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कांग्रेस-जेडीएस में दरार पैदा करने बीजेपी की नई चाल, लिंगायतों को अल्पसंख्यक दर्जा देने पर खेला ये दांव

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मांगे अभी भी मंत्रालय में विचाराधीन हैं लेकिन चूंकि सरकार में नई सरकार चुनकर आई है, इसलिए सुझाव दिया गया है कि इन दोनों प्रस्तावों पर फिर से ताजा प्रस्ताव मंगाया जाय ताकि मांगों के संबंध में मंत्रालय आगे की कार्रवाई कर सके।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमरस्वामी और राज्य के उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर। (फोटो-PTI)

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठजोड़ से बनी तीन दिन पुरानी एचडी कुमारस्वामी सरकार ने शुक्रवार (25 मई) को विधान सभा में बहुमत साबित कर दिया है लेकिन उसी दिन बीजेपी की केंद्र सरकार ने इस गठबंधन में दरार डालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कर्नाटक की पिछली सरकार द्वारा भेजे गए दो प्रस्तावों को वापस भेज दिया है और फिर से नई सरकार द्वारा इसकी संस्तुति कराने को कहा है। बता दें कि कर्नाटक विधान सभा चुनावों से कुछ हफ्ते पहले कांग्रेस की सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने और राज्य के लिए अलग झंडा की अनुमति देने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया था। चुनाव पूर्व कर्नाटक सरकार के इस फैसले को चुनावी हथकंडे के तौर पर देखा गया था। तब केंद्र सरकार इन दोनों फाइलों पर कुंडली मार कर बैठ गई थी। अब राज्य में नई सरकार बनते ही केंद्र ने गेंद को फिर से राज्य सरकार के पाले में डाल दिया है।

अब राज्य में गठबंधन की सरकार है। ऐसे में कोई भी नीतिगत फैसला दोनों दलों की समन्वय समिति द्वारा एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत होना है। कांग्रेस की कोशिश रही है कि राज्य के लिए अलग झंडा और लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए लेकिन जेडीएस इसका विरोध करती रही है। ऐसे में यह मामला उलझता हुआ नजर आ रहा है। उधर लिंगायत वोट बैंक पर पारंपरिक रूप से बीजेपी का कब्जा रहा है। बीजेपी को इस बात का डर सताता रहा है कि अल्पसंख्यक दर्जा देने से कांग्रेस इसका फायदा उठा सकती है। लिहाजा, बीजेपी ने मामले को सियासी उलझन में फंसाना बेहतर समझा।

हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मांगे अभी भी मंत्रालय में विचाराधीन हैं लेकिन चूंकि सरकार में नई सरकार चुनकर आई है, इसलिए सुझाव दिया गया है कि इन दोनों प्रस्तावों पर फिर से ताजा प्रस्ताव मंगाया जाय ताकि मांगों के संबंध में मंत्रालय आगे की कार्रवाई कर सके। बता दें कि हालिया कर्नाटक विधान सभा चुनावों में 104 सीट के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन बहुमत न होने की वजह से येदियुरप्पा की सरकार ढाई दिन में ही गिर गई थी। 78 सीटें जीतकर कांग्रेस दूसरे और 37 सीटें जीतकर जेडीएस तीसरे नंबर पर आई थी लेकिन कांग्रेस के सहयोग से जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने।

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