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जज साहब के बंगले में घुसा आया बकरा! हवालात में बितानी पड़ी पूरी रात

बकरा दीपक वाल्मिकी नाम के शख्स है। वह जल निगम कॉलोनी में रहते हैं। शनिवार शाम बकरा किसी तरह वहां से भाग निकला था, जिसके बाद उसे जज के बंगले के अंदर देखा गया था। बाद में उसी को लेकर शिकायत की गई थी।

Author नई दिल्ली | Updated: September 9, 2019 11:02 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी अपराधी को छूट नहीं मिलती है। फिर चाहे ही वह बकरा ही क्यों न हो। हाल ही में ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें एक जज साहब के बंगले में बकरा घुस आया, जिसके बाद उसे हवालात में पूरी रात काटनी पड़ी। यह वाकया मध्य प्रदेश के मुरेना का है। हुआ यूं कि शनिवार (सात सितंबर, 2019) रात एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट जज एंड सेशन्स जज के बंगले के परिसर के भीतर किसी तरह एक बकरा घुस गया था। पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट्स में बताया गया कि बकरे को वहां घुसने के थोड़ी देर बाद पकड़ लिया गया था। पुलिस वाले उसके बाद उसे कोतवाली पुलिस थाना ले गए, जहां उसकी रात बीती।

हालांकि, कोतवाली पुलिस थाना के एसएचओ शिव सिंह यादव ने बताया कि बकरा वहां सड़क के पास टहलता पाया गया था। कोई उसे मीट के चलते मार न दे या नुकसान न पहुंचाए, यही सोचकर हम उसे पुलिस थाने ले आए थे। अगली सुबह हमने बकरे को उसके मालिक के हवाले कर दिया था।

जानकारी के मुताबिक, बकरा दीपक वाल्मिकी नाम के शख्स है। वह मुरेना की जल निगम कॉलोनी में रहते हैं। शनिवार शाम बकरा किसी तरह वहां से भाग निकला था, जिसके बाद उसे जज के बंगले के अंदर देखा गया था। बाद में उसी को लेकर शिकायत की गई थी।

वाल्मिकी ने शनिवार को पूरा दिन बकरा तलाशा, पर वह उसे न मिला। बाद में मदद के लिए वह कोतवाली पुलिस थाने पहुंचे, जहां उन्होंने रविवार सुबह शिकायत दी, पर जैसे ही वह वहां पहुंचे वह अपना बकरा देखकर हैरत में रह गए। पूछताछ के बाद वाल्मिकी को बकरा दे दिया गया।

बकरे के मालिक ने आगे मीडिया को बताया, “मैं बकरा मिलने को लेकर उम्मीदें छोड़ चुका था। मुझे लग रहा था कि किसी ने इसकी हत्या कर दी होगी, लिहाजा मैं पुलिस के पास पहुंचा था। हालांकि, बकरे को कोतवाली में देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया। यह सुनिश्चित करने के बाद कि वह मेरा ही है, पुलिस ने उसे मुझे ले जाने दिया। साथ ही हिदायत भी दी कि भविष्य में मैं उसे कहीं यूं ही जाने या घूमने के लिए न छोड़ूं।”

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