कर्नाटक भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां शराब पर लगने वाले टैक्स का सिस्टम बदल दिया गया है। अब शराब की बोतल की कीमत के आधार पर टैक्स नहीं लगाया जाएगा बल्कि बोतल में मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर टैक्स तय होगा।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए आबकारी नीति में यह बड़ा बदलाव किया है। सरकार का तर्क है कि इससे शराब की कीमतों को ज्यादा संतुलित बनाया जा सकेगा और दूसरे राज्यों के मुकाबले कीमतों में समानता आएगी।

क्या बड़ा बदलाव हो रहा है?

राज्य सरकार के मुताबिक, कंपनियां अब बाजार की मांग और शराब की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए अपने प्रोडक्ट की कीमत और ब्रांडिंग तय कर सकेंगी। एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि इंडियन मेड लिकर की कैटेगरी को 16 स्लैब से घटाकर 8 कर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि इस बदलाव के बाद कर्नाटक में शराब की कीमतें तमिलनाडु, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के मुकाबले कम या बराबर हो सकती हैं। जानकारों के मुताबिक, इससे सीमा पार जाकर शराब खरीदने की प्रवृत्ति में भी कमी आ सकती है।

Alcohol by Volume मॉडल

राज्य सरकार ने जोर देकर कहा है कि एबीवी (Alcohol by Volume) मॉडल शराब पर टैक्स लगाने का सबसे आधुनिक तरीका है। इससे उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा।

नए टेक्स सिस्टम से फायदा?

जानकार यह भी मानते हैं कि कर्नाटक में अब तक शराब की कीमत तय करने में सरकार की बड़ी भूमिका रहती थी। लेकिन अगर यह नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो सरकार का नियंत्रण कुछ कम होगा और कंपनियां बाजार की मांग तथा शराब की गुणवत्ता के आधार पर अपने प्रोडक्ट की कीमत तय कर पाएंगी।

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