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पासवान बोले- CAA पर पीछे हटने का सवाल नहीं, NRC से तो PM मोदी खुद कर चुके हैं इनकार, फिर बवाल क्यों?

रामविलास पासवान बोले- 7 मई 2010 को यूपीए सरकार ने एनपीआर की तैयारी के लिए एक प्रावधान और जोड़ दिया। आज उन्हीं में से कुछ लोग यह मुद्दा उठा रहे हैं जिन्होंने इस बीमारी को जन्म दिया।

Author नई दिल्ली | Published on: January 25, 2020 3:28 PM
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (PIB/PTI Photo)

देशभर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NPR) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) को लेकर हंगामा मचा हुआ है। इस मसले पर बड़ा बयान देते हुए एनडीए के बड़े नेताओं में शुमार केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि एनआरसी पर कदम पीछे खींचने का कोई सवाल ही नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने नागरिकता से जुड़े कानूनों को लेकर कई सवालों के जवाब दिए।

जेपी आंदोलन का किया जिक्रः शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन पर एक सवाल का जवाब देते हुए लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने कहा, ‘कोई आंदोलन अचानक शुरू होता है। उदाहरण के लिए 1974 का छात्र आंदोलन देखिए, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई गई थी, वह आंदोलन कई महीने चला था। छात्रों ने बसें जलाई और वह सबकुछ किया जो वह चाहते थे। एक दिन हमने जेपी से मिलकर उनसे आंदोलन का नेतृत्व करने की गुजारिश की। जेपी ने कहा कि तुम लोग तोड़फोड़ कर रहे हो इसलिए मैं नहीं जुड़ सकता। हमने फिर आग्रह किया तो उन्होंने कहा पहले नारा लगाओ- हमला चाहे जैसा होगा, हाथ हमारा नहीं उठेगा।’ उनसे मुलाकात के बाद हमें अहिंसा की ताकत समझ आई।

‘जो बीमारी लाए, वही हल्ला कर रहे’: सबसे पहले आपको मुद्दा समझना होगा। नागरिकता संशोधन अधिनियम, 1955 में 2003 में वाजपेयी सरकार ने संशोधन किया था। नागरिकता के लिए दस्तावेजों की जरूरत है। 7 मई 2010 को यूपीए सरकार ने एनपीआर की तैयारी के लिए एक प्रावधान और जोड़ दिया। आज उन्हीं में से कुछ लोग यह मुद्दा उठा रहे हैं जिन्होंने इस बीमारी को जन्म दिया। अब लोगों को भ्रमित किया जा रहा है कि यदि आप एनपीआर में अपने माता-पिता का जन्म स्थान और तारीख नहीं बताते हैं तो आप संदेह के घेरे में रहेंगे और उन्हें एनआरसी के लिए भेजा जाएगा। वो दावा कर रहे हैं कि इसके जरिये अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की नागरिकता चली जाएगी, जो सच नहीं है।

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PM कह चुके, अब और क्या चाहिए?: सच यह है कि कोई किसी की भी नागरिकता नहीं छीन सकता, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख-ईसाई, दलित या ब्राह्मण हो। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि एनआरसी का कोई प्रस्ताव नहीं है तो फिर यह भ्रम क्यों फैलाया जा रहा है? वह पूरे 5 साल भारत के प्रधानमंत्री रहेंगे, फिर इससे बड़ा सबूत और क्या चाहिए? विपक्ष का कहना है कि CAA को वापस लिया जाए लेकिन CAA और NRC का आपस में क्या कनेक्शन है? सरकार ने साफ कर दिया है कि आपके माता-पिता की जन्म तारीख और जन्म स्थान के बारे में जानकारी देना जरूरी नहीं है, यह वैकल्पिक है।

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