यह दर्दभरी कहानी एक कश्मीर पंडित परिवार की है। जिसने 25 जून को एक हिट-एंड-रन दुर्घटना में अपने इकलौते बेटे को खो दिया। बेटे की मौत के बाद माता-पिता दुखी और बेबस हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि अब उन्हें क्या करना चाहिए? उन्होंने न्याय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील की है।

मट्टू परिवार के गुड़गांव स्थित घर का दरवाजा सीधे उनके बेटे सार्थक के कमरे में खुलता है। उसका बिस्तर लगा हुआ है। कमरा साफ-सुथरा है, लेकिन कश्मीरी पंडित अनुराधा और सुरेंद्र मट्टू के लिए, यह कमरा इस बात की याद दिलाता है कि उनका इकलौता बच्चा कभी वापस नहीं लौटेगा।

दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज में 25 जून की सुबह एक हिट-एंड-रन दुर्घटना में सार्थक की मौत हो गई, वह 34 साल का था। सार्थक की बाइक को टक्कर मारने वाली एसयूवी के चालक अपूर्व सिंह (30) उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का निवासी है। घटना के बाद उसको 27 जून को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कुछ ही समय बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया।

परिवार का दुख अब गुस्से में बदल गया है। सार्थक की मां अनुराधा अपने बेटे को खोने का बाद बेहाल हैं। वह कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि मैं अपना गुस्सा किस पर और कैसे निकालूं।

सार्थक सुबह करीब 6:30 बजे नोएडा में अपने काम पर मोटरसाइकिल से जा रहे थे। तभी राजोकरी फ्लाईओवर के पास एक महिंद्रा थार ने कथित तौर पर उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। एफआईआर के अनुसार, टक्कर इतनी जोरदार थी कि वे और उनकी मोटरसाइकिल फ्लाईओवर से नीचे गिर गए।

गुरुग्राम स्थित अपने घर से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में सार्थ के पिता सुरेंद्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से न्याय की अपील की है। वीडियो में उन्होंने कहा कि मेरे माता-पिता की मृत्यु हो गई, हमारा घर जल गया, फिर भी हमने अपना जीवन दोबारा खड़ा किया। अब हमारे इकलौते बेटे की हत्या कर दी गई है। दोषियों को सजा क्यों नहीं मिली?

सार्थक ने सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद उसने लंदन के रोहैम्पटन विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री पूरी की थी।

गुरुवार को इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अनुराधा ने कहा, “हमने सार्थक से लंदन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद वापस न लौटने की गुहार लगाई थी। हमें यहां के सड़क विवाद का डर था। उसने हमसे कहा, “तुम ही मेरी सब कुछ हो। मेरा दिल यहीं है।’ हमने उसे यह भी कहा कि हम वहीं बस जाएंगे। लेकिन वह सिर्फ हमारे लिए वापस आया… और अब वह हमें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया है।”

सुरेंद्र कहते हैं, “पिछले कुछ दिन बहुत थकाने वाले रहे हैं। हमें अभी तक पूरी तरह समझ नहीं आया है कि क्या हुआ है। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे कोई बुरा सपना हो जिससे हम जाग नहीं पा रहे हैं। लेकिन मैं न्याय के लिए लड़ूगां। यह मेरा फर्ज है।”

परिवार का कहना है कि उन्हें पुलिस से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। अनुराधा कहती हैं, “जब हमने पुलिस से पूछा कि आरोपियों को जमानत कैसे मिली, तो हमें बताया गया कि ट्रक चालकों के विरोध प्रदर्शन के कारण भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(2) निलंबित है। अगर यह प्रावधान लागू होता, तो मेरे बेटे के हत्यारे आज भी जेल में होते।”

देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस के साथ बातचीत के बाद गृह मंत्रालय ने इस धारा के तहत घातक हिट-एंड-रन मामलों के लिए 10 साल के कारावास के प्रावधान को निलंबित करने पर सहमति जताई थी।

अनुराधा कहती हैं कि दुर्घटना से एक रात पहले रात के खाने के दौरान सार्थक के साथ उनकी आखिरी बातचीत हुई थी।

वह कहते हैं कि उनका बेटा सार्थक रात करीब 11 बजे घर आया और फोन पर बात कर रहा था। हम खाना खा रहे थे। उसने मुझसे कहा कि आप खाना खाइए। उसने मुझसे कहा कि उसे कल सुबह नोएडा के लिए जल्दी निकलना है। हमें जगाए बिना ही वह निकल गया। हमें अंतिम बातचीत करने का मौका भी नहीं मिला।

अनुराधा आगे कहती हैं कि वह हमेशा हमें गौरवान्वित करना चाहता था। इस त्रासदी ने परिवार के पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है।

बेटे के दुख में डूबे सुरेंद्र का कहना है कि जब वह 1984 में काम के सिलसिले में दिल्ली आए थे। उसी दौरान कश्मीरी पंडितों का घाटी से पलायन हो रहा था, तब श्रीनगर में उनके परिवार का पांच मंजिला घर जलकर राख हो गया था। वह कहते हैं कि हमने सब कुछ नए सिरे से बनाया है। वह कहते हैं कि मैं कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। अगर हम नहीं लड़ेंगे, तो यह एक और ऐसा मामला बन जाएगा जिसे लोग भूल जाएंगे।

सार्थक के कॉलेज के सहपाठी सूर्यांश का कहना है कि आरोपी की तस्वीर ढूंढना भी मुश्किल था। उसने अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट निष्क्रिय कर दिए थे। हमें एक तस्वीर ढूंढने के लिए भी बहुत मशक्कत करनी पड़ी।

पुलिस ने बताया कि थार गाड़ी बेंगलुरु स्थित एक निजी कंपनी के नाम पर पंजीकृत थी और इसे सागर साहा (29) को लीज पर दिया गया था, जो उसी कंपनी में कार्यरत था। पूछताछ के दौरान, साहा ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि दुर्घटना के समय उसका दोस्त अपूर्व एसयूवी चला रहा था और वह यात्री सीट पर बैठा था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसयूवी को घटना के एक दिन के भीतर ही जब्त कर लिया गया और आरोपी की पहचान कर ली गई। अधिकारी ने आगे कहा कि कानून के अनुसार मामला दर्ज किया गया और अदालत ने जमानत दे दी।

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