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‘मेड इन इंडिया’ सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल टेस्ट, दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को बर्बाद करने में सक्षम

इंटरसेप्टर ने यहां चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज के प्रक्षेपण परिसर 3 से पृथ्वी मिसाइल से प्रक्षेपित किये गये एक लक्ष्य को भेद दिया।

Author बालेश्वर (ओडिशा) | March 1, 2017 11:22 PM
मिसाइल का परीक्षण (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।)

बालेश्वर/ओडिशा/नई दिल्ली। भारत ने स्वदेश निर्मित सुपरसोनिक इंटरसेप्टर मिसाइल का बुधवार (1 मार्च) को सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल में कम ऊंचाई पर आ रही किसी भी बैलिस्टिक शत्रु मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता है। इस मिसाइल ने देश के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कौशल को और बढ़ा दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ओड़िशा के अब्दुल कलाम द्वीप से एंडो एटमोस्फेरिक मिसाइल के परीक्षण में अभियान के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया। इस मिसाइल का एक महीने से कम समय में यह दूसरी बार परीक्षण किया गया और यह बहु स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने के प्रयासों का एक हिस्सा है।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मिसाइल के सफल परीक्षण पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को बधाई दी है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘इस प्रक्षेपण से देश के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस का कौशल साबित हुआ है।’ रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार एवं डीआरडीओ के महानिदेशक (मिसाइल एवं रणनीतिक प्रणालियां) डॉ. जी सतीश रेड्डी एवं अन्य शीर्ष अधिकारियों की निगरानी में इसका सफल प्रक्षेपण किया गया। एक रक्षा अधिकारी ने बताया, ‘आज का परीक्षण उड़ान के दौरान इंटरसेप्टर के कई मानकों को मान्यता देने के संबंध में किया गया।’ उन्होंने साथ ही बताया कि मिसाइल का कम

इंटरसेप्टर ने यहां चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज के प्रक्षेपण परिसर 3 से पृथ्वी मिसाइल से प्रक्षेपित किये गये एक लक्ष्य को भेद दिया। लक्षित मिसाइल का चांदीपुर से करीब दस बजकर दस मिनट पर प्रक्षेपण किया गया। बंगाल की खाड़ी में अब्दुल कलाम द्वीप में तैनात उन्नत वायु रक्षा (एएडी) इंटरसेप्टर मिसाइल को करीब चार मिनट बाद ट्रैकिंग रडारों से संकेत मिले और यह शत्रु मिसाइल को हवा में ही नष्ट करने के लिए अपने पथ पर बढ़ गई। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के एक वैज्ञानिक ने कहा, ‘यह मिशन सर्वोत्तम था और सटीक तरीके से लक्ष्य को भेदा गया।’

अधिकारी ने कहा कि यह इंटरसेप्टर 7.5 मीटर लंबी एक चरणीय ठोस रॉकेट प्रणोदक निर्देशित मिसाइल है जिसमें एक नौवहन प्रणाली, एक अत्याधुनिक कंप्यूटर और एक इलेक्ट्रो मेकैनिकल एक्टीवेटर लगा है। उन्होंने बताया कि इंटरसेप्टर मिसाल का अपना एक सचल प्रक्षेपक, हवा में निशाने को भेदने के लिए एक सुरक्षित डाटा लिंक, स्वतंत्र ट्रैकिंग क्षमता और आधुनिक रडार हैं। इंटरसेप्टर मिसाइल ने 11 फरवरी को पृथ्वी के वायुमंडल से 50 किलोमीटर ऊपर, अधिक ऊंचाई पर एक प्रतिद्वन्द्वी बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्ण भेदा था। इससे पहले कम ऊंचाई पर 15 मई 2016 को एएडी मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था।

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