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शोध: ऐसे सुलझी गणित की 50 साल पुरानी गुत्थी

गणित की एक विशेष शाखा टोपोलॉजी में मैथेमेटिकल नॉट्स (गणितीय गांठें) एक विषय है। टोपोलॉजी की पढ़ाई में यह जाना जाता है कि कोई वस्तु कैसे बिना तोड़े, बिगाड़े, घुमाई और फैलाई जा सकती है। टोपोलॉजी की ही एक शाखा नॉट थ्योरी है। टेक्सास विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाली लीसा ने सुलझाई गुत्थी। कॉन्वे’ज नॉट (गांठ) के सवाल को ब्रिटेन के गणितज्ञ जॉन होर्टन कॉन्वे ने 1970 में पेश किया था।

Author Published on: June 30, 2020 4:49 AM
Lisa Pichirillo, Texas University, 50-year old math trickअमेरिका के टेक्सास यूनिवर्सिटी की छात्रा लीसा पिचिरिल्लो ने गणित की 50 साल पुरानी एक गुत्थी सुलझा ली

अमेरिका की एक छात्रा ने गणित से जुड़े 50 साल पुराने एक सवाल को एक सप्ताह से भी कम समय में हल कर दिया। लीसा पिचिरिल्लो टेक्सास विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने बहुचर्चित ‘कॉन्वे’ज नॉट प्रॉब्लम’ को हल कर लिया। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कैमर गोर्डोन से उसने अपनी गणना के बारे में बताया। प्रोफेसर कैमर खुद भी एक गणितज्ञ हैं।

‘कॉन्वे’ज नॉट’ (गांठ) के सवाल को ब्रिटेन के गणितज्ञ जॉन होर्टन कॉन्वे ने 1970 में पेश किया था, लेकिन लीसा ने इस गुत्थी के बारे में पहली बार 2018 में एक संगोष्ठी में सुना था। प्रोफेसर गॉर्डन कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता है कि उसे मालूम था कि यह कितनी पुरानी और प्रसिद्ध पहेली है।’ लीसा के काम को इस साल की शुरुआत में ‘एनल्स आॅफ मैथेमेटिक्स’ जर्नल में प्रकाशित किया गया था और इस गुत्थी को हल करने के बाद उन्हें मैसाच्युसेट्स इंस्टिट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) में असिस्टेंट प्रोफेसर बनाया गया। ‘कॉन्वे’ज नॉट’ गुत्थी लंबे समय से अनसुलझी हुई थी और बहुत प्रसिद्ध गणितज्ञों ने इसको हल करने की कोशिशें की थीं।

गणित की एक विशेष शाखा टोपोलॉजी में मैथेमेटिकल नॉट्स (गणितीय गांठें) एक विषय है। टोपोलॉजी की पढ़ाई में यह जाना जाता है कि कोई वस्तु कैसे बिना तोड़े, बिगाड़े, घुमाई और फैलाई जा सकती है। वास्तविक जीवन के उदाहरण से अलग एक गणितीय गांठ के दोनों सिरे जुड़े होते हैं। असल में एक साधारण गांठ एक अंगूठी की तरह होती है और जिसे कभी खोला नहीं जा सकता है। लेकिन इसमें यह बेहद जटिल थी, क्योंकि इसमें गांठ कई जगहों पर एक दूसरे के ऊपर से गुजरती थीं।

विज्ञान के कई क्षेत्रों में टोपोलॉजी की खास अहमियत है और वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल कई तरह से करते हैं। बाजार के व्यवहार से लेकर डीएनए मॉलिक्यूल के आकार को दिखाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। इस गुत्थी को पेश करने वाले ब्रिटेन के गणितज्ञ जॉन होर्टन कॉन्वे की अप्रैल में 82 वर्ष की आयु में कोविड-19 से मौत हो गई थी। लिवरपूल में पैदा हुए शिक्षाविद जॉन को प्रभावशाली और करिश्माई गणितज्ञ माना जाता है। उन्होंने कैंब्रिज और प्रिंसटन जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में काम किया था।

लीसा ‘कॉन्वे’ज नॉट’ की पहेली को सुलझाने में लगी थीं, जिसमें 11 घुमाव या गांठें थीं, जो उसे ‘सिबलिंग नॉट’ जैसा बना रहा था। सिबलिंग नॉट के अध्ययन को साबित करना कम जटिल होता है। सिबलिंग नॉट पर काम करते हुए हुए उन्होंने उस अध्ययन में जो पाया उन्होंने वो कॉन्वेज नॉट पर लागू किया। लीसा के मुताबिक, ‘मैं इस पर पूरा दिन काम नहीं करती थी, क्योंकि मैंने इसे असली गणित जैसा नहीं माना था। मैं इसे अपने होमवर्क की तरह देखती थी। मैं घर जाती थी और यह करती थी।’

लीसा ने बॉस्टन कॉलेज में गणित की पढ़ाई की। 2013 में ग्रैजुएशन की पढ़ाई के दौरान उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए नेशनल साइंस फाउंडेशन की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता को जीता। बॉस्टन कॉलेज अखबार से लीसा की प्रोफेसर एलिसेंडा ग्रिब्सी ने कहा, ‘जब उन्होंने शुरुआत की थी तब नॉट थ्योरी में उनका कोई अध्ययन नहीं था और न ही लीनियर अलजेब्रा को छोड़कर उनकी गणित की ट्रेनिंग थी। लेकिन एक सप्ताह के अंदर उन्होंने सफलतापूर्वक गणना करनी शुरू कर दी जिसने कई छात्रों को झटका दिया।’

लीसा का कॉन्वेज नॉट को सफलतापूर्वक सुलझाना गणित के क्षेत्र में करियर बनाने में मदद करेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में लैंगिक अंतर आना शुरू हो गया है। अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कंप्यूटर और गणित के पेशे में 26 फीसद महिलाएं शामिल हैं।

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