शिवराज सिंह चौहान सरकार का फैसला, सिर्फ स्थानीय लोगों को देंगे नौकरी, मौलिक अधिकारों पर बहस तेज

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में सरकारी नौकरियों को राज्य के लोगों के लिए आरक्षित करने की बात कही, हालांकि जन्मस्थान के आधार पर नागरिकों से नौकरी में भेदभाव संविधान का उल्लंघन है।

coronavirus, mp chief minister, covid-19
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। (PTI)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में यह कह कर सियासी हलचल बढ़ा दी है कि उनकी सरकार सिर्फ राज्य के बच्चों के लिए ही सरकारी नौकरी रखेगी। उनके इस बयान के बाद देशभर में मौलिक अधिकारों पर बहस शुरू हो सकती है। खासकर समानता के अधिकार पर। जहां संविधान में साफ है कि किसी भी नागरिक से उसके जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने डोमिसाइल रिजर्वेशन को शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक करार दिया है। हालांकि, सरकारी नौकरियों में क्षेत्रवाद के आधार पर आरक्षण को लेकर कोर्ट भी सख्त रही हैं।

दरअसल, अदालतों का भी मानना है कि इस तरह सरकारी नौकरियों में क्षेत्र के आधार पर आरक्षण से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा। संविधान के अनुच्छेद 16(2) के मुताबिक, “राज्य के अधीन किसी भी पद के संबंध में धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान, निवास या इसमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अपात्र होगा और न उससे भेदभाव किया जाएगा।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी तक अपने इस ऐलान का कोई ब्योरा नहीं दिया है, हालांकि महज जन्मस्थान के आधार पर आरक्षण को संवैधानिक मान्यता नहीं मिल सकती। पिछले साल ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन कमीशन (UPSSSC) के भर्ती नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था। दरअसल, इसमें राज्य की निवासी महिलाओं को तरजीह देने का नियम रखा गया था।

इसके अलावा 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में सरकारी टीचरों की नियुक्ति को अवैध करार दे दिया था। यहां स्टेट सेलेक्शन बोर्ड ने एक खास जिले और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों को भर्ती में खास तरजीह दी थी।

बता दें कि कुछ राज्य पहले ही स्थानीय नागरिकों के लिए नौकरियां आरक्षित करने पर विचार कर रहे हैं। कुछ ने तो भाषा को राज्य में रहने का आधार बनाया है। इनमें महाराष्ट्र भी शामिल है, जहां 15 साल से ज्यादा रह चुके और मराठी में पारंगत लोग ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियां सिर्फ वहां रहने वालों के लिए ही रिजर्व हैं। उत्तराखंड में भी कुछ पोस्ट्स के लिए स्थानीय लोगों की ही भर्ती का नियम है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में कुछ पोस्ट्स पर नियुक्ति के लिए बंगाली लिखना-पढ़ना आना जरूरी है।

अपडेट