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IIT मद्रास विवाद: राहुल गांधी और स्मृति ईरानी में ट्विटर पर जंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलोचक होने की शिकायत के बाद एक छात्र संगठन की मान्यता खत्म करने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आइआइटी-एम) शुक्रवार को एक विवाद में घिर गया...

Author Updated: May 30, 2015 2:14 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आलोचक होने की शिकायत के बाद एक छात्र संगठन की मान्यता खत्म करने पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आइआइटी-एम) शुक्रवार को एक विवाद में घिर गया। इस छात्र संगठन में कई दलित सदस्य हैं। कांग्रेस और आप ने इस कदम का विरोध किया है। उधर, असम दौरे पर गईं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने आइआइटी की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि संस्थान ने साफ-साफ कह दिया था कि छात्र संगठन ने कुछ प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है और उसे पता था कि नियमों का उल्लंघन करने को लेकर डीन इसकी मान्यता खत्म करेंगे।

दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी हमारा अधिकार है। हम असहमति और बहस को कुचलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ लड़ेंगे। राहुल के कार्यालय के ट्वीट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार की आलोचना करने को लेकर आइआइटी छात्र संगठन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आगे क्या होगा?’

PHOTOS: स्मृति ईरानी ने राहुल पर साधा निशाना: नाना कह गये, नानी कह गयीं और राहुल भी वादा कर रहे हैं

इसका जवाब देते हुए ईरानी ने ट्विटर पर अपनी टिप्पणियों में कहा, ‘अगली बार अपनी लड़ाई खुद लड़ें, एनएसयूआइ के पीछे न छिपें। और वैसे भी मैं जल्द अमेठी लौट रही हूं। वहां आपसे मिलूंगी।’ ईरानी ने राहुल को चुनौती देते हुए कहा, ‘मुझे समय और स्थान बताइए। मैं शिक्षा सहित शासन के हर पहलू पर बात करने को तैयार हूं।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘कल आपने एनएसयूआइ से कहा कि जहां कहीं व्यवस्था है वहां अव्यवस्था पैदा करें। आज आपके गुर्गे मेरे घर आए जब मैं काम पर गई हुई थी।’

इस मुद्दे पर दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के आधिकारिक आवास के बाहर सैकड़ों की संख्या में एनएसयूआइ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस छात्र शाखा के प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और छात्र संगठन के खिलाफ हुई कार्रवाई के पीछे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का हाथ होने का आरोप लगाया।

वहीं, प्रतिष्ठित संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेन्नई में बताया कि आंबेडकर…पेरियार स्टडी सर्कल (एपीएसएस) ने आइआइटी-मद्रास के निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है। कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर राममूर्ति ने यहां संवाददाताओं को बताया कि लागू दिशानिर्देश के मुताबिक, छात्र संगठन अपनी गतिविधियों के प्रचार के लिए या आधिकारिक इजाजत के बगैर समर्थन जुटाने के लिए आइआइटी मद्रास या इसकी आधिकारिक संस्थाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि इस संगठन ने अपनी बैठक का आयोजन करते हुए दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है। इसी वजह से संगठन की मान्यता अस्थायी रूप से खत्म की गई है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा कि संस्थान ने अपनी कार्यप्रणाली और निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत कार्रवाई की है। उच्च शिक्षा सचिव एसएन मोहंती ने कहा कि आइआइटी मद्रास एक स्वायत्त संस्थान है और उसने अपने कानून के तहत कार्रवाई की है। मंत्रालय ने शिकायत आगे बढ़ाने और संस्थान से टिप्पणी मांगने के अलावा कुछ नहीं किया था। आइआइटी स्वायत्त संस्थान हैं, वे अपने दिशानिर्देशों और कार्यप्रणाली के तहत मामले का निपटारा करने में सक्षम हैं।

आप ने कहा कि आइआइटी चेन्नई परिसर में आंबेडकर पेरियार स्टूडेंट सर्किल (एपीएससी) को सामान्य तरीके से काम करने देना चाहिए और देश की नीतियों और राजनीति को लेकर छात्रों की चिंताओं को आवाज देने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार को कुचलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। पार्टी ने एक बयान में कहा कि इस संगठन पर इसलिए पाबंदी लगा दी गई क्योंकि यह नरेंद्र मोदी सरकार की त्रुटिपूर्ण और जनविरोधी नीतियों को लेकर स्वतंत्र अभिव्यक्ति और चर्चा को प्रोत्साहित करने में भूमिका निभा रहा है।

वामपंथी दलों ने भी आइआइटी मद्रास के इस कदम की कड़ी आलोचना की और इसके लिए संघ परिवार को जिम्मेदार ठहराया। माकपा और भाकपा ने अलग अलग बयानों में एपीएससी की मान्यता बहाल करने की मांग की और इस तरह का कदम उठाने पर आइआइटी मद्रास के प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री और जद (सेकु) अध्यक्ष एचडी देवगौड़ा ने कहा कि सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है लेकिन प्रधानमंत्री के खिलाफ किसी असंसदीय शब्द का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

उधर, भाजपा ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मामले में ‘निम्न स्तर की राजनीति’ कर रही है और छात्र समुदाय को बांट कर अव्यवस्था पैदा करना चाहती है। भाजपा के सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार और नरेंद्र मोदी सरकार की पिछले एक साल की उपलब्धियों को पचा नहीं पा रही है। इसलिए वह दोयम दर्जे की राजनीति पर उतर आई है। जहां भी व्यवस्था है, वहां अव्यवस्था पैदा करना कांग्रेस का तरीका रहा है। कांग्रेस छात्रों को धर्म और जाति के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही है।

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