मद्रास हाईकोर्ट की सरकार को हिदायत- स्कूल बैग और किताबों पर न छापें सीएम की तस्वीर, कहा-ये पब्लिक के पैसे का दुरुपयोग

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पीडी ऑडिकेसवालु की खंडपीठ ने इस प्रथा पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। अदालत ने इसे “घृणित” और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करार दिया।

court, supreme court
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)।

मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि स्कूल बैग, पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी पर मुख्यमंत्रियों या अन्य सार्वजनिक पदाधिकारियों की तस्वीरें छापे जाने की प्रथा बंद हो। कोर्ट ने ‘ओवेयम रंजन बनाम तमिलनाडु राज्य और अन्य’ मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया।

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पीडी ऑडिकेसवालु की खंडपीठ ने इस प्रथा पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त की। अदालत ने इसे “घृणित” और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करार दिया। कोर्ट ने कहा, “यह घृणित है कि स्कूल जाने वाले बच्चों, जिन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है, के लिए स्कूल की किताबें या स्कूल बैग पर सार्वजनिक पदाधिकारियों की तस्वीरें लगाई जाएं, भले ही पदाधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री ही क्यों न हों। सार्वजनिक धन का दुरुपयोग तस्वीरों को छापने के लिए नहीं किया जा सकता है। न ही किसी भी राजनेता के निजी हित के लिए ऐसा किया जा सकता है। राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की प्रथा को जारी नहीं रखा जाए।”

यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) याचिका में पारित किया गया, जिसमें निर्देश देने की मांग की गई थी कि पाठ्यपुस्तकों, स्कूल बैग और स्टेशनरी पर पिछले मुख्यमंत्रियों के नाम और तस्वीरें छापने के लिए सार्वजनिक धन बर्बाद न हो।

राज्य की ओर से पेश वकील आर शुनमुगसुंदरम ने अदालत को सूचित किया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा में एक बयान जारी किया है कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस तरह की तस्वीरों वाले स्कूल बैग, पाठ्यपुस्तकें और स्टेशनरी का उपयोग तब तक किया जाए जब तक कि वे समाप्त न हो जाएं। इस बयान को दर्ज करने के अलावा, कोर्ट ने वकील के इस बयान को भी रिकॉर्ड में लिया कि वर्तमान मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी सामग्री में प्रकाशन के लिए अपनी तस्वीरों का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है।

अदालत ने आगे कहा, “अब इसके बाद राज्य को निर्देश देने के अलावा कोई और आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए और अत्यधिक सावधानी बरती जानी चाहिए कि होर्डिंग्स और अन्य सामग्री सहित राजनीतिक नेताओं के प्रचार उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक धन खर्च नहीं किया जाए। साथ ही सीएम की तस्वीर भी समाचार पत्रों और कुछ होर्डिंग्स में विज्ञापनों तक ही सीमित होनी चाहिए और निश्चित रूप से पाठ्य पुस्तकों या किसी भी शैक्षिक सामग्री पर इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।” इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी की।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट