मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में सत्ता को लेकर चल रहे संघर्ष की आहट सुनाई दी है। हुआ यह है कि सरकार में सीनियर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, पत्र में दावा किया गया है कि विजयवर्गीय ने अपने गृह क्षेत्र इंदौर की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। हालांकि विजयवर्गीय ने कहा है कि उन्हें इस पत्र के बारे में कुछ नहीं पता।
कैलाश विजयवर्गीय की दिली ख्वाहिश मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने की रही है। दिसंबर, 2023 में जब राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनी थी, उससे पहले भी उन्होंने अपनी इस ख्वाहिश को उजागर किया था।
मोहन यादव सरकार में शहरी विकास, आवास और संसदीय कार्य जैसे भारी-भरकम मामलों के मंत्री विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि उनके विभागों में उनकी जानकारी के बिना ही अफसरों का ट्रांसफर कर दिया जाता है। खबरों के मुताबिक, उन्होंने पत्र में चेतावनी दी है कि अगर इंदौर के विकास से संबंधित मामलों का जल्द हल नहीं किया गया तो वह जनता के बीच में जाएंगे।
पत्र में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “मुख्यमंत्री होने और इंदौर के प्रभारी मंत्री के रूप में मुझे आपसे सहयोग की अपेक्षा थी लेकिन पिछले ढाई साल में मुझे केवल असहयोग, अपेक्षा और विरोध ही देखने को मिला है। इंदौर के विकास में रफ्तार लाने के बजाय इस शहर को इसके जरूरी हक भी नहीं मिल रहे हैं।”
विजयवर्गीय ने पांच बड़े मुद्दे उठाए
खबरों के मुताबिक, विजयवर्गीय ने इंदौर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पांच बड़े मुद्दे उठाए हैं। इनमें इंदौर के लिए अगला मास्टर प्लान जारी करने में देरी, उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ मेले से जुड़ी परियोजनाओं से इंदौर को बाहर रखना आदि शामिल है।
विजयवर्गीय ने इंदौर के आसपास एक महानगरीय इलाका विकसित करने वाली योजनाओं में उज्जैन को शामिल करने और इसे इंदौर-उज्जैन महानगर क्षेत्र नाम देने पर भी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे इस पत्र के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि आपको इस पत्र के बारे में कहां से पता चला। आपको अखबार वालों से पूछना चाहिए कि यह कहां से आया और यह सच है या झूठ।”
इसे लेकर विजयवर्गीय ने दैनिक भास्कर से कहा कि मुझे नहीं पता कि यह पत्र आप तक कैसे पहुंचा।
गुरु गुड़ रह गए, चेले शक्कर बन गए- कांग्रेस
कांग्रेस ने इस पत्र को सरकार के भीतर चल रही आपसी कलह से जोड़ा है। कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा, “गुरु गुड़ रह गए, चेले शक्कर बन गए! मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आखिरकार मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंदौर में विकास की उपेक्षा का ज़िक्र करना ही पड़ा!”
कांग्रेस ने कहा है कि सत्ता और प्रभुत्व की इस लड़ाई में मरण जनता का हो रहा है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि सत्ता में ताकत की लड़ाई का खामियाजा आखिरकार जनता क्यों भुगते!
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के पत्र को बीजेपी सरकार की विफलता और अंदरूनी कलह बताया और कहा कि मुख्यमंत्री को पत्र में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का सामने आकर जवाब देना चाहिए।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने विजयवर्गीय के पत्र को लेकर भाजपा में गुटबाजी का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान का दुष्परिणाम सूबे की जनता भुगत रही है।
दिसंबर, 2023 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कैलाश विजयवर्गीय भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में थे। विजयवर्गीय और इंदौर के कई भाजपा नेताओं ने भाषणों में अक्सर आरोप लगाया है कि शहर के सरकारी अफसर उनकी बात नहीं सुनते। 2025 में कैलाश विजयवर्गीय उन मंत्रियों में शामिल थे जिन्होंने लगातार कैबिनेट की कई बैठकों में भाग नहीं लिया था।
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के द्वारा जमीनों की खरीद के मामले में बीजेपी का रिएक्शन आया है। बीजेपी की आईटी सेल के संयोजक अमित मालवीय, मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मध्य प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने इन सभी आरोपों खारिज कर दिया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
