, जिनमें से 48.17 लाख यानी 43.7 फीसदी, का पता नहीं चल सका। यह राज्य में जमा न हुए सभी फॉर्म का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। पूरे राज्य में महाराष्ट्र के 9.78 करोड़ वोटरों में से 2.07 करोड़, या 21.16 फीसदी के फॉर्म जमा नहीं हो पाए। उन वोटरों के नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर रह सकते हैं और फिर उन्हें अपना नाम वापस पाने के लिए क्लेम करना होगा।
भिवंडी ईस्ट सीट पर कटे सबसे अधिक नाम
भिवंडी ईस्ट सीट पर सबसे ज़्यादा 49.11 फीसदी नाम रोल में नहीं है, जो राज्य के औसत से लगभग ढाई गुना ज़्यादा है। इसके लगभग आधे वोटर (3.76 लाख वोटर्स में से 1.84 लाख) के फॉर्म जमा नहीं हो पाए। कोलाबा सीट पर 46.98 फीसदी, खड़कवासला में 46.64 फीसदी, नालासोपारा में 46.43 फीसदी और कोथरुड में 46.26 फीसदी वोटर्स के फॉर्म जमा नहीं हुए। कल्याण रूरल और हड़पसर उन सात सीटों में हैं, जहां 45 फीसदी से ज़्यादा वोटर्स के फॉर्म जमा नहीं हुए।
नालासोपारा में राज्य में कहीं भी सबसे ज़्यादा फॉर्म नहीं जमा हुए हैं। 6.62 लाख वोटर्स में से 3.07 लाख वोटर्स के फॉर्म नहीं जमा हुए। हड़पसर में 2.98 लाख, पनवेल में 2.83 लाख, खड़कवासला में 2.78 लाख और कल्याण रूरल में 2.52 लाख फॉर्म जमा नहीं हुए। कई बूथ लेवल ऑफिसर मतदाताओं तक पहुंचने में मुश्किल को शहरों में भीड़भाड़ का कारण मानते हैं। घनी आबादी, ऊंची इमारतें और बहुत ज़्यादा घूमने-फिरने वाली आबादी की वजह से घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करना मुश्किल हो जाता है। मुंबई, ठाणे और पुणे में, लोगों ने बताया है कि BLO घरों तक नहीं पहुंच रहे हैं, और फॉर्म बिल्डिंग के गेट पर ही छोड़ दिए गए हैं।
नाम कटने का क्या है कारण?
महाराष्ट्र के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर एस चोकलिंगम ने कहा कि शहरी इलाकों में फॉर्म जमा न होने का ज़्यादा प्रतिशत आबादी के आने-जाने से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा, “लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं और उनके इलेक्टोरल रिकॉर्ड हमेशा अपडेट नहीं होते हैं। एक और बात जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है, वह यह है कि यह बड़ा बदलाव 24 साल से ज़्यादा समय के बाद किया जा रहा है। पिछला SIR 2002 में किया गया था और तब से इलेक्टोरल रोल को पूरी तरह से अपडेट नहीं किया गया है। हमें लगभग 34 लाख मरे हुए वोटरों के नामों को भी ध्यान में रखना होगा। ड्राफ्ट रोल फाइनल वोटर लिस्ट नहीं है। पात्र वोटर फॉर्म 8 के ज़रिए सुधार की मांग कर सकते हैं या क्लेम और ऑब्जेक्शन के समय फॉर्म 6 के ज़रिए नाम शामिल करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।”
बीजेपी ने 2024 के विधानसभा चुनाव में कोलाबा, खड़कवासला, नालासोपारा और कोथरुड में जीत हासिल की थी और शिवसेना ने कल्याण ग्रामीण और अजित पवार की NCP ने हड़पसर में जीत हासिल की। भिवंडी ईस्ट समाजवादी पार्टी के खाते में गई। यहां 45 फीसदी नाम कटे हैं। भिवंडी ईस्ट, मानखुर्द शिवाजीनगर, चांदीवली, मुंबादेवी और मलाड के कुछ हिस्सों सहित कई सबसे ज़्यादा प्रभावित सीटों पर मुस्लिम और अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी है और बड़े पैमाने पर अनौपचारिक बस्तियां हैं। कोलाबा, सायन कोलीवाड़ा, धारावी और वर्ली में शहर की पारंपरिक मछली पकड़ने वाली बस्तियां शामिल हैं।
फाइनल रोल 19 अक्टूबर को होगा जारी
तीन SC सीटें हैं, जहां 40 फीसदी से अधिक नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं। अंबरनाथ में 44.21 फीसदी, पिंपरी में 41.26 और पुणे कैंटोनमेंट में 40.47 फीसदी नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं। नागपुर नॉर्थ (SC) में 36.59 फीसदी, धारावी (SC) में 34.55 फीसदी और बोइसर (ST) में 34.41 फीसदी नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। घर-घर जाकर सर्वे 30 जून से 18 अगस्त तक चला। 31 अगस्त को ड्राफ्ट रोल पब्लिश होने के बाद क्लेम और ऑब्जेक्शन खुलेंगे, और फाइनल रोल 19 अक्टूबर को जारी किया जाएगा।
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अगले हफ्ते जारी होने वाली दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हर तीसरा नाम हटाया जा सकता है। इस बात की जानकारी सरकारी आंकड़ों से मिलती है। दिल्ली में एसआईआर के गणना फेज के आखिरी दिन सोमवार को रात आठ बजे तक, सीईओ के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, केवल 97.47 लाख मतदाताओं के फॉर्म इकट्ठा किए गए थे और आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए थे। पढ़ें पूरी खबर
