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BJP नेताओं ने पूर्व CM बाबू लाल गौर को जिंदा रहते ही दे दी श्रद्धांजलि, दो मिनट का रखा मौन

पूर्व सीएम गौर उस दौरान मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित नर्मदा अस्पताल में भर्ती थे। शाम को उनका हाल जानने सीएम कमलनाथ भी हॉस्पिटल पहुंचे, जहां उन्होंने डॉक्टरों से पूर्व मुख्यमंत्री की तबीतय के बारे में जानकारी ली।

Babulal Gaur, BJP, Former CM, BJP, Tribute, Narmada Hospital, Bhopal, MP, Madhya Pradesh, CM, Kamal Nath, Congress, India News, National News, Hindi News, Jansatta Newsमध्य प्रदेश के भोपाल स्थित अस्पताल में भर्ती पूर्व सीएम बाबूलाल के वॉर्ड में मुख्यमंत्री कमलनाथ। (फोटोः ANI/फाइल)

अस्पताल में भर्ती पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल गौर को गुरुवार को कुछ बीजेपी नेताओं ने जीवित रहते ही श्रद्धांजलि दे दी। यही नहीं, इन नेताओं ने गौर के लिए दो मिनट का मौन भी रखा, जबकि वह उस दौरान मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित नर्मदा अस्पताल में भर्ती थे। शाम को उनका हाल जानने सीएम कमलनाथ भी हॉस्पिटल पहुंचे, जहां उन्होंने डॉक्टरों से पूर्व मुख्यमंत्री की तबीतय के बारे में जानकारी ली। बता दें कि गौर इस अस्पताल में सात अगस्त से भर्ती हैं।

हुआ यूं कि बुधवार को नीमच में एक दिन पहले नगर परिषद की बैठक हुई थी। बीजेपी मंडलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश लालवानी ने उसी दौरान बाबूलाल गौर को श्रद्धांजलि दे डाली, जिसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया। यह होते ही नगर परिषद की बैठक स्थगित कर दी गई। हालांकि, बाद में कुछ पार्षदों ने गौर के निधन की पुष्टि करने के बारे में पूछताछ की तो उन्हें पता लगा था कि वह तो जीवित हैं और उनकी तबीयत फिलहाल स्थिर है।

वैसे, इससे पहले भी गौर का स्वास्थ्य खराब हो चुका है। सूत्रों के हवाले से स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया- गौर अभी वेंटिलेटर पर हैं। लगभग डेढ़ माह से उनका स्वास्थ्य कुछ दुरुस्त नहीं है। 89 वर्षीय पूर्व सीएम को बीपी कम होने की शिकायत के बाद नर्मदा अस्पताल लाया गया था। इससे पहले, भोपाल से बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा भी गौर की तबीयत का हाल जानने अस्पताल पहुंची थीं।

कौन हैं बाबूलाल गौर?: दो जून, 1930 को नौगीर, प्रतापगढ़, यूनाइटेड प्रॉविंस (ब्रिटिशकालीन भारत तब) में जन्मे गौर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। साल 1946 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे। वह इसके अलावा भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक सदस्य भी हैं और दिल्ली व पंजाब समेत कई राज्यों में हुए सत्याग्रहों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। इमरजेंसी के दौरान वह जेल भी गए थे और शिवराज सिंह चौहान की तत्कालीन सरकार में वह कबीना मंत्री भी रहे हैं।

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