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वीकेंड पर 15% ज्यादा अकेलापन! ब्रिटेन की मिनिस्टर ऑफ लोनलिनेस बोलीं- समस्या दुनिया भर में

ब्रिटेन की मिनिस्टर ऑफ लोनलिनेस मिम्स डेविस का कहना है कि 'भारत में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है; हो सकता है कि वहां इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता और रिसर्च और स्थिति का आकलन नहीं किया जाता।

MIMS DAVISब्रिटेन की मिनिस्टर ऑफ लोनलिनेस।

इंसान एक सामाजिक प्राणी है और समाज और समुदाय में रहते हुए इंसानों ने तरक्की का लंबा सफर तय किया है। लेकिन अब तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में इंसान की इस सामाजिक प्राणी वाली छवि कुछ धूमिल हुई है। जिसका असर भी दिखने लगा है। बता दें कि लोगों को अकेलापन महसूस होने की समस्या सताने लगी है, जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ब्रिटेन में मौजूदा वक्त में करीब 90 लाख लोग अकेलेपन का शिकार हैं, जिनमें से 40 लाख लोग बुजुर्ग हैं। हालांकि अच्छी बात ये है कि ब्रिटेन की सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिया है और बाकायदा लोगों का अकेलापन दूर करने के उपाय सुझाने और उनको लागू करने के लिए एक मंत्रालय का गठन कर दिया है।

इस मंत्रालय की कमान मिम्स डेविस को सौंपी गई है। मिम्स डेविस से पहले ट्रेसी काउच इस जिम्मेदारी को निभा चुकी हैं। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में मिनिस्टरी ऑफ लोनलिनेस मिम्स डेविस ने बताया कि उनके मंत्रालय ने बीते माह एक कार्यक्रम लॉन्च किया है, जिसे ‘Let’s talk Loneliness’ नाम दिया गया है। इस कार्यक्रम के तहत ब्रिटेन की सरकार लोगों को आपस में बातचीत करने और अपनी भावनाओं का इजहार करने के लिए प्रेरित कर रही है। शहरों में स्थिति और भी खराब है। YouGov Research के एक सर्वे के अनुसार, 56% लोग और ग्रामीण इलाकों में 44% लोग अकेलेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। खास बात ये है कि साप्ताहांत में यह समस्या और बढ़ जाती है और रिसर्च के अनुसार, इसमें 15% की बढ़ोत्तरी हो जाती है।

अकेलापन एक भावनात्मक समस्या ही नहीं है, बल्कि इससे इंसान के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। कैंपेन टु एंड लोनलिनेस नामक संस्था, जो कि लोगों के बीच से अकेलेपन की समस्या को दूर करने के प्रयासों में लगी है, उसका कहना है कि अकेलेपन की समस्या दिन में 15 सिगरेट पीने के बराबर शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इससे मोटापे और आलस्यपन की समस्या भी घेर सकती है। इतना ही नहीं अकेलेपन की समस्या के चलते लोगों में हृदय संबंधी बीमारियां होने की आशंका भी काफी बढ़ जाती है।

गौरतलब है कि अकेलेपन की समस्या ना सिर्फ ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों की है, बल्कि अब यह पूरी दुनिया पर असर डाल रही है। ब्रिटेन की मिनिस्टर ऑफ लोनलिनेस मिम्स डेविस का कहना है कि ‘भारत में भी हालात बहुत अच्छे नहीं है; हो सकता है कि वहां इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता और रिसर्च और स्थिति का आकलन नहीं किया जाता, लेकिन वहां चाय के अड्डे और मोहल्ले में होने वाली बातचीत की संस्कृति है, जिससे लोगों को बातें करने का मौका मिलता है। हमारे यहां पर इसकी कमी है..सामाजिक अनुभव, पर्यावरण इसमें अहम रोल निभाता है, लेकिन आज अकेलेपन की समस्या वैश्विक है।’

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