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पीएम की तारीफ करने वाले जज ने सुप्रीम कोर्ट में चुटकी लेकर कसा आलोचकों पर तंज, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी कर रहे थे बहस

ये सुनवाई दिल्ली में खान मार्केट के पास 'लर्निंग ट्री’ नाम के एक प्ले स्कूल को सील करने के सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हो रही थी।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 29, 2020 10:16 AM
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा। (Indian express)

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने शुक्रवार को एक सम्मेलन में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करने के लिए उनकी आलोचना करने वालों पर कटाक्ष किया। न्यायाधीश ने कहा कि उनके पास कई अन्य लोगों के बारे में कहने के लिए अच्छी चीजें हैं लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए, ताकि वह फिर से आलोचना करें। न्यायमूर्ति मिश्रा का यह अवलोकन एक सुनवाई के दौरान आया। ये सुनवाई दिल्ली में खान मार्केट के पास ‘लर्निंग ट्री’ नाम के एक प्ले स्कूल को सील करने के सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हो रही थी।

लर्निंग ट्री स्कूल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी पेश हुए। सिंघवी ने कहा कि यह लुटियंस दिल्ली का एकमात्र प्ले स्कूल है जो 25 वर्षों से चल रहा है और इसके बंद होने से कई बच्चे प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि ये स्कूल टेंट में चलता है और इसमें कोई निर्माण नहीं किया गया है।

पीठ में न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता भी थे। हालांकि आखिरी में पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। कार्यवाही के अंत में न्यायमूर्ति मिश्रा ने सिंघवी से पूछा, “क्या आप अपने बारे में कुछ अच्छा सुनना चाहते हैं? मेरे पास आपके लिए कुछ अच्छे शब्द हैं।”

जब सिंघवी ने जवाब दिया कि यह उनके लिए एक सम्मान की बात होगी, तो मुस्कुराते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “लेकिन अगर मैं आपके लिए अच्छे शब्दों का उपयोग करता हूं तो अन्य लोग मुझे दोषी ठहराएंगे।”

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने बुधवार को न्यायमूर्ति मिश्रा के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ़ की थी। एससीबीए ने न्यायाधीशों से इस तरह के बयान देने या राजनीतिक कार्यकारिणी के साथ निकटता दिखाने से न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह किया था। दो सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले मिश्रा ने मोदी को एक “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित दूरदर्शी” और “एक बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्ति के रूप में वर्णित किया था जो विश्व स्तर पर सोचते हैं और स्थानीय रूप से कार्य करते हैं।”

जस्टिस मिश्रा की तारीफ़ पर एससीबीए ने बुधवार को एक बयान में कहा था कि एससीबीए का मानना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना है और ऐसी स्वतंत्रता को अक्षरश: और भावना के अनुरूप संरक्षित किया जाना चाहिए।

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