Piped Natural Gas Source And Supply In India: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण ड्रोन और मिसाइलों के हमले से तेल समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में वैश्विक ऊर्जा प्रवाह बाधित हो रहा है। इसकी वजह से भारत सहित कई देश दशकों के सबसे बड़े ईंधन संकट का सामना कर रहे हैं।
भारत में सरकार लोगों को एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडरों के बजाय पीएनजी (पाइप से आने वाली प्राकृतिक गैस) का विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, क्योंकि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों से भड़के पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज पर असर पड़ा है। इसके माध्यम से दुनिया की गैस और ईंधन की जरूरतों का पांचवां हिस्सा गुजरता है।
भारत सरकार ने जारी किया आदेश
भारत सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया है जिसके तहत यह कहा गया है कि अगर पीएनजी (पेट्रोलियम प्राइवेसी सिस्टम) का विकल्प उपलब्ध है, तो पीएनजी का विकल्प न चुनने वालों की एलपीजी आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। पाइपलाइन गैस, जिसे पीएनजी भी कहा जाता है, दरअसल प्राकृतिक गैस होती है। इसमें ज्यादातर मीथेन गैस होती है। यह गैस जमीन के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाई जाती है।
पाइपलाइन के जरिये घरों तक गैस को पहुंचाया जाता है
यह गैस प्राकृतिक गैस के क्षेत्रों से निकाली जाती है। फिर इसे एलएनजी (LNG) के रूप में भारत तक लाया जाता है और पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है। दूसरी ओर, एलपीजी कच्चे तेल से तेल रिफाइनरियों में रिफाइंड (refined ) की जाती है। पीएनजी गैस का प्रवाह निरंतर होता रहता है, इसे दोबारा भरने की जरूरत नहीं होती है और इसे शहर के गैस नेटवर्क के माध्यम से कम दबाव पर आपूर्ति की जाती है।
भारत में प्राकृतिक गैस का उत्पादन मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन, असम और त्रिपुरा जैसे क्षेत्रों से होता है। इनमें से पूर्वी तट के पास समुद्र में स्थित गहरे पानी वाला कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, केजी बेसिन के तीन क्षेत्रों आर क्लस्टर, सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे ने 2024 में भारत के कुल 36 बीसीएम गैस उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान दिया। उम्मीद है कि ये तीनों क्षेत्र अपने पूरे जीवनकाल में मिलकर करीब 85 बीसीएम गैस का उत्पादन करेंगे।
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बार-बार रिफिल की नहीं पड़ती जरूरत
असम और त्रिपुरा बेसिन देश के कुल ऑनशोर (जमीन-आधारित) गैस उत्पादन में 47 प्रतिशत का हिस्सा रखते हैं। हालांकि, इंपोर्टेड एलएनजी मध्य पूर्व से, मुख्य तौर पर कतर से आती है, लेकिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देश भी भारत को एलएनजी का निर्यात करते हैं। पीएनजी लगातार पाइपलाइन के जरिए सप्लाई होती है, इसलिए इसमें सिलेंडर की तरह बार-बार रिफिल की जरूरत नहीं पड़ती। इसका फायदा यह है कि अगर दुनिया में गैस की कमी भी हो जाए, तो घरों में इसका असर कम पड़ता है। ऐसी स्थिति में गैस की सप्लाई आमतौर पर घरों में जारी रहती है, जबकि कमी को पूरा करने के लिए उद्योगों की सप्लाई में बदलाव किया जाता है।
भारत हर साल लगभग 25-26 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी का आयात करता है। उदाहरण के लिए, एसएंडपी ग्लोबल के अनुसार, भारत ने 2025 में लगभग 25.5 मिलियन टन एलएनजी का आयात किया था और यह आने वाले समय में बढ़कर प्रति वर्ष 28-29 मिलियन टन होने की उम्मीद है।
