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बातचीत: भविष्य की राह में क्रांतिकारी हैं कृषि कानून

नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी जिंदगी में जनता का कल्याण और देश को विकास की राह पर ले जाने के सिवा और कोई मकसद ही नहीं है। मोदी जी और मैं साथ में मुख्यमंत्री रहे। पहले मैं मोदी जी का आदर करता था आज मैं उन पर श्रद्धा रखता हूं। -शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नए कृषि कानूनों पर जनसत्ता से खुलकर बातचीत की।

देश की खेती किसानी में क्रांतिकारी सुधारों का दावा करने वाले तीन कृषि विधेयक अब कानून का रूप ले चुके हैं। इस कानून के विरोध में विपक्ष मुखर होकर केंद्र सरकार पर किसानों का भविष्य निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगा रहा है। खास कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी अधिकार बनाने, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और वर्तमान मंडी व्यवस्था को सुचारू रखने की मांग को लेकर केंद्र सरकार चौतरफा दबाव में है। केंद्र सरकार पर लगे आरोपों और शंकाओं के बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मृणाल वल्लरी की बातचीत के अंश।

कृषि पर कानून को लेकर विपक्ष हमलावर है। केंद्र सरकार के लिए यह मुश्किल समय दिख रहा है। एक मुख्यमंत्री के तौर पर अन्य राज्यों के अपने समकक्षों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
-मैं सबसे अपील करता हूं कि इस कानून को समझें। यह किसान विरोधी नहीं है। यह किसानों को प्रतिस्पर्धी भाव दे रहा है। इससे किसानों को ठीक दाम और विकल्प मिलेंगे। कृषि के क्षेत्र में निवेश भी होगा। इसका विरोध न करें। खेती और किसानी के हित को समझें।

आपकी भाषा में समझना चाहूं तो इस कानून को लेकर विरोध महज समझ का फेर है?
-मैं तो यही कह सकता हूं कि या तो कोई समझ कर भी नासमझ बनने की कोशिश कर रहा है या समझ का फेर है।

लेकिन इस कानून को लेकर विरोध अखिल भारतीय स्वरूप ले रहा है। विरोध के इस व्यापक प्रसार को आप कैसे देखते हैं?
-विपक्षी दलों का अनावश्यक विरोध का कारण उनकी किसान विरोधी मानसिकता है। 2004 से लेकर 2014 तक केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार रही और 2006 के दौरान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट आई थी। आयोग ने फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुणा करने की सिफारिश की थी। लेकिन 2014 तक उसे लागू नहीं किया गया। अब जब मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा करते हुए किसानों को अपनी फसल बेचने की आजादी दी है तो कांग्रेस विरोध पर उतर आई है। मुद्दों के अभाव में आम आदमी के बीच यह अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने की नाकाम कोशिश भर है। देश के बड़े हिस्से में कोई विरोध नहीं है।

तो नए कृषि कानून को लेकर आपका क्या तर्क है?
-नया कृषि कानून सौ फीसद किसानों के हित में है। मैं आम आदमी और किसान भाइयों से एक बार फिर कह रहा हूं कि प्रदेश में मंडियां चालू रहेंगी। इसके बाद भी अगर किसान मंडी के अलावा कहीं और से अपनी फसल की ऊंची कीमत मिलने के लिए स्वतंत्र होते हैं तो क्या दिक्कत है? उनकी फसल का दाम घर या खेतों पर मिल जाए तो क्या दिक्कत है? उन्हें परिवहन की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी। किसानों का इसमें सिर्फ फायदा है। वे ई-कारोबार से भी जुड़ सकते हैं। किसी तरह का कर न लगने पर किसान को ज्यादा मूल्य और उपभोक्ता को कम कीमत पर वस्तुएं मिल सकेंगी। नए प्रावधानों में भंडारण की क्षमता में भी इजाफा किया जाएगा। किसानों का सीधा संवाद खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, निर्यातकों, संगठित रिटेलरों से होगा। सबसे बड़ी राहत कि बिचौलियों से आजादी मिलेगी।

क्या मध्यप्रदेश में किसानों की ओर से कोई प्रतिरोध नहीं है?
-यहां हम किसानों को सच समझाने में कामयाब रहे हैं। मैंने आकाशवाणी पर किसानों के सवालों के जवाब दिए। फेसबुक सहित संवाद के हर मंच पर किसानों की शंका दूर की। यहां किसान समझ चुके हैं कि यह कानून उनके हित में है। मध्यप्रदेश में 2003 से 2018 तक भाजपा की सरकार रही और हमने किसानों को मजबूत बनाने के कई फैसले किए। शून्य फीसद ब्याज दर पर किसानों को कर्ज मिला। खेती को लाभ का धंधा बनाने में हम आगे रहे हैं और किसान वर्ग पूरी तरह से हमारे साथ है।

एक आम जिज्ञासा यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को नए कानून का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया?
-न्यूनतम समर्थन मूल्य हर हाल में रहेगा। हमने इसकी दरों का एलान कर दिया है। भाजपा के द्वारा इसे खत्म करने का सवाल ही नहीं पैदा होता है।

अगर सब कुछ इतना अच्छा है तो राजग के सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल को क्यों अलग होना पड़ा?
-मैं सिर्फ मध्यप्रदेश की बात करूंगा। पंजाब के हालात पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। यह जरूर कहूंगा कि किसानों को भ्रमित किया जा रहा है।

आरोप है कि किसानों का भविष्य निजी हाथों को सौंपा जा रहा है। निजी कंपनियां खेती-किसानी के साथ मनमानी करेंगी और किसानों की कमर टूट जाएगी?
-किसानों का हित सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी बनी रहेगी। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलता है और मिलता रहेगा। मंडी व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। एक देश एक बाजार की व्यवस्था में किसान किसी बड़ी कंपनी का साझेदार बन मुनाफा कमा सकता है। करार के तहत किसानों को तय दाम पाने की गारंटी रहेगी। किसान बिना किसी जुर्माने के किसी भी वक्त करार से निकलने के लिए आजाद रहेगा। किसान की जमीन बिक्री, लीज और गिरवी रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। आज के समय में कई राज्यों के किसान बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर गन्ने, कपास, चाय और कॉफी का उत्पादन कर रहे हैं। इस कानून के बाद छोटे किसानों को तकनीक और अन्य उपकरणों का तयशुदा फायदा मिलेगा। व्यापारी मनमानी करेंगे तो सरकार उचित कदम उठाएगी।

आरोप है कि संसद में बिल को पास करवाने के लिए मनमानी की गई। राज्यसभा में मतविभाजन की मांग को दरकिनार किया गया। इससे केंद्र सरकार के साथ प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा।
-नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी जिंदगी में जनता का कल्याण और देश को विकास की राह पर ले जाने के सिवा और कोई मकसद ही नहीं है। मोदी जी और मैं साथ में मुख्यमंत्री रहे। पहले मैं मोदी जी का आदर करता था आज मैं उन पर श्रद्धा रखता हूं। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि देश के प्रधानमंत्री से बड़ा किसान हितैषी कोई आज तक हुआ ही नहीं है। न भूतो, न भविष्यति। वे दूरदृष्टि के साथ काम करने वाले व्यक्ति हैं जो दूर तक के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की राह बना रहे हैं। सिर्फ जनता के लिए काम करने वाले मोदी जी की लोकप्रियता कम होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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