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मध्य प्रदेश: अपने पिता के ‘अपमान’ का बदला लेने नौकरी छोड़ आए थे राजनीति में, मंत्रीपद नहीं मिला तो हो गए ‘बागी’

बेंगलुरु से एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दत्तीगांव ने कहा है कि "जो लोग अन्याय को सहते हैं, वो अन्याय करने वालों से ज्यादा दोषी होते हैं।"

Author Translated By नितिन गौतम भोपाल | Updated: March 14, 2020 1:31 PM
rajyavardhan singhराज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव पिता के अपमान का बदला लेने के लिए राजनीति में आए थे।

मध्य प्रदेश में 22 विधायकों के बागी होने के चलते कमलनाथ सरकार संकट में है। इन्हीं बागी विधायकों में से एक हैं राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव। 48 वर्षीय राज्यवर्धन सिंह मध्य प्रदेश के धार इलाके की बदनावार विधानसभा सीट से विधायक हैं। राज्यवर्धन सिंह मार्केटिंग मैनेजर रह चुके हैं। लेकिन अपने पिता के अपमान का बदला लेने के लिए वह राजनीति में उतरे थे और फिर खुद को पूरी तरह से राजनीति के होकर रह गए।

राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव को ज्योतिरादित्य सिंधिया का करीबी माना जाता है। उनके पिता प्रेम सिंह भी माधवराव सिंधिया के करीबी रहे थे। राज्यवर्धन सिंह साल 1990 में लुफ्तांसा में मार्केटिंग मैनेजर थे। उनका कहना है कि साल 1998 में उनके पिता को कांग्रेस पार्टी ने टिकट देने से मना कर दिया था। जिसके बाद उनके ‘अपमान’ का बदला लेने के लिए राज्यवर्धन ने नौकरी छोड़ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था।

साल 2018 में राज्यवर्धन तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। उन्हें इस बार कांग्रेस सरकार में मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मंत्री पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की गई। वहीं राज्यवर्धन सिंह के विरोधी माने जाने वाले उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह, जो कि उम्र में राज्यवर्धन से छोटे हैं, उन्हें मंत्री पद दे दिया गया।

बेंगलुरु से एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दत्तीगांव ने कहा है कि “जो लोग अन्याय को सहते हैं, वो अन्याय करने वालों से ज्यादा दोषी होते हैं।” राज्यवर्धन सिंह ने 2018 के चुनाव में 51,506 वोटों से जीत दर्ज की थी।

बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं। जिसके बाद ग्वालियर क्षेत्र के आसपास के कई विधायकों ने भी कमलनाथ सरकार से बगावत करते हुए अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। अब तक कुल 22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जिससे कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है।

राज्यवर्धन सिंह के अलावा जिन अन्य विधायकों ने अपना इस्तीफा दिया है, उनमें हरदीप डंग, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना, रणवीर जाटव, कमलेश जाटव, रघुराज कंसाना, मुन्नालाल गोयल, ओपीएस भदौरिया, गिरिराज ढंडोतिया, बृजेन्द्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, जयपाल सिंह, मनोज चौधरी, जसमंत जाटव, रक्षा संतराम सारुनिया का नाम शामिल है।

वहीं जिन मंत्रियों ने अपना इस्तीफा दिया है, उनमें महेंद्र सिंह सिसोदिया, जो कि कमलनाथ सरकार में श्रम मंत्री और तुलसीराम सिलावट (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री) गोविंद राजपूत (परिवहन मंत्री), इमरती देवी (महिला एवं बाल विकास मंत्री) डॉ. प्रभुराम चौधरी (स्कूल शिक्षा मंत्री), प्रद्युमन सिंह तोमर (फूड एंड सिविल सप्लाई मंत्री) शामिल हैं।

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