दिल्ली के कालकाजी इलाके में किराये के एक छोटे से घर में रहने वाले श्याम कुमार की कहानी आज हजारों गरीब परिवारों की परेशानी को दिखाती है। बिहार के सीतामढ़ी से आने वाले श्याम 17 साल पहले, जब वह सिर्फ 12 साल के थे, काम की तलाश में दिल्ली आए थे। तब से उन्हें पता है कि शहर में गरीबों की जिंदगी आसान नहीं होती और यहां हर दिन किसी नई मुश्किल के लिए तैयार रहना पड़ता है। लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन खाना बनाने वाला गैस सिलेंडर भी इतनी बड़ी समस्या बन जाएगा, वह भी तब जब वह ज्यादा पैसे देने को भी तैयार हों।
श्याम के पास एलपीजी कनेक्शन नहीं है, इसलिए वह हमेशा ब्लैक में सिलेंडर खरीदते रहे हैं। पहले उन्हें 14.2 किलो का सिलेंडर करीब 1100 रुपये में मिल जाता था। लेकिन पिछले छह दिनों से उन्होंने हर जगह कोशिश की, फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिला। अब ब्लैक में वही सिलेंडर 2500 से 3000 रुपये तक में बेचा जा रहा है और वह इतनी कीमत देने को भी तैयार हैं। श्याम सब्जी बेचते हैं और कभी-कभी दिहाड़ी मजदूरी भी करते हैं। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।
सरकार ने दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये तय की है, जो पहले 853 रुपये थी। लेकिन जिन लोगों के पास कनेक्शन नहीं है, उनके लिए यह कीमत सिर्फ कागजों में ही रह जाती है।
श्याम बताते हैं कि जिस रात उनका सिलेंडर अचानक खत्म हो गया, उस रात परिवार को केले और रोटी खाकर गुजारा करना पड़ा। उसके बाद से वह पास के एक ढाबे से खाना ला रहे हैं, लेकिन वहां भी दाम बहुत बढ़ गए हैं। गैस की कमी के कारण ढाबे में रोटी, चावल और दाल जैसी चीजों के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। श्याम कहते हैं कि अमीर लोगों के यहां गैस की सप्लाई कभी नहीं रुकती, सारी मुश्किलें सिर्फ गरीबों के हिस्से आती हैं।
दिल्ली से लगभग 2500 किलोमीटर दूर पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध भी इस संकट की बड़ी वजह बन गया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह समुद्री रास्ता बहुत संकरा है और यहां से गुजरने वाली जहाजों की आवाजाही पर ईरानी नौसेना सख्ती कर रही है।
यही वह रास्ता है जिससे होकर भारत के लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात गुजरते हैं। भारत हर साल करीब 33 मिलियन टन एलपीजी की खपत करता है। इसमें से करीब 13 मिलियन टन यानी लगभग 40 प्रतिशत गैस देश में बनती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। यह गैस मुख्य रूप से कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आती है।
इस संकट का असर छोटे कारोबारियों पर भी साफ दिख रहा है। गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में चाय बेचने वाले कमल गोस्वामी ने पिछले हफ्ते से चाय बेचना बंद कर दिया है। उनके स्टोव से सिलेंडर गायब है और नीचे लटकती पाइप इस संकट की कहानी बता रही है। कमल कहते हैं कि उन्होंने जानबूझकर सिलेंडर हटाकर रखा है ताकि लोगों को हालात की गंभीरता समझ आए। पहले ब्लैक में 200 या 300 रुपये ज्यादा देकर सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब ज्यादा पैसे देने पर भी नहीं मिल रहा।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम में घरों में काम करने वाली रेखा भी चिंता में हैं क्योंकि उनका सिलेंडर जल्द खत्म होने वाला है। वह पहले ब्लैक में करीब 1200 रुपये में सिलेंडर खरीदती थीं, लेकिन अब विक्रेता ने कहा है कि इस बार शायद 3000 रुपये से कम में नहीं मिलेगा। रेखा को डर है कि उन्हें फिर से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ सकता है, लेकिन किराये के घर में वह भी संभव नहीं है।
जिन परिवारों के पास एलपीजी कनेक्शन नहीं है, उन्हें काफी परेशानी
दरअसल, कई लोगों के पास एलपीजी कनेक्शन नहीं है। जरूरी दस्तावेजों की कमी, केवाईसी में देरी, डेटा में गड़बड़ी और स्थानीय पते के प्रमाण जैसी दिक्कतों के कारण बहुत से लोग कनेक्शन नहीं ले पाते। रेखा बताती हैं कि उन्होंने कई बार कनेक्शन लेने की कोशिश की, लेकिन उनके सारे दस्तावेज पश्चिम बंगाल के हैं और उनसे स्थानीय पते का प्रमाण या किराया समझौता मांगा गया, जो मकान मालिक ने देने से मना कर दिया।
गैस की कमी का असर खाने की दुकानों पर भी दिख रहा है। दिल्ली के आईटीओ इलाके में एक दुकान के बाहर लगे बोर्ड पर लिखा है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण हर पराठे की कीमत 10 रुपये बढ़ा दी गई है।
सरकार ने फिलहाल पंजीकृत कनेक्शन वाले घरों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इससे उन परिवारों को ज्यादा परेशानी हो रही है जो अब तक ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदते थे। अधिकारियों का कहना है कि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उनका कहना है कि गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के कारण लोग घबराकर ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से फरवरी के बीच औसतन हर दिन 55.7 लाख सिलेंडर बुक होते थे। लेकिन गुरुवार को यह संख्या 35 प्रतिशत बढ़कर 75.7 लाख हो गई और शुक्रवार को 88.8 लाख तक पहुंच गई।
मंत्रालय के अनुसार 13 मार्च को 62.5 लाख, 12 मार्च को 50 लाख, 11 मार्च को 48.7 लाख, 10 मार्च को 52.1 लाख और 9 मार्च को 47.8 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हुई। देश में कुल 33.37 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं। इसके अलावा पूरे देश में लगभग 1.01 लाख रिटेल आउटलेट और 25605 एलपीजी वितरक काम कर रहे हैं।
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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध और होर्मुज जलमार्ग बंद होने का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। जहां दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर घटने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं विभिन्न देशों में शेयर बाजार गिरते हुए दिखाई दे रहे हैं। ईरान के साथ युद्ध शुरू करने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे आक्रामक कदम के रूप में पेश किया था। अब इस युद्ध ने कुछ और ही रूप ले लिया है। यह सोचा नहीं गया था कि इससे वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगेगा, जो पश्चिम एशिया में अन्य संघर्षों से कहीं अधिक गंभीर होगा। इस युद्ध ने यात्रा के तौर-तरीकों, ऊर्जा पर निर्भरता, जीवनयापन की लागत, व्यापार मार्गों और रणनीतिक साझेदारियों को बदल दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
