दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रोटेस्ट हो रहा है। इस प्रोटेस्ट की अगुवाई पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके कर रहे हैं। सीजेपी की प्रमुख मांगों में एक है, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। सीजेपी चाहती है कि धर्मेंद्र प्रधान नीट-पीजी पेपरलीक की जिम्मेदारी लें और पद छोड़ें।
बुधवार शाम करीब 6:30 बजे मैं भी जंतर-मंतर पहुंचा और रात 10 बजे तक रहा। जंतर-मंतर पर बिताए इन साढ़े तीन घंटों में मैंने वहां मौजूद कई लोगों से बात की। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के भाषण सुने। साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्थिति को भी जानने की कोशिश की।
जब अभिजीत दीपके या उनके सहयोगी भाषण दे रहे थे तो उस दौरान मौजूद भीड़ में कई लोग नारे लगा रहे थे तो कुछ लोगों को मैंने कहते सुना मैं बस घूमने आया हूं और मुझे इससे कोई मतलब नहीं, लेकिन अभिजीत दीपके बार-बार यह जरूर कह रहे थे कि मैंने सोशल मीडिया पर तो क्रांति कर दी, अब धरातल पर क्रांति करने के लिए आप लोगों का सहयोग जरूरी है।
अभिजीत दीपके कहते हैं कि 20 जुलाई को आप लोग मेरा साथ दीजिए। ज्यादा से ज्यादा लोग आइए। 20 तारीख को भले सोमवार है, स्कूल-कॉलेज खुलेंगे, लेकिन उस एक दिन के लिए छुट्टी मारिए, सोनम सर के लिए छुट्टी मारिए। यह देश के लिए होगा और देश के भविष्य के लिए होगा। तभी भीड़ में आवाज लगती है कि ‘सोनम सर के लिए हम बंक मारेंगे’। अभिजीत कहते हैं कि अगर आप लोगों ने मेरा साथ दिया तो सरकार को झुकना पड़ेगा।
अभिजीत कहते हैं कि आप लोग काम करते हो, तब सैलरी मिलती है। कुछ लोग बिना काम किए पांच-पांच और सात-सात साल सैलरी लेते हैं। गाड़ी-बंगला सब लेते हैं। अभिजीत दीपके के भाषण के दौरान भीड़ से एक शख्स राम जन्मभूमि मंदिर दान चोरी का मुद्दा उठाता है तो मौजूद भीड़ में कुछ लोग तालियां बजाते हैं।
इसी दौरान भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति से मैं जानने की कोशिश करता हूं कि वह कहां से आए हैं? उन्होंने बताया कि वह वाराणसी से दिल्ली कुछ काम से आए थे और जंतर-मंतर पर इस विरोध प्रदर्शन को देखने चले आए। उनके साथ उनकी किशोर वय बेटी भी थी। वाराणसी वह क्षेत्र है जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं।
एक अन्य शख्स से बात की और उन्हें बताया कि मैं पत्रकार हूँ तो उन्होंने ताकीद की कि उनका नाम लेकर कुछ न छापें। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने दावा किया कि “यह कोई आंदोलन नहीं है, “आप देख रहे हैं यहां किस तरह की नारेबाजी हो रही है।” हालांकि, उनका सीधा मतलब उस राम मंदिर के नारे से था, जो भीड़ में किसी शख्स ने लगाया था। उन्होंने कहा कि “इस आंदोलन में वही लोग हैं, जो अक्सर मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं।”
मैंने स्टेज पर मौजूद अभिजीत दीपके के एक साथी से पूछा कि क्या सोनम वांगचुक से बात हो सकती है या फिर मेरे दो-तीन सवाल हैं, जिनके जवाब उनसे पूछकर मुझे रिकॉर्ड करके दे दीजिए। उन्होंने वांगचुक की सेहत का हवाला देकर ऐसा करने से इनकार कर दिया।
इस दौरान सोनम वांगचुक बिस्तर पर लेटे हुए थे और एक-दो लोग उनके पैरों और तलवों की मालिश कर रहे थे। बुधवार को सोनम वांगचुक को अनशन के 18 दिन हो चुके थे। उनकी स्वास्थ्य जाँच करने वाले डॉक्टरों के अनुसार उनके वजन में करीब नौ किलो कमी आई है।
प्रोटेस्ट स्थल पर कई तरह के पोस्टर-बैनर भी लगे हुए थे। जिन पर आजादी के नायकों का फोटो लगा था और स्लोगन भी लिखे थे। पोस्टर में भगत सिंह, भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी समेत कई महापुरुषों की फोटो लगी है तो वहीं जमीन पर बैठे दो-तीन लोग पोस्टर-बैनर भी बेच रहे हैं, जिसमें ज्यादातर पोस्टर-बैनर ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के थे। यहां कुछ लोग पोस्टर-बैनर खरीदते दिखे।
जंतर-मंतर पर उपस्थित लोगों को देखकर लगा कि इस प्रोटेस्ट में मुख्य रूप से वामपंथी संगठन ही शामिल हैं, जिनमें स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के छात्र ज्यादा दिखे। इन संगठनों के लोग भी वहां अलग-अलग बैठकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इस दौरान वह अपने हाथों में ढपली लेकर मोदी सरकार के विरोध में नारेबाजी कर रहे हैं। भीड़ में बैठी एक लड़की ढपली लेकर नारा लगाती है कि सोनम वांगचुक जिंदाबाद, सोनम वांगचुक आप संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ…इस नारे को वहां मौजूद भीड़ जोर-जोर से दोहराती है।
प्रदर्शन स्थल पर यूट्यूबरों और कंटेंट-क्रिएटरों की मौजूदगी भी काबिले-गौर रही। सौ से ज्यादा कंटेंट क्रिएटर वहाँ वीडियो और रील बनाने में व्यस्त दिखे। कई कंटेंट क्रिएटर अभिजीत दीपके और उनके साथियों के भाषण रिकॉर्ड कर रहे थे। इनमें से कुछ लोगों से बात करने पर लगा कि उनकी मौजूदगी राजनीतिक कम और कंटेंट क्रिएशन की वजह से ज्यादा थी।
कंटेंट क्रिएटरों और पुलिसवालों को जोड़ लें तो प्रदर्शन स्थल पर 500-700 लोग रहे होंगे। हालांकि, अभिजीत दीपके ने स्टेज से कई बार अनुरोध किया कि ज्यादा से ज्यादा लोग आइए, हमारा साथ दीजिए। दीपके ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक सर 18 दिन से अनशन पर हैं तो पूरा देश एक दिन का अनशन करे।
ग्राउंड जीरो पर बिताने के बाद मुझे ऐसा लगा कि अब यह पूरा प्रोटेस्ट और उसके मुख्य किरदार अभिजीत दीपके न होकर सोनम वांगचुक बन चुके हैं। सीजेपी के लोग और यहां तक की अभिजीत दीपके भी बार-बार सोनम वांगचुक का जिक्र कर लोगों को आमंत्रित करते नजर आ रहे थे।
लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, पर्यावरणविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। पढ़ें पूरी खबर।
