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‘संसद में लगा दीजिए ताला’, वरिष्ठ पत्रकार का मोदी सरकार पर तंज, ट्रोल्स बोले- इसका इलाज योगी जी के पास है

कोरोना वायरस को देखते हुए किए गए बदलावों के चलते अब सदन में प्रश्नकाल नहीं होगा। जिसे लेकर विपक्ष के नेताओं समेत कई पत्रकारों ने सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी इसे लेकर एक ट्वीट किया है।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 3, 2020 11:30 AM
पुण्य प्रसून वाजपेयी ने ट्वीट कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज़ कसते हुए संसद में ताला लगाने की बात कही है। (file)

देश में कोरोना का प्रकोप थमने के नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच संसद का संसद का मानसून सत्र बुलाया गया है। महामारी को देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों के चलते अब सदन में प्रश्नकाल नहीं होगा। जिसे लेकर विपक्ष के नेताओं समेत कई पत्रकारों ने सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी ने भी इसे लेकर एक ट्वीट किया है।

पुण्य प्रसून वाजपेयी ने ट्वीट कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज़ कसते हुए संसद में ताला लगाने की बात कही है। वाजपेयी ने लिखा “बधाई… संसद सजेगी पर Question Hour नहीं होगा। अब संसद में ताला लगा दिजिए… जनता चाहती है” वरिष्ठ पत्रकार के इस ट्वीट पर यूजर्स उन्हें ट्रोल करने लगे। एक ट्रोल ने लिखा “संसद का ये सत्र आवश्‍यक विधायी कार्य के लिए बुलवाया जा रहा है। शून्यकाल में भी विभिन्‍न विषयों से सम्‍बंधित अति-आवश्‍यक एवं महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न पुछे जा सकते है। वहीं रही बात ताला लगाने की तो महाशय आप इसे कृपया कर अपने मुंह पर लगाईए नहीं तो सच में ही बहुत क्रांतिकारी हो जाएगा।”

एक ने लिखा “देशभक्त जनता तो चाहती है पैसो के लिए झुठ प्रोपागंडा और देश बेच देने वाले इटालियन गुलामों को गोली मारना चाहिए लेकिन गद्दार को भी गोली मारना कानुनन अपराध लेकिन उसी कानून को इस्लामिक जेहाद मानते नही है और कानुन कैसे मानेगे इसका मंत्र तो योगी जी के पास है।” परशुराम नाम के एक यूजर ने लिखा “आपको बेरोजगार होने का खतरा सता रहा है क्योंकि आपको फालतू की बहस सुनाकर चैनल को व्यस्त करके रखना है जबकि सबको पता है जिस घर का मुखिया योग्य और समझदार है सही समय पर उचित फैसला लेने में पूर्ण सक्षम है उस घर की छवी बहुत बेहतर होती है अयोग्य मुखिया पतन का कारण है।”

एक यूजर ने पुण्य प्रसून वाजपेयी का साथ देते हुए लिखा “अब संसद में भी नही पूछ सकते है ऐसे भारत देश की कल्पना किसी ने भी नही की होगी। ये लोकतंत्र की कीमत ये क्या जाने,हमारे स्वन्त्रता सेनानियों के त्याग बलिदान समर्पण ,से हमे ये लोकतंत्र मिला है।ये क्या जाने जिनका इसमें कोई योगदान ही नहीं।”

बता दें शून्य काल और अन्य कार्यवाही अनुसूची के अनुसार आयोजित की जाएगी। संसद के मानसून सत्र का आयोजन 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होगा। मानसून सत्र में भाग लेने वालों को आवश्यक कोरोनो वायरस प्रोटोकॉल का पालन करना होगा, जिसमें 72 घंटों के भीतर कोविड-19 का परीक्षण करना भी शामिल है।

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