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कोयला घोटाला: मधु कोड़ा सहित छह पर आरोपपत्र

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और पांच अन्य के खिलाफ सीबीआइ ने कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पाराशर की अदालत में दाखिल किया गया। मामले में आरोपपत्र दाखिल करने का फैसला एजंसी […]

Author December 13, 2014 9:04 AM
मधु कोडा व 7 अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु, पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और पांच अन्य के खिलाफ सीबीआइ ने कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पाराशर की अदालत में दाखिल किया गया। मामले में आरोपपत्र दाखिल करने का फैसला एजंसी ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से आठ दिसंबर को इस मामले में आरोपपत्र अथवा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की इजाजत दिए जाने के बाद किया। बता दें कि इससे पहले सीबीआइ ने इस मामले में एक अंतिम रिपोर्ट दायर की थी जो आरोपपत्र की तरह ही दस्तावेज था। इसे पिछली चार सितंबर को अदालत ने यह कहकर वापस लौटा दिया था कि एजंसी उसके सवालों का मुनासिब जवाब नहीं दे पाई।

आरोपपत्र विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पाराशर की अदालत में दाखिल किया गया। एजंसी ने करीब सवा दो महीने बाद आरोपपत्र दाखिल किया। जांच अधिकारी की ओर से इस बाबत एक-दो दिन में दस्तावेज दाखिल करने के निवेदन के बाद अदालत ने इसपर विचार के लिए 22 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की। कोड़ा और दो वरिष्ठ सेवानिवृत्त नौकरशाहों के अलावा एजंसी ने दो मौजूदा सरकारी कर्मचारियों बसंत कुमार भट्टाचार्य और बिपिन बिहारी सिंह, विनी आयरन स्टील एंड उद्योग लिमिटेड के निदेशक वैभव तुलस्यान और विजय जोशी को मामले में आरोपी बनाया है।

कोलकाता स्थित विनी आयरन स्टील एंड उद्योग लिमिटेड को भी मामले में एक आरोपी माना जाएगा। सभी आरोपियों पर लगाए गए आरोप भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके शर्मा ने अदालत को बताया कि एजंसी की ओर से आरोपी बनाए गए लोगों में से दो आरोपी सिंह और भट्टाचार्य अब भी सरकारी सेवा में हैं, इसलिए उनपर अभियोग के लिए सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति मांगी गई है। जज ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर, निर्देश दिया जाता है कि जांच अधिकारी वर्तमान अंतिम रिपोर्ट पर अदालत के विचार के लिए आरंभिक रूप से दस्तावेजों के संभावित सेटों का संकलन तैयार करेगा।

उन्होंने कहा कि मामले को 22 दिसंबर को विचार के लिए रखिए। मामले में कोड़ा और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने का सीबीआइ का कदम अदालत के पांच सितंबर को एजंसी के पूर्व के आरोपपत्र को ‘वापस किए जाने’ के बाद आया है। अदालत ने पूर्व में सीबीआइ की ओर से दायर किया गया आरोपपत्र यह कहकर लौटा दिया था कि एजंसी उसके सवालों पर कोई ठोस व्याख्या देने में विफल रही है।

मामला विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को झारखंड के राझरा शहर में कोयला ब्लाक आबंटन से जुड़ा है जिसमें सीबीआइ की ओर से सितंबर 2012 में दर्ज की गई प्राथमिकी में इसके निदेशकों और कोयला मंत्रालय, झारखंड सरकार के अज्ञात लोक सेवकों और अन्य को आरोपी बनाया गया था। सीबीआइ ने विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड, इसके निदेशकों-संजीव कुमार तुलस्यान, प्रशांत तुलस्यान, वैभव तुलस्यान, निशा तुलस्यान, निर्मला तुलस्यान और हेमंत कुमार अग्रवाल के खिलाफ भादंसं की धारा 120-बी के साथ 420 और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था। उनके अतिरिक्त, चार्टर्ड एकाउंटेंट नवीन कुमार तुलस्यान और कोयला मंत्रालय झारखंड सरकार के अज्ञात अधिकारियों और अन्य के नाम भी प्राथमिकी में आरोपी के रूप में थे। सीबीआइ ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि फर्म ने झारखंड में 17.09 एमएमटी के भंडार के साथ राझरा उत्तर (मध्य और पूर्वी) कोयला ब्लॉक सहित कोयला ब्लाकों के आबंटन के लिए आवेदन किया था।

