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सैयद रिजवान ने कहा- मैं रामभक्‍त हूं अंसार रजा, तुम्‍हारे सीने पर पैर रख कर मंदिर बनेगा

मीडिया में राम मंदिर पर फिर से बहस का दौर शुरू हो गया है। साथ ही यह भी बहस तेज हो गई है कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर बन जाएगा?
अयोध्या का एक राम मंदिर (Photo: PTI)

अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने आज (08 फरवरी) से अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि यह पूर्णत: जमीन विवाद है। चीफ जस्टिस ने कोर्ट में रखी गई 42 किताबों का अंग्रेजी अनुवाद दो हफ्तों के भीतर देने को कहा है। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 14 मार्च को तय की है। हो सकता है कि 14 मार्च से मामले में कोर्ट रोजाना सुनवाई करे। मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्‍दुल नजीर की बेंच 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। इधर मीडिया में राम मंदिर पर फिर से बहस का दौर शुरू हो गया है। साथ ही यह भी बहस तेज हो गई है कि क्या 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर बन जाएगा? न्यूज 18 इंडिया के लाइव डिबेट शो आर-पार में आज इसी मुद्दे पर बहस का आयोजन किया गया था।

शो के एंकर और होस्ट अमिश देवगन ने जब बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा से पूछा कि क्या राम लला का वनवास खत्म होगा? इस पर चर्चा में अपनी बात रखते हुए पैनलिस्ट और मुस्लिम चिंतक सैय्यद रिजवान अहमद ने कहा कि अयोध्या में जल्द ही राम लला विराजमान होंगे और भव्य श्रीराम मंदिर बनेगा। रिजवान के इस दावे पर गरीब नवाज़ फाउंडेशन के मौलाना अंसार रजा ने आपत्ति जताई और कहा कि राम के नाम पर दुकानें चलानी बंद करो। इसके जवाब में रिजवान ने कहा कि संबित पात्रा के इस बयान को मैं काटता हूं कि इस पैनल में कोई राम भक्त नहीं है।

रिजवान ने कहा, “मैं डॉ. सैय्यद रिजवान अहमद राम भक्त हूं और राम भक्त रहूंगा। मुझे अल्लाह और राम में कोई अंतर समझ में नहीं आता।” इस पर अंसरा रजा ने कहा कि संबित पात्रा कान पकड़कर माफी मांगिए क्योंकि आपने रिजवान को राम भक्त नहीं कहा। संबित ने चुटकी ली कि सभी रामभक्त हैं तो मंदिर बनवा देते हैं। इस पर अंसार रजा ने विरोध जताया तो रिजवान अहमद ने फिर कहा, “अंसार रजा, मोदी रहे या योगी रहे या फिर कोई और रहे। तुम्हारे सीने पर पैर रखकक मंदिर बनेगा, यह तुम देख लेना।”

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  1. Nitin Deolekar
    Feb 8, 2018 at 10:01 pm
    रोम-मध्ये येशूला स्वतःला सिद्ध करावे लागत नाही?? मक्का-मदिना-मध्ये अल्लाला स्वतःला सिद्ध करावे लागत नाहीच नाही!! १०० कोटी हिंदूंच्या भारतात मात्र गेली ७० वर्षे रामाची सतत अग्नी-परीक्षा चालूच आहे!! कारण सेक्युलर अति-शहाणे नेहरू आंबेडकर यांचे माजलेल्या समाजवादाचे अतिरेकी कायदे?? ढोंगी सेक्युलर-सैतानांना जराही लाज-लज्जा नाही?? स्वतःला फार सेक्युलर समाजवादी समजणाऱ्या नेहरूंना आणि नेहरूंचा हवी तशी घटना लिहून महान बनलेल्या आंबेडकर सायबाला साधा समान नागरी कायदा सुद्धा करता आला नाही?? त्यामुळेच शाह बानो सारख्या लाखो मुस्लिम माता-भगिनींवर घन-घोर अन्याय झाला. गरीब मुस्लिम तरुण आयसिस विचारानं बळी पडतो आहे. मुस्लिमाना पाकिस्तान भूमी दिल्यावर हिंदूसाठी उरलेल्या भारतात मुस्लिम लोकसंख्या वाढते आहे!! आता पुढील ७० वर्षे बुद्ध-आंबेड्करचा हिंदू कायदा उलट करण्याची गरज आहे! मुस्लिमाना १-पत्नी-१-अपत्य कायदा करा. हिंदूंना २-शादी लेखी तलाक. ७० वर्षांनंतर समान नागरी करा! मदरसे शिक्षण बंद करा. सरकारी शाळेत एकत्र शिकवा. मुलींना सानिया मिर्झाकडून टेनिस शिकवा! खाबंदी आपोआप होईल! मुस्लिम महिलांचे भले होईल.
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