दोपहर का समय है और राम प्रसाद शर्मा स्टाफ के लंच के लिए चने की ग्रेवी बना रहे हैं। शर्मा दादर ईस्ट में 66 साल पुराने नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट और बार ‘ग्रेट पंजाब’ के हेड शेफ हैं। शर्मा को चने की ग्रेवी बनाने में आम तौर पर लगने वाले समय से लगभग दोगुना समय लग रहा है। अपने करियर में पहली बार, शर्मा एक इलेक्ट्रिक कॉइल वाले स्टोव पर खाना बना रहे हैं। यह एक ऐसा उपकरण है जो कई रेस्टोरेंट के लिए मददगार साबित हुआ है, क्योंकि यह मौजूदा बर्तनों के साथ ही काम करता है। लेकिन शर्मा इससे ज़्यादा प्रभावित नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “उबालने के बाद, गैस पर चने की ग्रेवी बनाने में मुझे लगभग 20-25 मिनट लगते थे। मैं इसे 40 मिनट से ज्यादा समय से बना रहा हूं और इसे पूरी तरह से पकने में अभी पांच मिनट और लगेंगे।” जब दिन का पहला ऑर्डर आता है, वेज बिरयानी और दाल तड़का (टेकअवे के लिए) तो शर्मा फिर से इलेक्ट्रिक कॉइल चालू कर देते हैं। उन्होंने स्टोव पर एक पैन रखते हुए और पहले से तैयार प्याज-टमाटर के पेस्ट के गर्म होने का इंतजार करते हुए कहा, “इसमें खाना तभी पकना शुरू होता है, जब कॉइल लाल हो जाती है। इसमें कुछ मिनट लगते हैं।”

मुझे ग्रेवी बनाने में ही आधा घंटा लग गया- शर्मा

शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “पहले मैं 10 मिनट में वेज बिरयानी और पांच मिनट में दाल तड़का तैयार कर लेता था, क्योंकि मैं गैस स्टोव पर हमेशा तेज आंच का इस्तेमाल कर सकता था। इसमें ज्यादा समय लगता है। यह जितना ज्यादा गर्म होता है, स्वाद उतना ही बेहतर आता है।” शर्मा ने 1994 में ‘ग्रेट पंजाब’ में एक डिशवॉशर (बर्तन धोने वाले) के तौर पर काम शुरू किया था और अपनी मेहनत से हेड शेफ के पद तक पहुंचे। आम दिनों में, वह लगभग दो घंटे में चार तरह की बेस ग्रेवी वेज, चिकन, व्हाइट सॉस और मटन के साथ-साथ मिक्स-वेज ग्रेवी भी तैयार कर लेते थे। उन्होंने कहा, “आज 4.5 किलोवॉट के स्टोव पर एक ग्रेवी बनाने में ही मुझे आधा घंटा लग गया।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या इलेक्ट्रिक स्टोव से कम से कम किचन की गर्मी तो कम होगी, तो शर्मा ने अपना सिर हिलाते हुए मना कर दिया। उन्होंने कहा, “जब चारों गैस बर्नर हटा दिए जाएंगे, तो हालात और भी खराब हो जाएंगे। इनसे ज्यादा गर्मी निकलती है। हालांकि, धुआं जरूर कम होगा।”

‘ग्रेट पंजाब’ के थर्ड जेनरेशन के मालिक ध्रुवीर गांधी के लिए, पिछले कुछ दिन ‘ट्रायल एंड एरर’ (अजमाकर सीखने) वाले रहे हैं। उन्होंने इस हफ्ते की शुरुआत में 20000 रुपये में एक 4.5-किलोवाट का स्टोव, 15000 रुपये प्रति स्टोव के हिसाब से दो 3.5-किलोवाट के स्टोव और दो 2.5-किलोवाट की यूनिट्स खरीदीं। एक इलेक्ट्रीशियन ने किचन की वायरिंग दोबारा की, बड़ी यूनिट्स के लिए एक प्लग-एंड-सॉकेट AC डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड लगाया गया। इन बदलावों पर 25000 रुपये से ज्यादा का खर्च आया। गांधी ने कहा, “इनका इस्तेमाल करने के बाद ही हमें समझ आया कि क्या काम करता है और क्या नहीं।”

लेकिन अब उन्हें और स्टोव चाहिए और कहीं भी कोई स्टोव नहीं मिल रहा है। दोपहर 1 बजे के कुछ देर बाद, रेस्टोरेंट में ऊंची आवाजें गूंजने लगती हैं। गांधी अपने जनरल मैनेजर से बात करते हुए अपना आपा खो बैठे हैं। वह कहते हैं, “मैंने तुमसे शनिवार को ही इन्हें खरीदने के लिए कहा था! अगर तुमने ऐसा किया होता, तो आज हम इस हालत में न होते।”

बाद में, जब उनका गुस्सा शांत हुआ, तो गांधी ने समझाया, “5 मार्च को सरकार की तरफ से एक सर्कुलर आया था, जिसमें कहा गया था कि LPG की सप्लाई सिर्फ घरेलू इस्तेमाल के लिए की जाएगी। जब मैंने यह सर्कुलर देखा, तब मैं अपने जन्मदिन के मौके पर थाईलैंड में था, लेकिन मैंने इसे अपने जनरल मैनेजर के साथ शेयर किया और उनसे इलेक्ट्रिक स्टोव खरीदने के लिए कहा। उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। अब कहीं भी कोई स्टॉक उपलब्ध नहीं है।” पुणे में जिस वेंडर से उन्होंने संपर्क किया था, उसने उन्हें फोन करके एक बुरी खबर दी, उसने जिस आखिरी स्टोव का वादा किया था, वह अब उपलब्ध नहीं है।

सदानंद होटल में भी दिखा अफरा-तफरी का माहौल

शहर के दूसरी तरफ, क्रॉफर्ड मार्केट में स्थित होटल सदानंद में भी कुछ ऐसी ही अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। यह घबराहट सोमवार को तब शुरू हुई, जब अभिषेक शेट्टी को पता चला कि उन्हें हमेशा की तरह सात सिलेंडरों के बजाय सिर्फ दो सिलेंडर ही मिलेंगे। यह भोजनालय अपनी लंबी कतारों के लिए मशहूर है। खासतौर पर अपनी साउथ डिसेज के लिए।

शेट्टी के पास एक फायदा था, वह बिजली के उपकरण सप्लाई करने का कारोबार भी करते हैं। उन्होंने बताया, “मेरे पास कुछ स्टॉक पहले से ही मौजूद था। मैंने अपने मैनेजर के साथ बैठकर एक ऐसा मेन्यू तैयार किया, जिसे हम बिजली के उपकरणों की मदद से बना सकें।” अब किचन में अलग-अलग तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। डोसा बनाने के लिए एक बड़ी हॉट प्लेट, चपाती और पाव बनाने के लिए एक छोटी हॉट प्लेट, इडली बनाने के लिए एक इलेक्ट्रिक स्टीमर और पूरी, वड़ा व कटलेट तलने के लिए एक डीप फ्रायर।

गुरुवार के दिन तो किचन एक हफ्ते पहले के मुकाबले काफी अलग दिख रहा था। एक कोने में, एक डीप फ्रायर में पूरियां तली जा रही थीं, यह एक ऐसा उपकरण है जिसे आम तौर पर McDonald’s के फ्रेंच फ्राइज या फास्ट-फूड रेस्टोरेंट के अनियन रिंग्स से जोड़ा जाता है। पास ही, एक बड़ी हॉट प्लेट पर मसाला डोसे बन रहे थे। पुराने गैस से चलने वाले बॉयलर के ठीक सामने एक नया इलेक्ट्रिक इडली स्टीमर लगा था, जबकि एक ग्लास-टॉप इंडक्शन स्टोव पर चाय बन रही थी।

काम करने के तरीके में सबसे बड़ा बदलाव समय को लेकर आया है। किचन की टीम पहले सुबह 5 बजे आती थी, अब वे रात को देर से लौटते हैं ताकि पहले से ही खाने के बैच तैयार कर सकें। छोटे बर्तनों का मतलब है ज्यादा बैच, सांभर जो पहले 10-12 लीटर के तीन बैच में बनता था, अब 7 लीटर के पांच बैच में बनता है।

नए उपकरणों को समझने में आधा घंटा लगा- चिंटू दास

रेस्टोरेंट में तीन साल से काम कर रहे 26 साल के चिंटू दास ने बताया कि नए उपकरणों को समझने में उन्हें करीब आधा घंटा लगा। उन्होंने कहा, “उसके बाद यह आसान हो गया।” हॉट प्लेट्स में थर्मोस्टेट लगे होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे गैस की लौ को कम-ज्यादा किया जाता है। दास का जिक्र करते हुए शेट्टी ने कहा, “शुरू में वह थोड़ा डरा हुआ था। लेकिन जब उसे यह समझ आ गया कि इसके नॉब भी गैस स्टोव की तरह ही काम करते हैं, तो वह सहज हो गया। पूरी टीम को इसे समझने में करीब एक दिन लगा।”

दास ने कहा, “मैं एक साथ चार डोसे नहीं बना सकता। सिर्फ एक, शायद दो।” नया इडली स्टीमर एक बार में सिर्फ 27 इडली बनाता है, जबकि पुराना स्टीमर 48 बनाता था। मेन्यू में भी इसी के अनुसार बदलाव किए गए हैं, मैसूर डोसा, रवा डोसा और उत्तपम को फिलहाल मेनू से हटा दिया गया है। शेट्टी ने कहा, “इनमें बहुत समय लगता है।”

ग्रेट पंजाब और होटल सदानंद अकेले नहीं हैं। मुंबई भर में , हर आकार के भोजनालय अपने मेनू में कटौती कर रहे हैं, इंडक्शन स्टोव लगा रहे हैं या अस्थायी रूप से बंद हो रहे हैं। रेस्टोरेंट मालिक गौरी देवीदयाल ने कहा कि मैग स्ट्रीट में योजना है कि तेज आंच पर पकाने वाले एशियाई व्यंजनों को कम किया जाए और इंडक्शन स्टोव पर बनने वाले व्यंजनों पर फोकस किया जाए।

इंडक्शन स्टोव की कीमत में उछाल

रेस्टोरेंट मालिकों की बढ़ती मांग के बीच, बिजली के उपकरणों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। लोनावला स्थित ग्लासहाउस रेस्टोरेंट फियोरी के संस्थापक सूरज गुप्ता ने एक सप्लायर का मैसेज शेयर किया। इसमें दिखाया गया है कि 3.5 किलोवाट के इंडक्शन स्टोव की कीमत कुछ ही घंटों में 9500 रुपये से बढ़कर 12000 रुपये हो गई। बिजली की सीमित क्षमता की समस्या भी है। शेट्टी को नए उपकरण लगाने के लिए अपना डिशवॉशर और एक फ्रीजर अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जबकि इंस्टॉलेशन के दौरान सर्किट ब्रेकर बार-बार ट्रिप हो रहा था।

मुंबई में धीमी आंच पर पकने वाले खाने पर संकट

शारदा भवन रेस्टोरेंट ने अपने मेनू में कटौती कर दी है। रेस्टोरेंट ने रवा डोसा और उत्तपम परोसना बंद कर दिया है क्योंकि इन्हें पकाने में ज्यादा समय लगता है और इनमें अधिक गैस की खपत होती है। पढ़ें पूरी खबर…