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मध्यप्रदेश में गायों के लिए हाईटेक ‘स्वयंवर’, गायों के मालिकों को मिलेगा विकल्प, पशुपालन विभाग तैयार कर रहा 200 सांडों का डेटाबेस

बैलों का यह डाटाबेस विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें बैलों संबंधी हर जानकारी को शामिल किया गया है। इस डाटाबेस का मकसद मवेशियों की नस्ल को बेहतर बनाना है।

मध्य प्रदेश सरकार ने बनाया बैलों का डाटाबेस।

मध्य प्रदेश सरकार गायों का ‘स्वयंवर’ कराने की तैयारी में है। दरअसल मध्य प्रदेश में गायों के मालिक अब गायों के रिप्रोडक्शन के लिए बेहतर नस्ल के कई सांडों में से अपनी पसंद का सांड चुन सकते हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश के एनीमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट ने बेहतर नस्ल के सांडों का एक डाटाबेस तैयार किया है, जिसे Sire Directory नाम दिया गया है।

इस डायरेक्ट्री में 200 सांडों का डाटाबेस रखा गया है, जिसमें सांडों की फैमिली हिस्ट्री, बीमारी, जिस गाय से सांड का जन्म हुआ है, उसकी दूध देने की क्षमता आदि जानकारी शामिल है। इनसेमिनेशन की प्रक्रिया के लिए मध्य प्रदेश में पायी जाने वाली सांडों की सभी 16 नस्लें उपलब्ध करायी जाएंगी। इन बैलों के सीमन सैंपल भोपाल के सेंट्रल सीमन स्टेशन में रखे गए हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, सांडों का यह डाटाबेस विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें सांडों संबंधी हर जानकारी को शामिल किया गया है। इस डाटाबेस का मकसद मवेशियों की नस्ल को बेहतर बनाना है। इतना ही नहीं हर माह इस डाटाबेस को अपडेट किया जाएगा।

इस डाटाबेस में गिर, साहीवाल, थरपारकर, मुर्रा, माल्वी और निमारी नस्लों के सांडों को सीमन स्टेशन लाया गया है। एमपी के एनीमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव के अनुसार, एमपी स्टेट लाइवस्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलेपमेंट कॉपरेशन ने यह डायरेक्ट्री प्रकाशित की है। अभी भोपाल के सेंट्रल सीमन स्टेशन में सालाना 28 लाख फ्रोजन सीमन सैंपल रखे जाते हैं, जिसे बढ़ाकर 40 लाख सालाना करने की योजना है।

विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि डेयरी उद्योग को और फायदेमंद बनाने, दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए यह डाटाबेस काफी मददगार साबित होगा। गौरतलब है कि भोपाल सेंट्रल सीमन स्टेशन में जल्द ही बछड़ों के लिंग की जांच भी शुरू करने वाला है। इससे मवेशियों में गायों की संख्या बढ़ायी जा सकेगी और सांडों की संख्या को सीमित किया जाएगा।

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