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मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की लगाई क्लास, कहा- सवा साल तक क्या कर रहे थे?

चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंतिल राममूर्ति  की खंडपीठ ने सीधे पूछा, अप्रैल में ही सब काम करने की क्या ज़रूरत थी...14 महीने से क्या कर रहे थे?

मद्रास हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर ख़राब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई है। (फोटो – पीटीआई)

मद्रास हाइकोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार की जमकर खबर ली है। कहा है कि हमारे पास एक साल का समय था..साल का ज़्यादातर हिस्सा लॉकडाउन में बीता तो भी आज हमारे सामने हताशा-निराशा खड़ी है।

अदालत ने कोविड के मद्देनज़र अस्पताल, बेड और ऑक्सीजन आदि के प्रबंधन का मामला स्वतःस्फूर्त, सुओ मोटो उठा रखा है। चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंतिल राममूर्ति  की खंडपीठ ने सीधे पूछा, अप्रैल में ही सब काम करने की क्या ज़रूरत थी…14 महीने से क्या कर रहे थे?

एडीशनल सॉलिसिटर जनरल आर शंकरनारायणन कोर्ट को रेमडिसिवर की उपलब्धता के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बोले कि कोरोना का उफान दरअसल अप्रत्याशित था। इस पर खंडपीठ ने कहाः हमें तो अब तक ऐसा एक भी डॉक्टर नहीं मिला जिसने कहा हो कि कोरोना के प्रति असावधान हो जाइए। चीफ जस्टिस ने कहा, हम किसी का असम्मान नहीं कर रहे पर जरा बताइए तो कि केंद्र सरकार इस दौरान किन विशेषज्ञों की सलाह ले रही थी।

हम बस यही सुन रहे हैं कि जून तक हालात बेहतर हो जाएंगे। हम किस्मत का सहारा लेते आए हैं। एड-हॉक काम करने से कुछ नहीं होगा। हमें विशेषज्ञों के मशविरे पर अमल करने की जरूरत है।

अदालत ने वैक्सीन के दामों के बारे में सवाल किए और जानना चाहा कि कोविन पोर्टल क्यों क्रैश हो गया। उल्लेखनीय है दो दिन पहले जब 18 से 45 साल की उम्र के लोग वैक्सीन के लिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा रहे थे तो वह क्रैश हो गया था।

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