‘जो मामले कोर्ट में लंबित हों या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हों, उस पर बरतें चुप्पी और गोपनीयता’- स्पीकर ने संसदीय कमेटियों को हड़काया

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की यह चिट्ठी ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता शशि थरूर को सूचना प्रौद्योगिकी पर बनाई गई स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: August 26, 2020 8:09 AM
Lok Sabha Speaker, Om Birlaलोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला।

भाजपा और कांग्रेस के बीच हालिया समय में संसदीय कार्य समितियों की बैठकों से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर घमासान शुरू हुआ है। इस बीच लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की समितियों से कहा है कि वे कोर्ट में लंबित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा न करें और उनकी कार्यवाही को लेकर गोपनीयता सुनिश्चित करें।

स्पीकर ने मंगलवार को लिखे पत्र में कमेटियों के अध्यक्षों को ‘स्पीकर के निर्देश’ के निर्देश-55 की याद दिलाई। इसमें कहा गया है कि किसी भी समिति की कार्यवाही को गोपनीयता के साथ चलाया जाएगा और समिति के किसी भी सदस्य को यह अनुमति नहीं होगी कि वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समिति की कार्यवाही से जुड़ी कोई भी जानकारी प्रेस को दे दे। न ही वह समिति की किसी रिपोर्ट या फैसले की जानकारी सदन में पेश होने से पहले प्रेस को दे सकता है।

स्पीकर ने हा कि समितियों को लोकसभा के ‘रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस’ के नियम 270 पर भी ध्यान देना चाहिए। इसमें कहा गया है कि समिति के पास किसी भी व्यक्ति, दस्तावेज और रिकॉर्ड को तलब करने की ताकत होगी। हालांकि, सूबत के तौर पर अगर किसी व्यक्ति को या दस्तावेज को लाने पर सवाल उठता है, तो यह सवाल स्पीकर के सामने उठाया जाना चाहिए, जिसका फैसला अंतिम होगा।

सरकार नियम 270 के तहत यह कह कर किसी दस्तावेज को सामने लाने से इनकार भी कर सकती है कि उसकी गोपनीयता का खुलासा करने से राष्ट्र की सुरक्षा और उसके हितों को नुकसान पहुंच सकता है। बिड़ला ने यह भी कहा कि पारंपरिक तौर पर कमेटी को उन मामलों पर बैठक नहीं करनी है, जो कोर्ट में लंबित हैं।

गौरतलब है कि लोकसभा स्पीकर की ये चिट्ठी ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उन्हें पत्र लिखकर सूचना एवं प्रौद्योगिकी मामलों को देखने वाली स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। दुबे का आरोप था कि थरूर नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सांसद इस बात से नाराज थे कि थरूर ने फेसबुक को तलब करने के फैला बिना कमेटी से चर्चा के ही कर लिया। बता दें कि कुछ दिन पहले अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक और भारतीय जनता पार्टी के गठजोड़ को लेकर एक रिपोर्ट छपी थी।

बताया जाता है कि थरूर की ओर से इस बारे में जानकारी मिलने के बाद स्पीकर ने उन्हें फेसबुक को समन करने की अनुमति दे दी थी। इसी के मद्देनजर 2 सितंबर की दोपहर को स्टैंडिंग कमेटी फेसबुक के प्रतिनिधि को सुनेगी। इसमें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा से लेकर सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को रोकने के विषय पर सवाल होने की संभावना है।

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