मद्रास HC ने दिया स्पाइसजेट को झटका, स्विस कंपनी की पेमेंट न करने की एवज में संपत्ति जब्त करने का आदेश, उधर एयरलाइंस ने किया ये दावा

उधर, स्पाइसजेट ने बीएसई को भेजी सूचना में कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने पिछले आदेश पर उसी दिन रोक लगा दी। अदालत ने कंपनी को दो सप्ताह के भीतर पचास लाख डॉलर के बराबर राशि जमा करने की शर्त पर तीन सप्ताह तक की राहत दी है। स्पाइसजेट ने कहा- कंपनी इस आदेश की समीक्षा कर रही है।

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मद्रास हाईकोर्ट ने स्पाइसजेट एयरलाइन को करारा झटका दिया है। अदालत ने स्विट्जरलैंड की एक कंपनी क्रेडिट सुइस एजी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट के लिक्विडेटर को स्पाइसजेट की संपत्ति पर कब्जा लेने का भी आदेश दिया है। एयरलाइन ने एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस के लिए स्विस कंपनी को 2.4 करोड़ डॉलर (करीब 181 करोड़ रुपये) का भुगतान नहीं किया। क्रेडिट सुइस ने कंपनी कानून, 1956 के प्रावधानों के तहत लिक्विडेटर नियुक्त करने की अपील की थी।

जस्टिस आर सुब्रमण्यम ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि स्पाइसजेट मतुसूदन गोवर्धनदास एंड कंपनी बनाम मधु वूलन इंडस्ट्रीज (पी) लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के सुझाए गए तीन परीक्षणों के मामले में पूरी तरह विफल रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार स्पाइसजेट ने विमान के इंजनों के रखरखाव, मरम्मत तथा संचालन के लिए अनिवार्य चीजों के लिए स्विट्जरलैंड की एसआर टेक्निक्स कंपनी से सेवाएं ली थीं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस कंपनी की याचिका को स्वीकार किया जाना चाहिए और प्रतिवादी कंपनी को बंद करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि आधिकारिक लिक्वडेटर को प्रतिवादी कंपनी स्पाइसजेट की संपत्ति का अधिग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अगर स्पाइसजेट उक्त नोटिस के तहत मांगे गए कर्ज का भुगतान तीन हफ्ते के भीतर नहीं कर पाती है, तो ऐसा माना जाएगा कि कंपनी भुगतान करने में असमर्थ है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, स्पाइसजेट ने नवंबर 2011 को 10 साल के पीरियड के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहालिंग के लिए एसआर टेक्निक्स के साथ एक समझौता किया था। दोनों पक्षों ने अगस्त 2012 में समझौते की कुछ शर्तों को बदलने के लिए एक सप्लीमेंटल समझौता किया, जिसमें एसआर टेक्निक्स की तरफ से उठाए गए कई इनवॉइस के तहत पेमेंट के लिए टाइम बढ़ाने और एक डेफर्ड पेमेंट स्कीम भी शामिल थी।

उधर, PTI की खबर के मुताबिक स्पाइसजेट ने बीएसई को भेजी सूचना में कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने अपने पिछले आदेश पर उसी दिन रोक लगा दी। अदालत ने कंपनी को दो सप्ताह के भीतर पचास लाख डॉलर के बराबर राशि जमा करने की शर्त पर तीन सप्ताह तक की राहत दी है। स्पाइसजेट ने कहा- कंपनी इस आदेश की समीक्षा कर रही है।

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