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कांग्रेस के दलित प्रेम पर चिराग पासवान का हमला, बोले- राहुल एससी-एसटी एक्ट पर साफ करें रुख

चिराग के अलावा रामविलास पासवान ने भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह को इस बाबत पत्र लिखा है।

लोजपा सांसद चिराग पासवान और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी।

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के सांसद और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने कांग्रेस के दलित प्रेम पर निशाना साधा है और कहा है कि एक हाथ से दोस्ती और दूसरे से दुश्मनी साथ-साथ नहीं चल सकती है। चिराग ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को एससी/एसटी एक्ट पर अपना रुख साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह बात अक्सर कहती है कि एनडीए सरकार दलित विरोधी है लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश का विरोध करती है।

चिराग ने कहा कि कांग्रेस एनजीटी अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस ए के गोयल की नियुक्ति का भी समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में राहुल गांधी सामने आकर एससी-एसटी एक्ट पर अपनी स्थिति साफ करें। बता दें कि चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अल्टीमेटम दिया है कि अगर 8 अगस्त तक एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश या संसद में बिल लाकर उसके पुराने स्वरूप को बहाल नहीं किया गया और एनजीटी अध्यक्ष पद से जस्टिस गोयल को नहीं हटाया गया तो उनकी पार्टी की ‘दलित सेना’ 9 अगस्त को दलितों के देशव्यापी आंदोलन का समर्थन करेगी और उसमें शरीक होगी।

चिराग के अलावा रामविलास पासवान ने भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह को इस बाबत पत्र लिखा है। बता दें कि 23 जुलाई को पासवान के घर पर एनडीए के करीब 25 दलित सांसदों ने बैठक की थी। इसमें तीन केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे। बैठक में सभी सांसदों ने एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून पर अध्यादेश लाने और सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में आरक्षण लागू करने पर चर्चा की। साथ ही एससी/एसटी एक्ट को कमजोर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस गोयल को हटाने पर सर्वसम्मति से फैसला किया। इस साल 20 मार्च को जस्टिस गोयल और जस्टिस यूयू ललित की खंडपीठ ने एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए फैसला सुनाया था कि किसी भी आरोपी को दलित अत्याचार के केस में प्रारंभिक जांच के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। इससे पहले केस दर्ज होने के बाद ही गिरफ्तारी का प्रावधान था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अगर किसी के खिलाफ एससी/एसटी उत्पीड़न का मामला दर्ज होता है, तो वो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकेगा।

जस्टिस गोयल 6 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और उसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें एनजीटी अध्यक्ष नियुक्त किया था। एनडीए सांसदों का तर्क है कि जस्टिस गोयल को एनजीटी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने से दलित समुदाय के बीच मोदी सरकार के प्रति संदेश नहीं गया है। दलित समुदाय को लगता है कि उनके अधिकारों पर कैंची चलाने वाले जज को सरकार ने रिवॉर्ड दिया है। दलितों की यह भावना आगामी चुनावों में एनडीए को नुकसान पहुंचा सकती है। इधर, दलित संगठनों ने 2 अप्रैल की तरह 9 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।

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