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सर्जिकल स्ट्राइक की अगुआई करने वाले अफसर बोले- मोदी सरकार से पहले भी जवाबी कार्रवाई के लिए खुले थे सेना के हाथ

सर्जिकल स्ट्राइक की अगुवाई करने वाले हुड्डा ने कहा, निश्चित तौर पर सीमा के उस पार जाकर जवाब देना एक सराहनीय कदम है। पर ऐसा भी नहीं था कि इससे पहले सेना के हाथ बंधे हुए थे।

Author Published on: April 13, 2019 2:04 PM
सर्जिकल स्ट्राइक की जिम्मेदारी संभालने वाले रिटा. लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुडा ने कहा कि सेना हमेशा स्वतंत्र। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुड्डा ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले बालाकोट पर एयर स्ट्राइक और उरी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक से पहले सेना के हाथ कभी बंधे नहीं थे। सर्जिकल स्ट्राइक की अगुवाई करने वाले हुड्डा ने मोदी सरकार की तारीफ में कहा, निश्चित तौर पर सीमा के उस पार जाकर जवाब देना एक सराहनीय कदम है। लेकिन ऐसा भी नहीं था कि इससे पहले सेना के हाथ बंधे हुए थे।

शुक्रवार (12 अप्रैल 2019) को एक कार्यक्रम में हुड्डा ने कहा, सेना के हाथ कभी बंधे नहीं थे। सेना ने 1947 के बाद तीन-चार युद्ध लड़े हैं। वह हमेशा से ही स्वतंत्र रही है। लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) एक बेहद ही खतरनाक जगह है। यहां पर सीमा पार से होने वाली गोलीबारी का तुरंत जवाब दिया जाता है। जिसके लिए सेना स्वतंत्र है।’

उन्होंने आगे कहा ‘हमें सैन्य कार्रवाई पर सेना से सबूतों की मांग नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जब सेना के टॉप अधिकारी खुद कार्रवाई की जानकारी देश के समक्ष रखते हैं तो इस पर संदेह करना सही नहीं होता। निश्चित तौर पर इससे पहले की सरकारों में सेना ने कभी राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं देखा। सैन्य अभियान किस तरह चलाए जाएं इस बारे में कभी राजनीतिक दखलंदाजी नहीं रही। किसी ने नहीं कहा कि हमें एलओसी पर किस तरह का व्यवहार करना है।’

लेफ्टिनेंट जनरल ने आगे कहा ‘हम जब सेना को सीमापार जाकर आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देकर वापस लौटते हुए देखेते हैं तो इससे सिर्फ यह अहसास होता है कि देश के जवान सिर्फ देश के लिए काम करना चाहते हैं।’

हुड्डा ने उरी हमले के बाद घटनास्थल के दौरे को याद कर कहा, ‘मैंने सैनिकों के तंबुओं की राख देखी तो चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जो कि उस समय मेरे साथ ही मौजूद थे उनसे कहा था कि हमें अब जरूर कोई ठोस कार्रवाई करनी होगी। जिसके बाद हमने गहन विचार किया तो कई विकल्पों पर विचार किया गया। लेकिन हमारी सेना को पिछले एक साल से दुश्मन के घर में घुसकर कैसे हमला कर वापस सुरक्षित लौटना है इसकी ट्रेनिंग दी जा रही थी। इस विकल्प के मौजूद रहने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा और हमने सीमा पार जाकर आतंकियों के पांच शिविरों पर धावा बोला। और वापस सुरक्षित लौटे भी। ऐसा सिर्फ इसलिए मुमकिन हो सका क्योंकि सेना में आत्मविश्वास था और इस आत्मविश्वास की वजह उन्हें मिली ट्रेनिंग थी।’

लेफ्टिनेंट जनरल ने आगे बताया ‘हमने आतंकी शिविरों पर अलग-अलग समय पर हमला किया। सबसे पहला हमला मध्यरात्रि में तो आखिरी हमला सुबह 6 बजे किया। हम चिंतित थे कि कहीं पाकिस्तान आर्मी सचेत न हो जाए पर किस्मत ने हमारा साथ दिया और हमने एक सफल अभियान को अंजाम दिया। बता दें कि कि हुड्डा फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा पर कांग्रेस की टास्क फोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं।

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