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Loksabha Election 2019: प्रियंका से सवाल पूछने के लिए पत्रकारों ने मांगी बोट, मिला जवाब- नदी में गिर गए तो? हम जिम्मेदारी नहीं ले सकते

Lok Sabha Election 2019: प्रियंका गांधी वाड्रा प्रयागराज से वाराणसी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान वह नाव से यात्रा कर रही हैं। प्रियंका गांधी की इस यात्रा की कवरेज पत्रकारों के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

priyanka gandhiकांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पार्टी प्रभारी प्रियंका गांधी नाव के जरिए यात्रा पर हैं। (Express file photo/ Javed raja)

Lok Sabha Election 2019: कांग्रेस महासचिव और पार्टी के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को प्रयागराज में लेटे हनुमान के दर्शन किए और विधिविधान से गंगा की आरती की। पूजा करने के बाद क्रूज बोट पर सवार प्रियंका ने अपनी प्रयागराज से बनारस की तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत की। प्रियंका का काफिला शहर से करीब 20 किमी दूर मनैया घाट पहुंचा जहां उन्होंने स्थानीय लोगों का अभिवादन किया और अपनी इस यात्रा के लिए क्रूज बोट पर सवार हो गईं। मनैया घाट पर प्रियंका का स्वागत करने बहराईच की पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले भी आई थीं। प्रियंका का कार्यक्रम मनैया घाट से दुमदुमा घाट, सिरसा, लाक्षागृह एवं मांडा जाने का है जहां वह स्थानीय नेताओं और लोगों से मिलेंगी। गांधी की इस यात्रा में छह संसदीय क्षेत्र- प्रयागराज, फूलपुर, भदोही, मिर्जापुर, चंदौली और वाराणसी शामिल हैं। उनकी तीन दिवसीय यात्रा 20 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में खत्म होगी।

प्रियंका की यात्रा को कवर करने के लिए निकले पत्रकारों के सामने कम बड़ी चुनौती नहीं है। प्रियंका के कार्यक्रम के ऐलान के बाद से ही पत्रकारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि कांग्रेस के अभियान की कवरेज कैसे की जाएगी? एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस सवाल का जवाब तो कांग्रेस के पास भी नहीं था। मीडियाकर्मियों के लिए स्टीमर के सवाल पर शुरुआत में कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि इंतजाम करने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, बाद में कांग्रेस नेताओं ने जवाब दिया, ‘हम बोट का इंतजाम कैसे कर सकते हैं…क्या होगा अगर आप नदी में गिर गए हो तो? हम जिम्मेदारी नहीं ले सकते।’

पत्रकार जब मनैया घाट पहुंचे तो उन्होंने पाया एक स्टीमर प्रियंका गांधी और कुछ अन्य लोगों के लिए तैयार थी। प्रियंका तयशुदा वक्त से 2 घंटे बाद करीब साढ़े 11 बजे पहुंचीं। लोगों के शोरशराबे होहल्ले के बीच वह एसपीजी कमांडोज की मदद से किसी स्टीमर में सवार हो गईं। प्रियंका की स्टीमर जैसे ही आगे बढ़ी, एक अन्य बोट उसके नजदीक पहुंची। किसी ने कहा कि यह बोट ही मीडिया के लिए है, ऐसे में दर्जनों पत्रकार उस बोट के लिए लपके। कुछ कांग्रेसी नेता भी उस बोट की ओर भागे। एनडीटीवी के पत्रकार भी कुछ कांग्रेस नेताओं संग उस बोट में सवार हो गए। बोट पर ऐसे हालात हो गए कि नाविक को कहना पड़ा कि कम से कम 20 लोगों को उतरना होगा। आखिर में इस बात की रजामंदी बनी कि सभी कांग्रेस नेता बोट से उतर जाएंगे। नेताओं को बेमन से उतरना पड़ा।

जब तक पत्रकारों की बोट चली, प्रियंका की स्टीमर काफी आगे जा चुकी थी। हालांकि, पत्रकारों की समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। बोट जैसे ही नदी के बीच पहुंची, इंजन बंद हो गए। पांच मिनट बाद नाविक ने बताया कि नाव बालू में फंस गई है क्योंकि पानी का स्तर नीचा है। पत्रकारों से कहा गया कि बोट आगे नहीं जा पाएगी, इसके बाद उन्हें वापस लेने के लिए एक छोटी बोट आई। 30 मिनट बाद एक छोटी बोट आई। इसके आधा घंटे बाद पत्रकार वापस किनारे पर लौट सके।

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