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राज्यसभा उपचुनावः कौन हैं श्रेयमस कुमार, जिन्होंने केरल में हासिल की जीत? जानें

राज्यसभा की यह सीट उनके पिता और मीडिया हस्ती एम पी वीरेन्द्र कुमार की मृत्यु के कारण रिक्त हुयी थी।

Author तिरूवनंतपुरम | Updated: August 24, 2020 10:56 PM
M V Shreyams Kumarकेरल में सत्तारूढ़ वाम गठबंधन एलडीएफ की सहयोगी लोकतांत्रिक जनता पार्टी के अध्यक्ष एम वी श्रेयमस कुमार। (फाइल फोटो)

केरल में सत्तारूढ़ वाम गठबंधन एलडीएफ की सहयोगी लोकतांत्रिक जनता पार्टी के अध्यक्ष एम वी श्रेयमस कुमार सोमवार को यहां राज्यसभा की एक सीट के लिए हुए उपचुनाव में निर्वाचित घोषित किए गए। राज्यसभा की यह सीट उनके पिता और मीडिया हस्ती एम पी वीरेन्द्र कुमार की मृत्यु के कारण रिक्त हुयी थी।

केरल विधानसभा के सचिव और चुनाव अधिकारी एस वी उन्नीकृष्णन ने कहा कि कुमार को 88 मत मिले जबकि कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन के उम्मीदवार लाल वर्गीज कल्पकवडी को 41 वोट मिले।

वरिष्ठ समाजवादी वीरेन्द्र कुमार का 28 मई को 83 साल की उम्र में निधन हो गया था। मतदान यहां राज्य विधानसभा परिसर में हुआ। भाजपा के एकमात्र विधायक ओ राजगोपाल ने मतदान नहीं किया वहीं विधायक पी सी जॉर्ज के मत को अवैध घोषित कर दिया गया। कुल 136 सदस्यों में से 130 ने मतदान किया। छह विधायकों ने मतदान नहीं किया।

विधानसभा में सरकार के विरोध में यूडीएफ की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्तावः इसी बीच, केरल में पिनराई विजयन नीत वामपंथी सरकार के विरोध में विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने सोमवार को एक अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान विपक्ष ने राज्य सरकार पर सोने की तस्करी समेत कई आरोप लगाए।

कांग्रेस विधायक वी डी सतीशन ने यह कहते हुए प्रस्ताव पेश किया कि सोने की तस्करी करने वाले गिरोह ने मुख्यमंत्री कार्यालय को “हाईजैक” कर लिया है। सतीशन ने कहा, “मुख्यमंत्री जब प्रेस वार्ता में थे और कह रहे थे कि सरकार में सब कुछ ठीक है और वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, तब उनके पूर्व प्रधान सचिव से जांच एजेंसियां कई घंटे से पूछताछ कर रही थीं।”

उन्होंने कहा कि मंत्री और मुख्यमंत्री सोने की तस्करी के मामले में “सारा दोष निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पूर्व आईटी सचिव एम शिवशंकर के मत्थे मढ़ना चाहते हैं।” सोने की तस्करी के मामले के तार कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े होने के आरोपों के कारण राज्य सरकार को विपक्षी दलों कांग्रेस और भाजपा की कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा है। विजयन सरकार को सत्ता में आए चार साल हो गए हैं और इस दौरान पहली बार आए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन ने पांच घंटे का समय दिया है।

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