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TikTok App Ban: हाई कोर्ट ने मोदी सरकार को दिया निर्देश- इस मोबाइल ऐप की डाउनलोडिंग पर लगाएं प्रतिबंध

यह निर्देश दो महीने बाद आया है जब तमिलनाडु के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एम मनिकंदन ने राज्य सरकार केंद्र से इस ऐप को बैन करने की मांग करने की बात विधानसभा में कही थी।

Author Updated: April 4, 2019 12:33 PM
भारत में टिक टॉक के लगभग 104 मिलियन यूजर हैं।

टिक टॉक ऐप को लेकर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक निर्देश जारी किया है। मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने बुधवार को केंद्र सरकार से इस मोबाइल वीडियो ऐप की डाउनलोडिंग पर प्रतिबंध लगाने को कहा है। इस मोबाइल ऐप पर अश्लील और आपत्तिजन कटेंट होने के बाद कोर्ट ने यह निर्देश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने मीडियो को भी टिक टॉक वीडियो के प्रसारण को लेकर भी मनाही लगाई है। यह निर्देश दो महीने बाद आया है जब तमिलनाडु के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री एम मनिकंदन ने राज्य सरकार केंद्र से इस ऐप को बैन करने की मांग करने की बात विधानसभा में कही थी। जस्टिस एन किरूबाकरन और एसएस सुंदर ने एक याचिका की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है। याचिका में कहा गया था कि टिक टॉक पर उपलब्ध सामाग्रियां आपत्तिजनक हैं और भारतीय संस्कृति के लिए खतरा है। कोर्ट का कहना है कि याचिकाकर्ता ने एक खतरनाक मुद्दे को उजागर किया है।

चीन में बना इस ऐप के भारत में लगभग 104 मिलियन यूजर हैं। इंडोनेशिया और बांग्लादेश में यह ऐप बैन है। अमेरिका में चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्रिवेसी प्रोटेक्शन ऐक्ट के जरिए बच्चों को साइबर क्राइम का शिकार होने से बचाया जा रहा है। कोर्ट का कहना है कि भारत में भी ऐसे कानून का जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि भारत में हर रोज साइबर क्राइम बढ़ रहा है और आर्थिक अपराध में भी बढ़ोत्तरी हो रही है।देश की सुरक्षा के लिए यह खतरा है।सुसाइड गेम ब्लू व्हेल का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस गेम की वजह से कई युवाओं की जान गई। पुराने ऐसे मामलों से भी इन मामलों से जुड़े अधिकारियों ने सीख नहीं ली है। लोग ऐसे वीडियो से निर्मम मजाक कर रहे हैं। और यहां तक की टिक टॉक वीडियो को टीवी चैनल्स भी इन वीडियो को दिखा रहे हैं। ऐसे वीडियो पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे ऐप पर बैन लगाकर सरकार को समाज में लोगों के साथ होने वाली अनहोनी से बचाना चाहिए। प्राधिकारियों को पूरी छूट है कि वह कार्रवाई करे । ऐसे मामलो में कोर्ट के निर्देश का इंतजार नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘कि क्या वह ऐसा कोई कानून लाएगी, जैसे अमेरिका में बच्चों को साइबर क्राइम का शिकार बनने से बचाने के लिए वहां की सरकार ने चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्रिवेसी प्रोटेक्शन ऐक्ट बनाया है।

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