टीएमसी से बगावत करने वाले सांसदों की लिस्ट सामने आ गई है। सूत्रों के मुताबिक, दावा किया गया है कि इस लिस्ट में 19 सांसदों ने अपने नाम के आगे दस्तखत किए हैं। इन सांसदों ने टीएमसी से अलग गुट बनाने की मांग को लेकर लोकसभा स्पीकर के दफ्तर को 18 मई को पत्र लिखा था।
इस लिस्ट में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सयानी घोष और यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। ये सभी एक वक्त में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं।
| क्रम संख्या | नाम |
| 1 | काकोली घोष दस्तीदार |
| 2 | शताब्दी रॉय |
| 3 | बापी हलदर |
| 4 | डॉ. शर्मिला सरकार |
| 5 | प्रसून बंद्योपाध्याय |
| 6 | जगदीश बर्मा बसुनिया |
| 7 | असित कुमार मल |
| 8 | अरूप चक्रवर्ती |
| 9 | रचना बनर्जी |
| 10 | सायोनी घोष |
| 11 | खलीलुर्रहमान |
| 12 | अबू ताहिर खान |
| 13 | यूसुफ़ पठान |
| 14 | मिताली बैग |
| 15 | माला रॉय |
| 16 | कालीपद सोरेन |
| 17 | दीपक अधिकारी |
| 18 | जून मालिया |
| 19 | पार्थ भौमिक |
तीन सांसदों ने छोड़ी पार्टी
बृहस्पतिवार को टीएमसी में संकट तब और गहरा गया था जब राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने सदन और पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। एक हफ्ते के भीतर पार्टी छोड़ने वाले वह तीसरे सांसद हैं। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने भी पार्टी छोड़ दी थी। इस्तीफे के बाद बराइक ने कहा, ”मैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसार काम करूंगा। मैं उस जगह के लोगों के लिए काम करना चाहता हूं, जहां से मैं आता हूं।”
मुश्किलों के बीच ममता को मिला समर्थन
दूसरी ओर, शत्रुघ्न सिन्हा, बाबुल सुप्रियो और सौगत रॉय जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह मुश्किल समय में टीएमसी प्रमुख का साथ नहीं छोड़ेंगे।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल से तृणमूल सांसद सिन्हा ने इंटरव्यू में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हो सकता है कि कुछ लोगों ने मजबूरी, डर या लालच की वजह से ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया हो, लेकिन उनका सैद्धांतिक रुख यह है कि वह न तो पार्टी का साथ छोड़ेंगे और न ही अपनी नेता का।’
सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे। उन्होंने बृहस्पतिवार को X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर बधाई भी दी, जिससे तमाम तरह की अटकलें लगने लगी।
इसी तरह, राज्यसभा सदस्य बाबुल सुप्रियो ने स्पष्ट किया कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं। टीएमसी की लोकसभा सदस्य प्रतिमा मंडल ने भी किसी बागी गुट का हिस्सा होने से इनकार किया। वहीं, टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने कहा कि उन्हें भी पार्टी से कुछ शिकायतें हैं, लेकिन डूबते हुए जहाज को छोड़ना नैतिकता नहीं है। उन्होंने पार्टी के लिए मौजूदा हालात को मुश्किल बताया।
कल्याण बनर्जी ने दिखाए तेवर
टीएमसी की सबसे तीखी आलोचना लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने की। कल्याण ने बृहस्पतिवार को ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनके जैसे अनुभवी नेताओं में से किसी एक को चुनें। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण ने यह भी घोषणा की कि वह अभिषेक बनर्जी से संबंधित सभी कानूनी मामलों और अदालती याचिकाओं से खुद को अलग कर लेंगे।
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4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक पतन की पटकथा लिखी जाने लगी। टीएमसी एक ऐसी पार्टी जिसकी स्थापना आज से 28 साल पहले हुई थी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
