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‘प्रधानमंत्री खुद जाकर देखें मराठवाड़ा में सूखे से पैदा हालात’

तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं, लेकिन आज वे सूखे के कारण आत्महत्या कर रहे हैं

Author नई दिल्ली | May 11, 2016 04:40 am
लोकसभा में गूंजा मराठवाड़ा में सूखे का मुद्दा। (PTI Photo)

देश के करीब 13 जिलों में पड़ रहे भयंकर सूखे से पैदा हालात पर लोकसभा में मंगलवार (10 मई) को चर्चा के दौरान राजग सरकार के घटक दलों सहित विपक्ष ने केंद्र सरकार से इस भयानक त्रासदी पर गंभीर पहल करने की जरूरत बताई और राष्ट्रीय जल नीति को मजबूत बनाने व प्रधानमंत्री से सूखाग्रस्त मराठवाड़ा का दौरा कर हालात का खुद जायजा लेने की मांग की।

शिवसेना के चंद्रकांत खैरे ने कहा कि मराठवाड़ा में केवल आठ फीसद पानी बचा है और लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया वर्ष 2015 में इस क्षेत्र में 1138 और इस साल अभी तक 392 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। उन्होंने लातूर की तरह मराठवाड़ा क्षेत्र में ट्रेन से पानी भिजवाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार उचित सूखा प्रबंधन नहीं कर पाई है। सूखे की वजह से हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि पानी को लेकर हिंसा होने लगी है और पुलिस की निगरानी में पानी की आपूर्ति की जा रही है।

खैरे ने सूखे के संबंध में केंद्रीय समिति बनाने, पीड़ित किसानों के सभी कर्ज माफ करने और उनके बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को खुद मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा करना चाहिए, जिससे प्रशासन भी हालात को सुधारने के लिए हरकत में आएगा।

नियम 193 के तहत सूखे पर चर्चा की शुरुआत करते हुए तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं, लेकिन आज वे सूखे के कारण आत्महत्या कर रहे हैं और स्थिति शोचनीय है। उन्होंने कहा कि हम सांसद एसी में बैठे हैं, पीने को शुद्ध पेयजल उपलब्ध है। लेकिन 30 करोड़ लोगों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। हमें मिल कर इस बारे में सोचना चाहिए।

बीजद के भृतुहरि महताब ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आज देश में 1100 बीसीएम पानी की मात्रा की जरूरत है, जबकि 2600 बीसीएम (अरब घन मीटर) पानी बारिश के जरिए उपलब्ध होता है। लेकिन देश की इस बारिश के पानी को संग्रहित करने की क्षमता मात्र 253 बीसीएम है। उन्होंने कहा कि बारिश के 90 फीसद पानी को संग्रह करने की व्यवस्था नहीं है और वे बेकार बह जाता है।

उन्होंने कहा कि जानी-मानी हस्तियां करोड़ों रुपए से होने वाली अपनी आय को कृषि से हुई आय बताकर आयकर से बच निकलती हैं। उन्होंने कहा कि बीज बनाने वाली एक कंपनी ने अपनी आय 230 करोड़ रुपए से ज्यादा दिखाई है और उसने इसे कृषि से हुई आय बताकर आयकर छूट हासिल की। उन्होंने कहा कि खेती से होने वाली आय में आयकर से छूट का प्रावधान किसानों के लिए किया गया था, लेकिन आज बड़ी बड़ी कंपनियां इसका दुरुपयोग कर रही हैं। उन्होंने इस छूट को समाप्त करने की मांग की।

महताब ने नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना के संबंध में कहा कि सबसे पहले 1858 में सर आर्थर थामस काटन ने यह विचार पेश किया था और इसमें कई खामियां थीं। इसीलिए इस पर आधारित परियोजना को तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया क्योंकि इस पर उस समय 11 लाख करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया था। उन्होंने इसके बजाय राज्य की अपनी नदियों को आपस में जोड़े जाने का सुझाव दिया।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के एपी जितेंद्र रेड्डी ने अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे को लेकर सदन में कुछ समय से हंगामा होने का जिक्र करते हुए कहा कि आम आदमी को इससे कोई मतलब नहीं है बल्कि वह रोजी रोटी की चिंता में घुला जा रहा है। रेड्डी ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वित्त मंत्री हर साल सदन में खड़े होकर बजट पेश करते हैं और इस साल उन्होंने 19 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया था। उन्होंने कहा कि देश की 130 करोड़ आबादी तक यह पैसा क्यों नहीं पहुंचता इसके बारे में सोचे जाने की जरूरत है। उन्होंने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग लाखों रुपए का सूट पहनते हैं लेकिन आम आदमी फटे कपड़ों में घूमने को मजबूर है।

माकपा के मोहम्मद सलीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे असम से लेकर केरल तक चुनावी दौरे कर रहे हैं, लेकिन बीच में मराठवाड़ा नहीं जाते जहां लोग सूखे और पानी की कमी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। इससे लोगों के अंदर रोष है। सरकार को युद्धकालीन परिस्थिति की तरह इस मामले में निपटना चाहिए। उन्होंने किसानों के कर्ज को पूरी तरह माफ करने की मांग की।

वाईएसआर कांग्रेस के राजमोहन रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार को युद्धस्तर पर इस समस्या से निपटना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से पोलावरम परियोजना को 2018 तक पूरा करने की प्रतिबद्धता पर कायम रहने की भी बात कही। राकांपा की सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के लातूर की भयावह स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार इस स्थिति से निपटने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने किसानों की खुदकुशी के साथ ही पानी की कमी की वजह से बच्चों की मौत के कई दर्दनाक वाकये भी गिनाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को छोड़ कर सभी दल एक स्वर में सरकार से मांग कर रहे हैं कि ‘कुछ तो कीजिए।’

सुप्रिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के सांसदों से इस विषय में बातचीत कर कुछ सुझाव सुने, लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने तो खत का जवाब तक नहीं दिया। राकांपा सांसद ने कृषि मंत्री से किसानों का पूरा कर्ज माफी करने की, प्रभावित बच्चों के परीक्षा शुल्क के साथ पूरे साल की पढ़ाई की फीस में भी छूट देने की मांग की।

भाजपा की प्रीतम मुंडे ने कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र अकसर सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित रहता है, ऐसे में हमें राजनीति करने के बजाय और यह सोचने के बजाय कि केंद्र की कहां कमी रही, इस दिशा में सोचना चाहिए कि सरकार क्या काम कर सकती है और किसानों को सूखे के संकट से कैसे निजात दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में ऐसी परिस्थितियों से निपटने में सही से भूमिका निभाई होती तो हालात आज ऐसे नहीं होते।

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