श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अयोध्या के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) के चयन को लेकर अयोध्या में संत समाज की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने इस नियुक्ति को लेकर अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि राम मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल की व्यवस्था केवल प्रशासनिक दक्षता के आधार पर नहीं, बल्कि गहरी आस्था, समर्पण और श्रद्धा की भावना के साथ संचालित होनी चाहिए।
अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास का कहना है कि धार्मिक स्थल और सामान्य प्रशासनिक संस्थान के कामकाज में मूलभूत अंतर होता है। उनके मुताबिक, मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और भक्तों से जुड़ी व्यवस्था में ऐसे व्यक्ति की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है, जो साधु-संत परंपरा और धार्मिक भावनाओं को करीब से समझता हो। उन्होंने कहा कि एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) देश के लिए काम किया है, यह अच्छी बात है लेकिन यहां पर संतों को ही भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि एक वेतनभोगी कर्मचारी से उस स्तर की पूजा और भक्ति की अपेक्षा करना उचित नहीं है, जैसी भावना एक साधु के भीतर होती है। उनका जोर इस बात पर रहा कि राम मंदिर में होने वाली धार्मिक गतिविधियां केवल औपचारिक या व्यावसायिक प्रक्रिया का हिस्सा न बनें, बल्कि उनमें वास्तविक श्रद्धा और भक्ति का भाव दिखाई देना चाहिए।
महंत राजू दास ने नए सीईओ के सामने आने वाली जिम्मेदारियों के संदर्भ में कई सुझाव भी रखे। उन्होंने कहा कि अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की ओर से मुफ्त भोजन की व्यवस्था की जानी चाहिए। बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में उनके लिए भोजन जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराना धार्मिक सेवा की भावना को मजबूत कर सकता है।
उन्होंने अयोध्या के संतों के लिए दर्शन की सुविधा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। महंत राजू दास के अनुसार, स्थानीय संतों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे उन्हें रामलला के दर्शन में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
गौशालाओं के प्रबंधन और संरक्षण पर दिया सुझाव
इसके अलावा उन्होंने अयोध्या की गौशालाओं की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि शहर में मौजूद कई गौशालाओं को बेहतर देखभाल और संसाधनों की जरूरत है। राम मंदिर ट्रस्ट को ऐसी गौशालाओं को अपनाकर उनके प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे धार्मिक नगरी की सेवा और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा सकेगा।
महंत राजू दास ने अयोध्या के पुराने और संसाधनों की कमी से जूझ रहे मंदिरों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि शहर में कई ऐसे मंदिर हैं जो उचित देखरेख के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। कुछ धार्मिक स्थल तो धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। उनका सुझाव है कि राम मंदिर ट्रस्ट को ऐसे मंदिरों को भी संरक्षण के दायरे में लाना चाहिए और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
महंत राजू दास की इन टिप्पणियों से साफ है कि राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ के सामने केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं, बल्कि अयोध्या की व्यापक धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे भी चुनौती के रूप में मौजूद रहेंगे। अब यह देखना अहम होगा कि ट्रस्ट आने वाले समय में संत समाज के इन सुझावों और अपेक्षाओं पर किस तरह विचार करता है।
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मंदिर परिसर के साथ-साथ शहर की धार्मिक विरासत, संत समाज, गौशालाओं और पुराने मंदिरों के संरक्षण को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। महंत राजू दास की मांगें इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा रही हैं।
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अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ का ऐलान कर दिया गया है। करीब 2 महीने से चल रही इस प्रक्रिया का आखिरी पड़ाव बुधवार को आया जब ट्रस्ट की बैठक में नए सीईओ के नाम की घोषणा की गई। एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ नियुक्त किया गया है। सीईओ के ऐलान के साथ-साथ ट्रस्ट के तीन नए ट्रस्टी भी बनाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
