ताज़ा खबर
 

हाईकोर्ट जज का अनोखा कदम: जारी किया दो साल का रिपोर्ट कार्ड- ‘निपटाए 21,478 मुकदमे, इनमें 2534 अकेले’

इसी साल अप्रैल में ही जस्टिस स्वामीनाथन ने रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए फैसला सुनाया था कि किन्नरों को भी दुल्हन कहा जा सकता है।

Author चेन्नई | June 30, 2019 9:39 PM
मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जी आर स्वामीनाथन।

मद्रास हारई कोर्ट के जज जस्टिस जी आर स्वामीनाथन ने अनोखा कदम उठाते हुए अपने दो साल के कार्यकाल का लेखा-जोखा पेश किया है। उन्होंने अपने रिपोर्ट कार्ड में दो साल के अंदर निपटाए गए मामलों और केस निपटान की दर का उल्लेख किया है। 27 जून को जारी रिपोर्ट कार्ड में जस्टिस स्वामीनाथन ने लिखा है कि उन्होंने दो साल के अंदर कुल 21 हजार 478 मुकदमों का निपटारा किया है। इनमें से 18 हजार 944 मुकदमे डिवीजन बेंच में एक सदस्य जज के नाते जबकि 2,534 मुकदमे सिंगल बेंच में अकेले निपटाए हैं। उन्होंने यह भी लिखा है कि इस रिपोर्ट कार्ड को जारी करने का उनका मकसद न्यायिक जवाबदेही है।

बार एसोसिएशन को लिखी चिट्ठी में जस्टिस स्वामीनाथन ने लिखा है, “मैंने 28 जून 2017 को पद एवें गोपनीयता की शपथ ली थी। आज उसके दो साल पूरे हो रहे हैं। मैं न्यायिक जवाबदेही में भरोसा रखता हूं, इसलिए अपना प्रदर्शन कार्ड आपके सामने पेश कर रहा हूं। यह सिर्फ उन केसों का विवरण है, जिसे पूरी तरह निपटाया जा चुका है।” जस्टिस स्वामीनाथन ने इसके अलावा केस पेंडेंसी को और अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के अपने इरादे का खुलासा किया है और इसके लिए बार एसोसिएशन से सहायता मांगी है। जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने सभी फैसलों को खुली अदालत में निर्धारित करने के अपने इरादे को भी स्पष्ट किया है।

जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने पत्र में उन वकीलों के प्रति भी संतोष जताते हुए हस्ताक्षर किए हैं जिन्होंने अदालत में उनकी सहायता की है। उन्होंने वकीलों को लिखित सुझाव देने के लिए भी आमंत्रित किया है कि कैसे वह एक न्यायाधीश के रूप में बेहतर सेवा दे सकते हैं। बता दें कि
जून 2017 में हाईकोर्ट में जज नियुक्त होने से पहले जस्टिस स्वामीनाथन मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के लिए भारत के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम कर रहे थे। इसी साल अप्रैल में उन्हें हाईकोर्ट का स्थायी जज बनाया गया है। इसी साल अप्रैल में ही जस्टिस स्वामीनाथन ने रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए फैसला सुनाया था कि किन्नरों को भी दुल्हन कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा था कि सिर्फ एह महिला तक दुल्हन के अर्थ सीमित नहीं हो सकते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App