ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के चलते देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों और ईंधन की कमी देखने को मिल रही है। कई हिस्सों में सिलेंडर न मिलने के चलते दुकानों, रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ा है। वहीं, कई हिस्सों में पेट्रोल की कमी की खबरों के बीच पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिली। कर्नाटक में ऑटो रिक्शा में एलपीजी की कमी जारी है और पेट्रोल पंप बंद हैं। ऐसे में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने रविवार को ऑटो रिक्शा चालकों से आपूर्ति केंद्रों पर दबाव कम करने के लिए अस्थायी रूप से पेट्रोल का उपयोग करने का आग्रह किया। हालांकि, चालकों का कहना है कि दोहरे ईंधन की व्यवस्था कोई समाधान नहीं है।

एक बयान में, आईओसीएल ने बताया कि उसने कर्नाटक में एलपीजी की आपूर्ति में बढ़ोत्तरी की है। फरवरी में औसत दैनिक आपूर्ति 43.5 मीट्रिक टन/दिन थी जो मार्च में बढ़कर 59.53 मीट्रिक टन/दिन और फिर 4 अप्रैल तक 68.53 मीट्रिक टन/दिन हो गई। इस वृद्धि के बावजूद, व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। राज्य में तेल विपणन कंपनी (OMC) के 72 आउटलेट्स में से 55 का संचालन आईओसीएल करता है। हालांकि निजी कंपनियां 300 से अधिक स्टेशनों का संचालन करती हैं लेकिन लगभग 80 प्रतिशत निजी आउटलेट्स बंद हो चुके हैं जिसके कारण वाहनों की भारी भीड़ आईओसीएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा संचालित ऑटो एलपीजी वितरण स्टेशनों की ओर उमड़ रही है।

अपने बयान में, आईओसीएल ने यह भी कहा कि कीमतों में असमानता ड्राइवरों को प्रभावित कर रही है। IOCL ने कहा, “सरकारी उपक्रमों द्वारा संचालित आउटलेट बेंगलुरु में ऑटो एलपीजी 89.52 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं जबकि निजी विक्रेता इसे 99 रुपये से 105 रुपये प्रति लीटर के बीच बेच रहे हैं। इस अंतर के कारण इन स्टेशनों पर भीड़ बढ़ गई है और वेटिंग टाइम भी बढ़ गया है।”

ऑटो रिक्शा बेड़े का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्यूल-फ्यूल क्षमता से लैस

आईओसीएल ने बताया कि ऑटो रिक्शा बेड़े का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्यूल-फ्यूल क्षमता से लैस है जिससे यह ऑटो एलपीजी और पेट्रोल दोनों पर चल सकता है। इसमें कहा गया, “मौजूदा हालात को देखते हुए, उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अस्थायी रूप से पेट्रोल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में अपनाएं।”

आईओसीएल ने आगे कहा, “ऑटो एलपीजी ओएमसी नेटवर्क में उपलब्ध है। हालांकि, प्रतीक्षा समय अधिक होने की स्थिति में ग्राहकों को अपने वाहनों की ड्यूल-फ्यूल क्षमता का उपयोग करने और पेट्रोल पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।”

ऑटो रिक्शा चालकों ने IOCL के समाधान को अव्यवहारिक बताया

इस सबके बीच जमीनी हकीकत निराशाजनक है क्योंकि पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं, जिससे कई ऑटो रिक्शा चालकों को रुककर इंतजार करना पड़ रहा है। ऑटोरिक्शा चालक संघ (एआरडीयू) के महासचिव रुद्र मूर्ति ने आईओसीएल के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि पेट्रोल भरना और संचालन करना असंभव है।

मूर्ति ने कहा, “इन ऑटो रिक्शाओं में पेट्रोल की क्षमता मुश्किल से 1-2 लीटर है। इनमें से अधिकांश ने सालों से पेट्रोल मोड का उपयोग नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की खपत बेहद खराब है और इंजन में खराबी आने की संभावना है। यह निश्चित रूप से उन चालकों के लिए समाधान नहीं है जो प्रतिदिन 100-150 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं।”

संकट से जूझते ढाबे और रेस्टोरेंट्स, लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर

ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के चलते देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है। कई हिस्सों में सिलेंडर न मिलने के चलते दुकानों, रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ा है। ऐसे ही उत्तराखंड में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से ढाबों और सड़क किनारे के छोटे भोजनालयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके कामकाज में दिक्कत हो रही है। पढ़ें पूरी खबर…