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कमलनाथ सरकार का संत सम्मेलन: लगे ‘जय श्री राम’ के नारे, सीएम ने साधुओं के लिए किए कई लुभाने वाले ऐलान

सीएम ने पूर्व की भाजपा सरकार पर धर्म के नाम पर वित्तीय अनियमित्ता करने का आरोप लगाया। कमलनाथ ने कहा कि 'उनकी सरकार नर्मदा नदी के किनारे हुए पौधारोपण, सिंहस्थ कुंभ के दौरान हुई वित्तीय अनियमित्ता की जांच कराएगी।'

Author भोपाल | Published on: September 18, 2019 8:18 AM
संत सम्मेलन के दौरान सीएम कमलनाथ। (पीटीआई फोटो)

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने मंगलवार को एक संत सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में खुद सीएम कमलनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह शामिल हुए। इस सम्मेलन के दौरान ‘जय श्री राम’, ‘जय बजरंग बली’ और ‘गौमाता की जय हो’ जैसे नारे खूब लगे। सम्मेलन के दौरान संतों ने पूर्व की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा और संत समाज के लिए कुछ ना करने का आरोप लगाया।

बता दें कि इस संत सम्मेलन का आयोजन कमलनाथ सरकार के अध्यात्मिक विभाग द्वारा भोपाल के मिंटो हॉल में किया गया। मिंटो हॉल एक प्राचीन इमारत है, जो कि पूर्व में मध्य प्रदेश की विधानसभा हुआ करती थी। फिलहाल इसे एक कन्वेंशन सेंटर में तब्दील कर दिया गया है। संत सम्मेलन के दौरान सीएम कमलनाथ ने भाजपा का नाम ना लेते हुए कहा कि ‘कुछ लोगों को इससे ‘पेट में दर्द’ हो रहा होगा और कुछ लोग समझते हैं कि धर्म उनकी जागीर है।’

सीएम ने पूर्व की भाजपा सरकार पर धर्म के नाम पर वित्तीय अनियमित्ता करने का आरोप लगाया। कमलनाथ ने कहा कि ‘उनकी सरकार नर्मदा नदी के किनारे हुए पौधारोपण, सिंहस्थ कुंभ के दौरान हुई वित्तीय अनियमित्ता की जांच कराएगी।’

संत सम्मेलन में नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा भी शामिल हुए और सम्मेलन के दौरान सीएम कमलनाथ के बराबर वाली कुर्सी पर बैठे। गौरतलब है कि कंप्यूटर बाबा पूर्व की शिवराज सिंह चौहान सरकार में राज्य मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने पाला बदल लिया और अब राज्य सरकार में नर्मदा, शिप्रा और मंदाकिनी नदी ट्रस्ट के प्रमुख पद पर बैठे हैं।

संत सम्मेलन के दौरान कंप्यूटर बाबा ने सरकार के सामने कुछ मांगें रखीं, जिनमें धार्मिक संगठनों के आश्रम, कुटिया, जो कि पांच साल से ज्यादा समय से बने हुए हैं, उन्हें नियमित किया जाए। इसके साथ ही संतों को पेंशन और स्वास्थ्य बीमा आदि की सुविधा भी मिले। सीएम कमलनाथ ने भी संतों की इस मांग को पूरा करने की अपनी सहमति दे दी और कहा कि संतों को आश्रम, मंदिर, गौशाला और कुटिया के लिए सरकारी जमीन पर स्थायी पट्टा दिया जाएगा।

सीएम कमलनाथ ने ये भी कहा कि इस तरह के संत सम्मेलन समय-समय पर होते रहने चाहिए और अगले सम्मेलन से पहले सरकार की कोशिश होगी कि संतों की मांगों को पूरा कर दिया जाए। मठ मंदिर सलाहकार समिति के चेयरमैन स्वामी सुबोधानंद महाराज ने भाजपा सरकार पर संत समाज को धोखा देने का आरोप लगाया। भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का नाम ना लिए बगैर उन्होंने कहा कि भाजपा ने ऐसे लोगों को संसद भवन भेजा है, जो कि बम विस्फोट के आरोपी हैं।

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