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महानदी जल बंटवारा: विवाद सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने की पहल, नवीन पटनायक ने जताई नाराज़गी

नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती की ओर से बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दोनों राज्यों में बांध परियोजनाओं की जांच परख के लिए एक समिति गठित की जाएगी जिसमें महानदी पर बनी परियोजना शामिल है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 17, 2016 8:55 PM
Mahanadi water Dispute, Mahanadi Issue, Mahanadi Dispute, Mahanadi River, Odisha vs Chattisgarh, Naveen Patnaik, Mahanadi Odisha Chattisgarh, Naveen Patnaik Newsओड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक। (फाइल फोटो)

केंद्र सरकार ने शनिवार (17 सितंबर) को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के साथ महानदी जल विवाद को सुलझाने का प्रयास करते हुए शनिवार को त्रिपक्षीय बैठक की लेकिन ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक खुश नहीं है। पटनायक ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने के बारे में रविवार (18 सितंबर) निर्णय करेगी। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती की ओर से बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दोनों राज्यों में बांध परियोजनाओं की जांच परख के लिए एक समिति गठित की जाएगी जिसमें महानदी पर बनी परियोजना शामिल है। समिति देखेगी कि इनके निर्माण के दौरान क्या नियमों को तोड़ा मरोड़ा गया है। महानदी जल बंटवारा से जुड़ा विषय दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय बन गया है।

पटनायक ने कहा कि वे चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ तत्काल बैराज के निर्माण के कार्य को रोक दें लेकिन बैठक में उनकी मांग नहीं स्वीकार की गई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह भी मौजूद थे। ओडिशा के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैंने कल (रविवार, 18 सितंबर) भुवनेश्वर में कैबिनेट की बैठक बुलाई है। हम आगे उठाए जाने वाले कदमों के बारे में निर्णय करेंगे। हम ओडिशा के लोगों के हितों की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’ इससे पहले उमा भारती ने कहा कि समिति गठित करने का निर्णय आमसहमति से लिया गया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘विशेष कार्य अधिकारी के तहत छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सभी परियोजनाओं की जांच परख करने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। ऐसी परियोजनाएं जिनका पहले तकनीकी परामर्श समिति से अध्ययन कराना था लेकिन इनका निर्माण तकनीकी परामर्श समिति की अनुमति के बिना ही किया जा रहा हो।

उमा ने कहा, ‘ओएसडी के तहत समिति एक सप्ताह के भीतर दोनों राज्यों के आंकड़ों का अध्ययन करेगी और यह देखेगी कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया है।’ समिति में दोनों राज्यों के अधिकारी सदस्य के रूप में होंगे और एक सप्ताह में परियोजनाओं का अध्ययन करेंगे। दो टीमों को दोनों राज्यों में आंकड़ा एकत्र करने के लिए भेजा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा सरकार के प्रस्ताव के अनुरूप एक अन्य समिति का भी गठन किया जाएगा जो जो मॉनसून और अन्य अवधि के दौरान महानदी बेसिन और जल ग्रहण क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन करेगी।

वहीं, पटनायक ने दावा किया कि महानदी पर बैराज का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से किया जा रहा है और इससे ओडिशा में पेयजल और सिंचाई सुविधाएं प्रभावित होंगी। हालांकि रमण सिंह ने इसे कमतर करने का प्रयास किया। विवाद के निपटारे के लिए केंद्रीय मंत्री ने प्रस्ताव किया कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों एक सप्ताह तक परियोजना का काम रोक दें जो दोनों राज्यों के लिए विवाद का विषय बन गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों राज्य इस पर सहमत हुए, उन्होंने कहा कि हम केवल प्रस्ताव कर सकते हैं क्योंकि जल राज्य सूची का विषय है।

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