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पोस्ट पोल सर्वे: जाटों का हुआ रालोद से मोहभंग, जाटव और मुस्लिम के सहारे नहीं पार हो सकी गठबंधन की नैया

Post Poll Survey: लोकनीति-CSDS के सर्वे से पता चलता है कि अखिलेश-मायावती-अजीत सिंह के गठबंधन को सिर्फ यादव, जाटव और मुस्लिमों का अधिकांश वोट मिला है। जबकि, जाटों और गैर यादव पिछड़ी तथा गैर जाटव दलित जातियों ने दबाकर बीजेपी को वोट दिया है।

Author May 27, 2019 3:14 PM
लोकनीति और सीएसडीएस का पोस्ट पोल सर्वे आया है। इसमें बताया गया है कि कितनी प्रतिशत जातियों ने किसे वोट दिया। (फोटो सोर्स: पीटीआई और द इंडियन एक्सप्रेस फाइल पिक्स)

लोकसभा चुनाव परिणाम (Election Result 2019) के बाद आए यूपी के जनादेश ने जहां बीजेपी को बंपर बहुमत दिया, तो वहीं सपा-बसपा-रालोद गठबंधन को करारी शिकस्त देिलाकर राजनीतिक पंडितों को भौंचक्का कर दिया। उत्तर प्रदेश में मतदाताओं के फैसले ने साफ कर दिया कि सियासी जानकारों को अब प्रदेश के संदर्भ में चुनावी विश्लेषण की कसौटी कुछ और तय करनी होगी। क्योंकि, जातिगत अंकगणित के आधार पर जिस गठबंधन को सबसे ताकतवर माना जा रहा था, मतदाताओं ने उसका सारा समीकरण ध्वस्त कर दिया। ‘द हिंदू’ में छपे ‘लोकनीति-सीएसडीएस’ के पोस्ट पोल सर्वे से स्पष्ट है कि 2018 के जिस उपचुनाव (कैराना, गोरखपुर और फूलपुर जहां जातिगत समीकरण के आधार पर सपा और बसपा ने बीजेपी के खिलाफ जीत दर्ज की थी।) को नजीर मानकर गठबंधन को बीएसपी सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगे बढ़ाया था, वह 2019 के जनादेश में बुरी तरह फ्लॉफ साबित हुआ।

मतदान बाद लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे से साफ होता है कि पश्चिमी यूपी में जाट वोटरों का रालोद से मोहभंग गठबंधन को डेंट लगाने में बड़ी वजह साबित हुई है, जबकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में अगर गैर- यादव, गैर-जाटव और गैर-मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा तबका भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर अपना विश्वास जाहिर किया है। सर्वे पर गौर फरमाएं तो 2014 लोकसभा चुनाव से जाटों का बड़ा तबका चौधरी अजीत सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) से अपना नाता तोड़ चुका है। जाटों ने न सिर्फ सपा-बसपा के प्रत्याशियों बल्कि रालोद उम्मीदवारों को भी वोट नहीं दिया है। इस तबके का 91 फीसदी वोट बीजेपी के खाते में गया है।

सोर्स: ‘द हिंदू’ में छपे लोकनीति-CSDS का पोस्ट पोल सर्वे.

गठबंधन की दूसरी ताकत पिछड़ी जातियों का वोट माना जा रहा था। लेकिन, समाजवादी पार्टी का परंपरागत वोट बैंक यादव तथा मुस्लिम और बसपा का दलित वोटर भी अपने दम पर पार्टी की नैया पार नहीं लगा सके। जाटव, यादव और मुस्लिमों को छोड़ बाकी जातियों ने गठबंधन को बहुत कम वोट दिया है, जबकि इनका एक बड़ा हिस्सा बीजेपी पर अपना विश्वास जाहिर किया है। जाटव ने जहां गठबंधन को 75 फीसदी वोट दिया, वहीं, यादव ने 60 और मुसलमानों ने 73 फीसदी वोट दिया। बाकी का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी को गया है। इनमें 80% कुर्मी तथा कोइरी जातियों ने बीजेपी को वोट दिया, जबकि मात्र14 फीसदी ही इस समुदाय के लोग गठबंधन पर अपना विश्वास जाहिर किए। वहीं, गैट जाटव दलितों का वोट भी बंटा है। 48 फीसदी गैर-जाटव दलितों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया, जबकि 42% ने गठबंधन को वोट दिया। ओबीसी के 72 फीसदी मतदाता ने बीजेपी को वोट दिया। बाकी, सवर्ण जातियों में 82 फीसदी ब्राह्मण, 89 फीसदी राजपूत, 70 फीसदी वैश्य और 84 फीसदी अन्य सवर्ण जातियों ने बीजेपी के पाले में मतदान किया।

इन सबके बीच सबसे पीछले पायदान पर कांग्रेस खड़ी रही। उसे सवर्ण जातियों में ब्राह्मण का महज 6 फीसदी, राजपूत के फीसदी, वैश्य का थोड़ा ज्यादा 13 फीसदी, जाटों का 2 फीसदी यादोंव का 5 फीसदी, मुस्लिमों का 14 फीसदी और गैर जाट दलितों का 7 फीसदी वोट ही मिल सकता है। मुस्लिम, वैश्य को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस को अन्य जातियों का वोट प्रतिशत दहाई में भी नहीं पहुंच पाया है।

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