केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर जो हालिया बयान दिया था उसके बाद से उनकी बयानबाजी लगातार NDA सरकार की चिंता बढ़ा रही है। चिराग ने आरक्षण के मुद्दे पर कहा था कि आरक्षण कोई खैरात नहीं बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे दुनिया की कोई ताकत खत्म नहीं कर सकती। चिराग ने उसके बाद से बिहार की कानून व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। यहां तक कि जीतन राम मांझी के साथ तो उनकी खुल्लम खुल्ला जुबानी जंग चल रही है।

हाल के दिनों में चिराग ने बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर अपने ही गठबंधन सरकार पर लगातार सवाल उठाए हैं। उनके हालिया बयानों को महज अचानक सामने आई नाराजगी के बजाय एक व्यापक राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि चिराग पासवान की LJP (रामविलास) केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA की सहयोगी है और लोकसभा में उसके पांच सांसद हैं। बिहार में भी LJP एनडीए की सहयोगी है, जहां उसके 19 विधायक हैं।

चिराग के बिहार में NDA सरकार पर दिए हालिया बयान

चिराग पासवान ने हाल ही में बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर NDA सरकार पर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें “बिहार NDA सरकार का हिस्सा होने में शर्म आती है” क्योंकि महिलाएं अब अपने घरों से बाहर निकलने में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। चिराग का यह बयान जमुई छेड़छाड़ और समस्तीपुर यौन उत्पीड़न की घटना को लेकर था। चिराग के इस बयान पर जीतन राम मांझी ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर इतनी ही शर्म आती है तो बयानबाजी के बजाय आगे की ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

चिराग की पार्टी के नेता भी दिखा रहे ‘तेवर’

बिहार की NDA सरकार के खिलाफ बयानबाजी में सिर्फ चिराग पासवान ही नहीं बल्कि उनकी पार्टी के नेता भी पीछे नहीं हैं। LJP (RV) के नेताओं का कहना है कि गठबंधन में शामिल होने का मतलब सरकार के हर फैसले का समर्थन करना नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, सहयोगी दलों को अपने मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाने का अधिकार होना चाहिए।

‘हमारे पास 19 विधायक हैं’

चिराग के करीबी माने जाने वाले नेता ने कहा है, “NDA के छोटे सहयोगियों के बीच हमें मुखर रहना होगा क्योंकि हम अपने वोटरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार में हमारा एक रास्ता होना चाहिए क्योंकि हमारे पास 19 MLA हैं। जब जमुई जैसी घटनाएं होती हैं, तो हमें रास्ता सुधारने के लिए बोलना चाहिए। इसलिए सरकार के कामकाज में उसकी बात सुनी जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि कुछ पुरानी मांगें भी अभी तक पूरी नहीं हुई हैं।”

यूपी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है LJP?

चिराग पासवान और उनकी पार्टी के हालिया बयानों ने NDA की चिंता बढ़ा दी है। उनके बयान कहीं न कहीं यूपी चुनाव की ओर इशारा कर रहे हैं। चिराग की पार्टी की मौजूदा राजनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश भी है। LJP (RV) 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में अपना संगठन मजबूत करने की तैयारी कर रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, संगठन पूर्वांचल और उससे जुड़े इलाकों में बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।

प्रयागराज में चिराग पासवान की हालिया रैली को भी पार्टी के इसी विस्तार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। LJP (RV) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनीत सिंह के मुताबिक, पार्टी पिछले दो वर्षों से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘यूथ बोले तो’ जैसे आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए पार्टी युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने पर ध्यान दे रही है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में संभावित गठबंधन को लेकर पार्टी ने अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।

चिराग की नाराजगी से ही राजनीति में बनी उनकी अलग पहचान

चिराग पासवान की राजनीति में गठबंधन के भीतर रहते हुए इस तरह की नाराजगी कोई पहली बार नहीं है। गठबंधन में रहते हुए स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की कोशिश वह पहले भी कर चुके हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने NDA से अलग होकर चुनाव लड़ा था और मुख्य रूप से तत्कालीन सहयोगी JD(U) और नीतीश कुमार को निशाना बनाया था। उस चुनाव में LJP को केवल एक सीट मिली, लेकिन उसके प्रदर्शन ने JD(U) के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित किया।

बाद में LJP में विभाजन हुआ और चिराग के नेतृत्व में LJP (RV) ने अपने पारंपरिक पासवान वोट आधार को मजबूत करने पर ध्यान दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी सीटें जीत लीं। इस प्रदर्शन के बाद NDA में चिराग पासवान की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई।

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