इसने कहा था कि शुरू में विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड के पास इस्पात मंत्रालय या झारखंड सरकार की संस्तुति नहीं थी, लेकिन झारखंड के तत्कालीन सचिव, जो तीन जुलाई 2008 को स्क्रीनिंग कमेटी की 36वीं बैठक में शामिल हुए थे ने कमेटी के मिनट्स पर हस्ताक्षर किए थे जिसने फर्म के पक्ष में आबंटन की संस्तुति की थी। सीबीआइ ने आरोप लगाया था कि विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड ने अपनी शुद्ध परिसंपत्ति बढ़ाकर दिखाई थी और स्क्रीनिंग कमेटी की 36वीं बैठक की समयावधि के दौरान फर्म का स्वामित्व भी बदल दिया था। एजंसी ने नागपुर की ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और झारखंड की झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कोयला घोटाला मामलों में भी अलग आरोपपत्र दाखिल किए। ग्रेस इंडस्ट्रीज के खिलाफ अपने आरोपपत्र में सीबीआइ ने कंपनी और उसके एक निदेशक मुकेश गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) में आरोपी बनाया है।

हालांकि, अन्य निदेशकों में से एक सीमा गुप्ता का नाम आरोपपत्र में नहीं है, जिसे एफआइआर में आरोपी बनाया गया था, जिसमें सीबीआइ ने आरोप लगाया था कि फर्म ने 2008 में महाराष्ट्र में लोहारा ईस्ट कोल ब्लॉक को अपनी सकल पूंजी में कथित गड़बड़ करके हासिल किया था। एजंसी ने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। अदालत ने आरोपपत्र पर विचार के लिए 22 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की। झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ अपनी फाइनल रिपोर्ट में सीबीआइ ने कुछ निजी लोगों को धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और जालसाजी का आरोपी बनाया था। इस आरोपपत्र पर 18 दिसंबर को अदालत की ओर से विचार किया जाएगा।

सीबीआइ ने झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड और इसके चेयरमैन आरएस रूंगटा, प्रबंध निदेशक आरसी रूंगटा और फर्म के अन्य निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दाखिल की थी और इन पर पाकरी बरवाडी वेस्ट और गोंडल पारा कोयला ब्लाकों के लिए अपने आवेदनपत्र में तथ्यों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। इन तीन आरोपपत्रों के अलावा सीबीआइ ने कोयला घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगाई, जिसमें पहले उसने प्रकाश इंडस्ट्रीज और अन्य के खिलाफ एफआइआर दाखिल की थी। इस क्लोजर रिपोर्ट पर विचार के लिए अदालत की ओर से 23 दिसंबर की तारीख मुकर्रर है।

 

अगली सुनवाई 22 को

सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने इसपर सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तारीख तय की है। वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके शर्मा ने अदालत को बताया कि एजंसी की ओर से आरोपी बनाए गए लोगों में से दो आरोपी सिंह और भट्टाचार्य अब भी सरकारी सेवा में हैं, इसलिए उनपर अभियोग के लिए सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति मांगी गई है। जज ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के मद्देनजर, निर्देश दिया जाता है कि जांच अधिकारी वर्तमान अंतिम रिपोर्ट पर अदालत के विचार के लिए आरंभिक रूप से दस्तावेजों के संभावित सेटों का संकलन तैयार करेगा।

अदालत ने मांगे थे ठोस जवाब

मामले में कोड़ा और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर करने का सीबीआइ का कदम अदालत के पांच सितंबर को एजंसी के पूर्व के आरोपपत्र को ‘वापस किए जाने’ के बाद आया है। अदालत ने पूर्व में सीबीआइ की ओर से दायर किया गया आरोपपत्र यह कहकर लौटा दिया था कि एजंसी उसके सवालों पर कोई ठोस व्याख्या देने में विफल रही है। मामला विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड को झारखंड के राझरा शहर में कोयला ब्लाक आबंटन से जुड़ा है।
हिंडाल्को पर फैसला सुरक्षित

हिंडाल्को कोयला ब्लाक आबंटन मामले में सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट पर एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को अपना आदेश 16 दिसंबर तक सुरक्षित रख लिया। विशेष सीबीआइ न्यायाधीश भरत पाराशर ने कहा कि कुछ स्पष्टीकरण मांगा गया। अदालत ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित कुछ दस्तावेजों के बारे में सीबीआइ से पूछा जिनका क्लोजर रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। इसके जवाब में एजंसी के जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में दाखिल कर दिए गए हैं। अदालत उस मामले में सुनवाई कर रही थी जिसमें ओड़िशा में 2005 में हिंडाल्को को तालाबीरा 2 और 3 कोयला ब्लाक आबंटित किए जाने से संबंधित मामले में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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