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लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी का ”न्‍याय”- रोज दस अरब रुपए बांटने का वादा, जानिए कैसे कर सकते हैं पूरा

Lok Sabha Election 2019 (लोकसभा चुनाव 2019): राहुल ने NYAY (Nyuntam Aay Yojana or basic income scheme) की घोषणा करते हुए कहा कि उन्‍होंने सब हिसाब-किताब लगा लिया है। इतना पैसा देश में उपलब्‍ध है। गरीबों की आय की न्‍यूनतम सीमा 12 हजार होगी।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश के 20 प्रतिशत गरीब परिवारों को सलाना 72 हजार रुपया देने का वादा किया। (Photo: PTI)

Lok Sabha Election 2019: कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने सबसे बड़ा चुनावी वादा NYAY (Nyuntam Aay Yojana or basic income scheme) कर डाला है। उन्‍होंने कहा है कि अगर कांग्रेस सत्‍ता में आई तो गरीब परिवारों को साल के 72 हजार रुपए दिए जाएंगे। देश के 20 फीसदी सबसे गरीब लोगों के बैंक खाते में सीधे यह रकम भेजी जाएगी। उन्‍होंने कहा कि इससे पांच करोड़ गरीब परिवारों और 25 करोड़ लोगों को गरीबी से ऊपर उठा दिया जाएगा। 5 करोड़ परिवारों को अगर 72 हजार रुपए दिए गए तो यह रकम 3600 अरब रुपए सालाना बनती है। यानी करीब दस अरब रुपए रोज के। भारत सरकार पहले से कर्ज के बोझ तले दबी है। 2017-18 भारत सरकार का कर्ज 251 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। दस साल पहले यह मात्र 80.3 लाख करोड़ था। सरकारी कर्ज और जीडीपी अनुपात काफी बढ़ गया है। उभरते बाजारों में यह अनुपात भारत से ज्‍यादा केवल ब्राजील का ही है।

वैसे नामुमकिन नहीं है वादा पूरा करना: कांग्रेस यदि अपने वादे के मुताबिक यदि 5 करोड़ गरीब परिवारों को 72 हजार रुपये देती है, तो कुल 3600 अरब रुपये देने होंगे।यूं कहें तो केंद्र सरकार द्वारा 2019-20 के बजट खर्च (27,84,200 करोड़ रुपये) का 13 प्रतिशत। मोदी सरकार द्वारा केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं के लिए जितनी रकम 2019-20 में रखी गई है, उससे थोड़ा ज्‍यादा। मोदी सरकार ने मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, नेशनल हेल्थ मिशन और नेशनल एजुकेशन मिशन सहित 29 योजनाओं के लिए 3,27,679.43 रुपए आवंटित किया है। राहुल का वादा पूरा करने के लिए जरूरी रकम जीडीपी के दो फीसदी के बराबर है। सरकार चाहे तो वित्‍तीय घाटा झेलते हुए या फिर कुछ अन्‍य स्‍कीम खत्‍म कर इस रकम का इंतजाम कर सकती है।

बीजेपी की प्रतिक्रिया: बीजेपी की राय में राहुल ने ऐसा वादा कर दिया जो चांद तोड़ लाने जैसा है। पर, असल में ऐसा नहीं है। सरकार अपने खर्च के लिए जरूरी बजट आवंटन बढ़ा सकती है और बढ़ाती रही है। वर्ष 2019-20 के लिए जो प्रस्तावित बजट खर्च 27,84,200 करोड़ रुपये है, वह भी वर्ष 2018-19 के बजट की तुलना में 3,26,965 करोड़ (13 प्रतिशत) ज्यादा है। जीएसटी सुधारों का पूरा लाभ मिलने के बाद सरकार के पास ज्‍यादा पैसा आने की भी संभावना है। सरकार के पास अच्‍छी-खासी रकम आयकर चोरी करने वालों को टैक्‍स दायरे में लाकर भी जुगाड़ने का विकल्‍प है।

पैसे देनेे का वादा करना पुराना चलन: बता दें कि राहुल ने मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी सरकार बनते ही किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था। पर, वह वादा अभी भी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। राहुल ने तब भी यह नहीं बताया था कि कर्जमाफी के लिए पैसे कहां से आएंगे और अभी भी यह नहीं बताया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत में इतना पैसा है। 20 प्रतिशत सबसे गरीब परिवारों को हर साल 72 हजार रुपए बैंक खाते में सीधे दिए जाएंगे। राहुल ने कहा कि उन्‍होंने सब हिसाब-किताब लगा लिया है। इतना पैसा देश में उपलब्‍ध है। गरीबों की आय की न्‍यूनतम सीमा 12 हजार होगी। उदाहरण के लिए अगर किसी की आय 6 हजार रुपए है तो सरकार उसे 6 हजार रुपए देगी। हमने विश्‍व के नामी अर्थशास्‍त्रियों से चर्चा की है। पी. चिदंबरम और अन्‍य अर्थशास्‍त्रियों की टीम इस पर काम कर रही है। वे इसकी डिटेल दे देंगे। राहुल ने यह भी साफ किया कि सरकार बिना कोई काम कराए लोगों के खाते में पैसे डालेगी।

पिछले चुनाव में थी 15 लाख की चर्चा: 2014 चुनाव के समय नरेंद्र मोदी ने विदेश में जमा कालाधन लाने का वादा करते हुए एक आंकड़ा दिया था कि वहां इतना पैसा है कि लाने के बाद सारे भारतीयों के खाते में 15-15 लाख रुपए दिए जा सकते हैं। वास्‍तव में यह वादा पूरा करना लगभग असंभव है और यह साबित भी हुआ। हालांकि, बाद में भाजपा के बड़े नेता ने ही उस वादे-दावे को चुनावी जुमला बता कर खारिज भी कर दिया। इस चुनाव से पहले मोदी सरकार ने किसानों के खाते में 6000 रुपए डालने की स्‍कीम शुरू की है। 2014 चुनाव के समय मनमोहन सरकार ने डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के नाम पर लोगों के खाते में गैस सब्‍सिडी की रकम सीधे डालनी शुरू की थी।

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