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लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, छाया रहा ‘धर्मांतरण’ का मुद्दा

लोकसभा का शीतकालीन सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सोलहवीं लोकसभा के इस तीसरे सत्र में हाल के वर्षो में रिकॉर्ड काम हुआ जिसमें 18 विधेयकों को मंजूरी दी गई। पिछल महीने की 24 तारीख से शुरू हुए इस सत्र के आज अंतिम दिन सुबह कार्यवाही शुरू होने पर कथित जबरन धर्मान्तरण के […]
Author December 23, 2014 18:12 pm
Masarat Release: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काह, “देश की एकता अखंडता के लिए जो भी जरूरी होगा उनकी सरकार करेगी।” (फ़ोटो-पीटीआई)

लोकसभा का शीतकालीन सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सोलहवीं लोकसभा के इस तीसरे सत्र में हाल के वर्षो में रिकॉर्ड काम हुआ जिसमें 18 विधेयकों को मंजूरी दी गई।

पिछल महीने की 24 तारीख से शुरू हुए इस सत्र के आज अंतिम दिन सुबह कार्यवाही शुरू होने पर कथित जबरन धर्मान्तरण के मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद बारह बजे पुन: कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाये और इस सत्र में सदन में हुए कामकाज का ब्यौरा देने के बाद सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

अध्यक्ष ने कहा कि सदन ने इस सत्र में 18 विधेयक पारित किये जो हाल के वर्षों में अपने आप में एक रिकॉर्ड है और इसके लिए वह पूरे सदन को बधाई देती हैं।
एक बार के स्थगन के बाद सदन के दोबारा बैठने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे। सदन के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने से पहले कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में मौजूद हैं इसलिए हम चाहते हैं कि वह कुछ कहें।

अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं देते हुए कहा, ‘‘मैं किसी को कुछ कहने की अनुमति नहीं दे रही हूं, माननीय प्रधानमंत्री जी को भी नहीं।’’ विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री द्वारा धर्मान्तरण के मुद्दे पर बयान दिये जाने का बार बार आग्रह किये जाने पर अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैंने बोला नहीं, तो नहीं।’’

इसके बाद उन्होंने इस सत्र के अपने विदाई उल्लेख में शीतकालीन सत्र के कामकाज का ब्यौरा रखा। उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 22 बैठकें हुई और लगभग 129 घंटे सदन ने कामकाज किया। राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम की धुन के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गयी।

सदन ने आतंकवादियों द्वारा पाकिस्तान में निर्दोष स्कूली बच्चों का नरसंहार करने और एक पाकिस्तानी अदालत द्वारा मुंबई की 26/11 की आतंकवादी घटना के आरोपी को जमानत पर छोड़े जाने की निंदा किये जाने से संबंधित दो संकल्पों को सर्वसम्मति से पारित किया।

इस सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, कपड़ा उपक्रम राष्ट्रीयकरण विधि संशोधन विधेयक, कोयला खान विशेष उपबंध विधेयक और मोटर यान संशोधन विधेयक सहित कई विधेयकों को चर्चा करने के बाद मंजूरी दी। इस सत्र में 440 तारांकित प्रश्नों में से 103 के मंत्रियों ने मौखिक उत्तर दिये और 5058 अतारांकित प्रश्नों के लिखित उत्तर सभा पटल पर रखे गये।

करीब एक महीने तक चले इस शीतकालीन सत्र में प्लास्टिक के खतरे और मनरेगा के बारे में आधे घंटे की विशेष चर्चा हुई और संसद की विभिन्न स्थायी समितियों ने 62 रिपोर्ट सदन में पेश कीं।

इसके अलावा ध्यानाकर्षण के द्वारा चार महत्पूर्ण मामले उठाये गये। इनमें श्रीलंका की नौसेना द्वारा तमिल मछुआरों का अपहरण और उत्पीड़न, देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट से उत्पन्न स्थित, जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में वृद्धि और नकली दवाओं का प्रचलन और उत्तर प्रदेश तथा देश के अन्य भागों इंसेफेलाइटिस के फैलने से उत्पन्न स्थिति शामिल हैं।

शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने लोकमहत्व के 684 मामले उठाये और नियम 377 के तहत भी 257 अन्य विषय उठाये गये।
नियम 193 के तहत सदन में चार अल्पकालिक चर्चायें हुई जिनमें विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करने, देश के विभिन्न भागों में प्राकृतिक आपदाओं, मनरेगा को कथित रूप से निष्प्रभावी किये जाने और धर्मान्तरण की कथित घटनाओं से उत्पन्न स्थिति के बारे चर्चा की। मंत्रियों ने विभिन्न महत्वूपूर्ण विषयों पर 36 बयान दिये।

सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने से पहले अध्यक्ष ने सदस्यों को क्रिसमस तथा नव वर्ष की शुभकामनायें देते हुए कहा, ‘‘मेरा विश्वास है कि नववर्ष एक मजबूत प्रजातंत्र तथा सक्षम भारत बनाने के लिए नयी उुर्जा लेकर आयेगा।’’

शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस, वामदल, राजद, जदयू और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल के सदस्य अध्यक्ष के आसन के निकट आ गये और धर्मान्तरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से बयान दिये जाने की मांग करते हुए नारे लगाने लगे। इस मुद्दे पर कई विपक्ष सदस्यों ने कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था जिसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अस्वीकार कर दिया।

इस सत्र के दौरान विभिन्न व्यवधानों और स्थगन के कारण सदन का तीन घंटे का समय बर्बाद हुआ। हालांकि सदन ने 17 घंटे से अधिक अतिरिक्त समय बैठक कर महत्वपूर्ण वित्तीय एवं अन्य कार्यों को निपटाया।

एक बजे सदन की बैठक जब पुन: शुरू हुई तो कांग्रेस के हनुमंत राव ने आसन से कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने उन पर प्रधानमंत्री के खिलाफ असंसदीय टिप्पणी करने तथा सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए बयान दिया था। उन्होंने मांग की कि आसन रिकॉर्ड देख कर यह बताए कि क्या उन्होंने प्रधानमंत्री के खिलाफ सचमुच ऐसे कोई आरोप लगाए हैं।

इस पर उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि यदि रिकॉर्ड में कुछ भी असंसदीय है तो उसे निकाल दिया जाएगा। लेकिन जब राव स्वयं और कांग्रेस के अन्य सदस्य उनकी मांग पर जोर देने लगे तो कुरियन ने कहा कि राव ने एक विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया है। यह नोटिस विचाराधीन है। इसी बीच, संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।

इसी दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ गए। उनके आने के बाद माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि पिछले पूरे सप्ताह सांप्रदायिक तनाव के मुद्दे पर विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री के बयान की मांग करते रहे थे। अब जबकि प्रधानमंत्री सदन में आ गए हैं तो उन्हें बयान देना चाहिए।

इसके बाद उप सभापति की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री ने ‘‘राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र दिल्ली विधि (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक 2014’’ चर्चा के लिए सदन में रखा। विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा में सभी दलों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया और बाद में सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

इसके बाद, सदन ने बेकार हो चुके 90 अधिनियमों को समाप्त करने वाले निरसन (संशोधन) विधेयक तथा भारतीय वित्तीय बाजार में स्थिरता और पारदर्शिता लाने के मकसद से भुगतान एवं निपटारा व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले संदाय एवं परिनिर्धारण प्रणाली (संशोधन) विधेयक को प्रवर समिति को भेजने के क्रमश: कानून मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली के प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित कर दिया।

सदन में इसके बाद सभापति के पारंपरिक संबोधन के बाद बैठक को राष्ट्र गीत की धुन बजाए जाने के पश्चात अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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