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LIC ने मोदी शासन में PSU कंपनियों में फंसाए 10.7 लाख करोड़ रुपये, 2014 से पहले 6 दशक में लगाया था इतना पैसा!

LIC ने साल 1956 में अस्तित्व में आने के बाद से साल 2013 तक इंश्योरेंस कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में कुल 11.9 लाख करोड़ रुपए का ही निवेश किया था, जो कि बीते 5 सालों के दौरान बढ़कर अब 22.6 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

LICLIC ने PSU कंपनियों में पिछले 5 सालों में किया 10.7 लाख करोड़ रुपए का निवेश।

अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते केन्द्र की मोदी सरकार आलोचकों के निशाने पर है। अब आरबीआई ने कुछ आंकड़े पेश किए हैं, जिससे मोदी सरकार पर हमले तेज हो सकते हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान वित्तीय वर्ष 2014-15 और वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, सरकारी बैंकों में करीब 10.7 लाख करोड़ रुपए निवेश किए हैं।

गौरतलब है कि LIC ने साल 1956 में अस्तित्व में आने के बाद से साल 2013 तक इंश्योरेंस कंपनी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में कुल 11.9 लाख करोड़ रुपए का ही निवेश किया था, जो कि बीते 5 सालों के दौरान बढ़कर अब 22.6 लाख करोड़ रुपए हो गया है। आंकड़ों के आधार पर कह सकते हैं कि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से एलआईसी ने अपने कुल निवेश का 90 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निवेश किया है।

आंकड़ों के अनुसार, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA-2 सरकार में LIC ने सार्वजिक क्षेत्र में 6.2 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश किया हुआ था। जो कि मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 10.7 लाख करोड़ हो गया है और इसमें 72 प्रतिशत का उछाल आया है। मार्च, 2019 तक के आंकड़ों के अनुसार, एलआईसी ने अपना 99 प्रतिशत निवेश स्टॉक एक्सचेंज सिक्योरिटीज में किया है।

द प्रिंट की एक खबर के अनुसार, LIC का सार्वजिक क्षेत्र की कंपनियों में निवेश जहां पिछले पांच सालों में दोगुना हो चुका है, वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों में भी एलआईसी ने अपना निवेश 70 प्रतिशत तक बढ़ाया है। मार्च, 2019 तक LIC की कुल संपत्ति 31 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है, जो कि एलआईसी को इतनी वित्तीय मजबूती के साथ सरकार द्वारा संचालित टॉप कंपनी बनाती है।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 से साल 2019 के बीच 5 सालों के दौरान लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का निजी क्षेत्र में निवेश 21 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गया है। वहीं इस दौरान एलआईसी का सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में निवेश 79 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गया है।

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