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एमपीः कोरोना मरीज को लगाया बगैर नली का ऑक्सीजन मास्क, पति की मौत के सदमे में पत्नी ने भी तोड़ा दम

मध्यप्रदेश के रतलाम में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से एक बुजुर्ग को अपने जान से हाथ धोना पड़ गया। इतना ही नहीं पति की मौत की खबर मिलते ही वृद्ध महिला की भी मौत हो गई।

corona, covid, madhyapradeshरतलाम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बुजुर्ग को ऑक्सीजन मास्क तो लगा दिया लेकिन उसे सिलिंडर से नहीं जोड़ा। जिसकी वजह से बुजुर्ग की मौत हो गई। (फोटो – पीटीआई)

कोरोना की दूसरी लहर ने देशभर की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के पोल खोल दिए हैं। कहीं कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल में बेड ना मिलने की वजह से मर रहे हैं तो कहीं मरीज के परिजनों को ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश के रतलाम में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से एक बुजुर्ग को अपने जान से हाथ धोना पड़ गया। इतना ही नहीं पति की मौत की खबर मिलते ही वृद्ध महिला की भी मौत हो गई।

दरअसल रतलाम मेडिकल कॉलेज में बीते 12 अप्रैल को राजकुमार दीक्षित और उनकी पत्नी को भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक शुरुआत में बुजुर्ग दंपति की तबीयत ज्यादा ख़राब नहीं थी। लेकिन बाद में जब बुजुर्ग की तबीयत ज्यादा ख़राब हो गई तो अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑक्सीजन मास्क तो लगा दिया लेकिन उसे सिलिंडर से नहीं जोड़ा। जिसकी वजह से बुजुर्ग की मौत हो गई। अपने पति को तड़पता देख बुजुर्ग महिला ने जैसे तैसे इसकी सूचना अपनी बेटी को दी। लेकिन बेटी के पहुंचने से पहले ही पिता की मौत हो गई। बाद में जैसे ही इसकी जानकारी बुजुर्ग महिला को मिली तो कुछ देर बाद उनकी भी मृत्यु हो गई।

बुजुर्ग दंपति के परिजनों के अनुसार जिस वार्ड में उन दोनों को भर्ती किया गया था। वहां कोई भी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। इतना ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बुजुर्ग दंपति का कोरोना टेस्ट भी नहीं करवाया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बुजुर्ग दंपति को कोई वाशरूम भी नहीं ले जाता था। वाशरूम ले जाने पर भी दस रूपये मांगे जाते थे।

हालांकि इस पूरे मामले पर रतलाम के कोरोना प्रभारी मंत्री ने कहा कि अस्पताल में व्यवस्थाओं की ओर से कमी है। मुख्यमंत्री और सरकार की ओर से सभी संसाधन मुहैया कराए गए हैं। इसके बावजूद भी कुछ कमियां दिखी है। जिनको दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

मध्यप्रदेश में रविवार को 12,248 मरीज सामने आए। राजधानी भोपाल में 1,679 नए मरीज मिले। वहीं 66 लोगों की मौत इस महामारी की वजह से हो गई। मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल में कोरोना संक्रमण की स्थिति काफी बदतर हैं। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमित लाशों को जलाने के लिए भी करीब 6-8 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।

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