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बाइक की मंजूरी नहीं मिली तो शादी के लिए चलाई 100 किमी साइकिल, मंदिर में लिए 7 फेरे

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के 200 से ज्यादा देश लॉकडाउन हैं। भारत में भी 3 मई तक लॉकडाउन है। इस कारण बहुत से लोगों ने शादियां टाल दी हैं। जो भी रही हैं वह भी अजग-गजब ढंग से। दूल्हे की बारात में कहीं 5 लोग शामिल हुए, तो कहीं इत्र की जगह सैनिटाइजर डालकर बारातियों का स्वागत किया गया। माले की जगह बारातियों को मास्क पहनाए गए।

लॉकडाउन के कारण पुलिस ने दूल्हे को मोटरसाइकिल से अपनी ससुराल जाने की मंजूरी नहीं दी थी।

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के 200 से ज्यादा देश लॉकडाउन हैं। भारत में भी 3 मई तक लॉकडाउन है। इसके आगे भी लागू रहने की संभावनाएं दिख रही हैं। कोविड19 महामारी के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है। लोग अपने पूर्व में तय किए गए काम नहीं कर पा रहे हैं। भारत में चैत्र नवरात्र के बाद शादियां शुरू हो जाती हैं। अब चूंकि लॉकडाउन है इसलिए कई युवाओं के सपनों पर पानी फिर गया है। हालांकि, कुछ ने भी किसी भी कीमत पर हमसफर को पाने का संकल्प कर लिया है।

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भी एक ऐसा ही मामला देखने में आया है। यहां एक दूल्हे को पुलिस ने बाइक चलाने की मंजूरी नहीं दी तो वह 50 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपनी ससुराल पहुंचा। वहां से साइकिल पर बैठाकर ही अपनी दुल्हन को अपने गांव ले आया। गांव में पहुंचकर उसने मंदिर में सात फेरे लिए।

कलकू प्रजापति हमीरपुर के पौथिया गांव में रहते हैं। 27 अप्रैल को उनकी शादी महोबा के पुनिया गांव में रहने वाली युवती से होनी थी। कार्ड बंट चुके थे। विवाह की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। कलकू ने बताया, ‘लॉकडाउन के कारण शादी की तैयारी पर पानी फिर गया। मैंने न्यूजपेपर में पढ़ा कि एक दूल्हे ने अक्षय तृतीया के दिन कानपुर से आकर हमीरपुर के मंदिर में शादी की है। इसके बाद मैंने भी शादी की ठान ली।‘

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कलकू के मुताबिक, ‘मैं थाने गया। मैंने बाइक से महोबा जाने की इजाजत मांगी। लेकिन पुलिस ने नहीं दी। तब मैंने साइकिल से जाने की ठानी, जिससे रास्ते में कोई रोके नहीं। लॉकडाउन के कारण हाईवे पर सन्नाटा पसरा था। मैंने भी कहीं आराम नहीं किया और बिना रुके साइिकल चलाकर सीधे महोबा के पुनिया गांव पहुंचा। ससुराल वाले खुश हो गए। सास-ससुर ने आशीर्वाद दिया।’

कलकू ने बताया, ‘उसके बाद मैं दुल्हन को विदा कराकर साइकिल पर ही बैठाकर गांव लौट पड़ा। शाम 6 बजे गांव पहुंच गया। वहां ध्यानीदास आश्रम में हमने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और सात फेरे लिए। हम दोनों ने अपनी शादी को यादगार बनाने का सपना देखा था, लेकिन इस तरह हमारी शादी होगी। इसकी कल्पना भी नहीं की थी।’ कलकू और उनकी दुल्हन के गांव के बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर है।

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