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नेस्ले को उपभोक्ता अदालत में घसीटा

मैगी नूडल्स विवाद पर नेस्ले के लिए आज कुछ और नई परेशानियां पैदा हो गर्इं। सरकार ने जहां कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने के संकेत दिए वहीं साथ ही ‘अनुचित व्यापार व्यवहार व भ्रामक विज्ञापनों’ को लेकर कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में घसीट लिया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

Author June 8, 2015 8:46 AM
जुर्माना लगाने के भी संकेत दिए सरकार ने

मैगी नूडल्स विवाद पर नेस्ले के लिए आज कुछ और नई परेशानियां पैदा हो गर्इं। सरकार ने जहां कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने के संकेत दिए वहीं साथ ही ‘अनुचित व्यापार व्यवहार व भ्रामक विज्ञापनों’ को लेकर कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में घसीट लिया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं की ओर से उपभोक्ता मामलात विभाग ने अब आयोग में शिकायत दायर की है। यह कदम एफएसएसएआइ के उस आदेश पर आधारित है जिसमें कहा गया है कि नेस्ले अनुचित व्यापार व्यवहार व भ्रामक विज्ञापन जारी करने में संलिप्त रही है।’ एफएसएसएआई ने इस उत्पाद को ‘असुरक्षित और मानव उपभोग के लिए खतरनाक’ बताते हुए इसे बाजार से वापस लिए जाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा,‘ हमने इस मामले में अतिरिक्त सालिसिटर जनरल की राय मांगी है और सरकार की ओर से वह आयोग में उपस्थित होंगे।’

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार जुर्माने की मांग भी कर रही है, सूत्रों ने कहा- अगर आयोग फर्म को गलत पाता है तो उसके पास जुर्माना लगाने का अधिकार है। सरकार ने अपनी तरफ से पिछले सप्ताह ही कंपनी के खिलाफ एक शिकायत आयोग में की थी।

रविवरा को नेस्ले की दो मिनट में तैयार होने वाली ‘मैगी’ नूडल्स पर संकट उस समय और बढ़ गया जब गोवा ने भी मैगी पर पाबंदी लगा दी। इसकी बिक्री पर रोक लगाने वाला गोवा देश का 11 वां राज्य बन गया है। वहीं केंद्र ने संकेत दिया है कि और भी ‘फास्ड फूड’ उत्पादों की जांच हो सकती है।

गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने मैगी पर पाबंदी की घोषणा की, जो खाद्य सुरक्षा चिंताओं को लेकर देश भर में विवाद के केंद्र में है। यह फैसला विभिन्न राज्यों की ओर से उठाए गए कदम के मद्देनजर किया गया है। हालांकि, गोवा के स्वास्थ्य नियामक ने उसमें कोई नुकसानदेह तत्व नहीं पाया है। उन्होंने पणजी के पास मपुसा शहर में संवाददाताओं से कहा, ‘चूंकि देश भर में मैगी पर पहले ही पाबंदी लग गई है, इसलिए हमने कोई जोखिम नहीं उठाने का फैसला किया और गोवा में इसे प्रतिबंधित कर दिया।’

एक सवाल के जवाब में गोवा के मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य ब्रांडों के बाकी पैक्ड खाद्य उत्पादों की भी जांच होगी। ‘वास्तव में हमे अन्य पैकेड खाद्य उत्पादों की जांच करने की जरूरत है।’

दिल्ली में आयुष राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने मैगी विवाद के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘इसमें जो सीसा पाया गया है वह स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। यही कारण है कि इसे प्रतिबंधित किया गया है।’ नाइक ने एक कार्यक्रम से इतर कहा, ‘ऐसे कई अन्य उत्पाद हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि एक उत्पाद प्रतिबंधित कर दिया गया और काम खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और यहां तक कि राज्य भी उन स्थानों पर नजर रखे हुए हैं जहां ऐसे उत्पाद उपलब्ध हैं।’

‘द कान्फेडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स’ (सीएआईटी) ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान एफएसएसएआई के तहत मैगी के ब्रांड अंबेसडरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। मंत्रियों को लिखे एक पत्र में इसने कहा है कि मैगी ब्रांड अंबेसडरों ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएसआई) की धारा 24 का उल्लंघन किया है और इसलिए उनके खिलाफ भी जांच होनी चाहिए।

एफएसएसएआई ने कहा कि वह ब्रांडेड पास्ता और मैक्रोनी उत्पादों की जांच भी करेगा।

एफएसएसएआई सीईओ यदुवीर सिंह मलिक ने कहा, ‘हम सभी इंस्टेंट नूडल्स ब्रांड की जांच करेंगे। हम केवल एक ब्रांड तक सीमित क्यों रहें? हम अन्य नूडल्स ब्रांड के नमूने ले रहे हैं।’

इंदौर में भाजपा की एक विधायक ने मैगी की बिक्री बढ़ने के लिए नई पीढ़ी की माताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे अब आलसी हो गई हैं और इसलिए अपने बच्चों को दो मिनट वाली नूडल्स खिलाती है।

इंदौर से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने मैगी पर प्रतिबंध को उचित ठहराते हुए कहा, ‘मैं नहीं जानता कि माताएं इतनी आलसी क्यों हो गई (कि वे अपने बच्चों को फौरन तैयार होने वाले नूडल्स खिलाती हैं?) हमारी पीढ़ी की माताएं घर में तैयार होने वाले पराठे, हलवा, सेवई अपने बच्चों को खिलाया करती थी।’

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