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संघ नेताओं के ‘भड़काऊ’ बयानों की राज्यसभा में निंदा

एक विहिप कार्यकर्ता की हत्या के बाद ‘बदला’ लेने के संघ परिवार के कुछ नेताओं की कथित टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में गुरुवार को चिंता जताई।

Author नई दिल्ली | March 4, 2016 01:11 am

एक विहिप कार्यकर्ता की हत्या के बाद ‘बदला’ लेने के संघ परिवार के कुछ नेताओं की कथित टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने राज्यसभा में गुरुवार को चिंता जताई। जबकि एक मनोनीत सदस्य ने देश की एकता और सौहार्द बनाए रखने की वकालत की। सरकार ने भी ऐसे कथित बयानों की निंदा की और कहा कि इस देश की एकता और सौहार्द पूरी मजबूती से बरकरार है।

शून्यकाल में मनोनीत सदस्य अनु आगा ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि संघ परिवार के कुछ सदस्यों ने हाल ही में ऐसी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी वाले पदों पर नियुक्त लोगों ने आपत्तिजनक बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से विकास का एजंडा प्रभावित होता है और हमें मतभेदों को भूलकर देश के विकास के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए और उनकी निंदा की जानी चाहिए।

विपक्ष के कई सदस्यों ने उनकी बातों से खुद को संबद्ध किया। इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सरकार इस प्रकार की घटनाओं का समर्थन नहीं करती और इसकी निंदा करती है। शून्यकाल में ही कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री ने उत्तर प्रदेश के बड़ौत शहर में 19 फरवरी को आरएसएस व भाजपा के कथित सदस्यों द्वारा देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा पर कालिख पोते जाने का मामला उठाया।

उन्होंने कहा कि प्रतिमा को गंदा करने वाले लोग अपने मुंह पर पट्टी बांधे हुए थे।
उन्होंने देश के निर्माण में नेहरू के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने अंग्रेजों का साथ दिया और अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया, वे हमें राष्ट्रवाद सिखा रहे हैं। मिस्त्री ने कहा कि राजस्थान के एक विधायक ने हमारे नेता को धमकी दी और ऐसे बयानों की निंदा तक नहीं की जा रही। उन्होंने नेहरू की प्रतिमा को गंदा करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सपा सरकार को इस संबंध में कार्रवाई के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री नकवी ने कहा कि हम इस तरह के कृत्यों का समर्थन नहीं करते और निंदा करते हैं। उन्होंने हालांकि कहा कि यह कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला है जो राज्य का विषय है। शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर राय ने पश्चिम बंगाल के दो लाख करोड़ रुपए के भारी कर्ज को पुनर्गठित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सहयोगात्मक संघवाद में भरोसा करती है तो उसे विभिन्न मदों में राज्य की बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के ही नदीमुल हक ने केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में देरी पर सवाल किया और कहा कि इससे लंबित आरटीआइ आवेदनों की संख्या में खासी वृद्धि हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति समय से की जानी चाहिए।
माकपा की झरना दास वैद्य ने छत्तीसगढ़ में 40 आदिवासी महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा सामूहिक दुष्कर्म और शारीरिक शोषण का मुद्दा उठाया और इस मामले की निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग की।

बीजद के भूपिंद्र सिंह ने ओड़ीशा के सूखा प्रभावित 235 प्रखंडों (ब्लॉक) को तत्काल मुआवजा दिए जाने की मांग की। उन्होंने इस क्रम में दावा किया कि फैलिन चक्रवात के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब तक केंद्र ने पूरी राशि नहीं दी है। शून्यकाल में ही जद (एकी) की कहकशां परवीन ने विशेष जिक्र के जरिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मस्थान सिताबदियारा को कटाव से बचाने की मांग की।

बीजद के दिलीप कुमार तिर्की ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की सुरक्षा और मरम्मत के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की। कांगे्रस के भालचंद्र मुंगेकर, मोतीलाल वोरा और पीजी रेड्डी, माकपा के केके रागेश, भाजपा के तरूण विजय, जद (एकी) के रामनाथ ठाकुर, तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता सहित कई अन्य सदस्यों ने भी विशेष जिक्र के जरिए लोक महत्व के अलग-अलग मुद्दे उठाए।

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